
फॉरेंसिक साइंस के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण आयोजन ‘प्रमाण 3.0’ 26 फरवरी 2026 से शुरू हुआ। यह उन्नत स्तर का सम्मेलन छात्रों और पेशेवरों को वास्तविक जांच प्रक्रियाओं की समझ देने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। ‘The Thinking That Turns Clues Into Conclusions’ थीम के साथ यह कार्यक्रम बताता है कि भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली में फॉरेंसिक साइंस किस तरह काम करती है—सबूत इकट्ठा करने से लेकर अदालत में उसे पेश करने तक की पूरी प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा होगी।
यह दो दिवसीय सम्मेलन पीएसएच ऑडिटोरियम में आयोजित किया जा रहा है, जहां विशेषज्ञों के व्याख्यान और प्रश्नोत्तर सत्र होंगे।
पहले दिन की खास झलकियां
सम्मेलन के मुख्य अतिथि रहे डॉ. कृष्णा विश्वनाथराव कुलकर्णी, जो Directorate of Forensic Science Laboratory, Maharashtra के निदेशक हैं। डॉ. कुलकर्णी ने आपराधिक न्याय प्रणाली में फॉरेंसिक साइंस की भूमिका, कार्यप्रणाली की चुनौतियां, सटीकता की आवश्यकता और दबाव की स्थिति में निर्णय लेने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्याख्यान दिया।
उनके साथ मंच साझा किया:
– डॉ. टीना शर्मा, आईपीआर सेल और फॉरेंसिक साइंस विभागाध्यक्ष, शिमला यूनिवर्सिटी।
– डॉ. गरिमा पाल, सहायक प्रोफेसर, Maharashtra National Law University (एमएनएलयू)।
इन सत्रों में राष्ट्रीय फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं, विधि शिक्षा और फॉरेंसिक तकनीक से जुड़े विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किये। छात्रों को उन जांच प्रक्रियाओं की झलक मिली, जो आमतौर पर पाठ्यपुस्तकों में विस्तार से नहीं मिलतीं।
दूसरे दिन फॉरेंसिक टेक्नोलॉजी पर फोकस
27 फरवरी को आधुनिक फॉरेंसिक तकनीक पर विशेष सत्र आयोजित होंगे।
– शमशाद बेगम खान, सीईओ, विज़ोप्सी और वीएएफएस।
– अजय अप्पुकुट्टन नायर, चेयरमैन, विज़ोप्सी और वीएएफएस।
ये विशेषज्ञ नई तकनीकों, डिजिटल फॉरेंसिक और जांच में तकनीकी नवाचार की भूमिका पर चर्चा करेंगे।
कार्यक्रम की प्रमुख जानकारी
स्थान: पीएसएच ऑडिटोरियम
तारीख: 26-27 फरवरी 2026
मुख्य विषय: साक्ष्य विश्लेषण, आपराधिक न्याय में उपयोग, फॉरेंसिक तकनीक
प्रारूप: विशेषज्ञ व्याख्यान और प्रश्नोत्तर सत्र
क्यों खास है प्रमाण 3.0?
Parul University द्वारा आयोजित यह सम्मेलन थ्योरी से आगे बढ़कर प्रैक्टिकल सीखने पर जोर देता है। यहां वास्तविक लैब प्रक्रियाएं, केस स्टडी और ट्रायल की वास्तविकताओं पर चर्चा होगी। फॉरेंसिक साइंस के छात्र, लॉ स्कूल की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी और आपराधिक न्याय प्रणाली से जुड़े पेशेवर इस कार्यक्रम से सीधे अनुभवी निदेशकों, लैब प्रबंधकों और तकनीकी विशेषज्ञों से सीख सकते हैं।
साल 2026 में फॉरेंसिक साइंस में प्रवेश की तैयारी कर रहे और एआईएफएसईटी जैसी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए यह सम्मेलन विशेष रूप से उपयोगी माना जा रहा है।
प्रमाण 3.0 शुरू हो चुका है। महाराष्ट्र एफएसएल के निदेशक डॉ. कुलकर्णी और अन्य विशेषज्ञों के विचार इस आयोजन को फॉरेंसिक साइंस, कानून और तकनीक के संगम का एक अहम मंच बना रहे हैं।




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