
Harsh Malhotra ने Amity University के अर्थशास्त्र विभाग द्वारा आयोजित 9वें राष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेते हुए इस पहल को “विकसित भारत” के विज़न की एक मजबूत नींव बताया।
दो दिवसीय इस सम्मेलन में स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी के छात्रों को आमंत्रित किया गया, जहां उन्होंने स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों के जरिए सतत विकास और भारत के आर्थिक भविष्य को मजबूत करने पर चर्चा की। छात्रों को संबोधित करते हुए मंत्री ने युवा शोधकर्ताओं की भूमिका को बेहद अहम बताया। उन्होंने कहा कि भारत, जो आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है, जल्द ही तीसरे स्थान पर पहुंच सकता है—और इसमें युवाओं का योगदान निर्णायक होगा।
इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक भारतीय ज्ञान को आधुनिक आर्थिक चुनौतियों से जोड़ना था। इसमें सतत संसाधन प्रबंधन, ग्रामीण नवाचार और सांस्कृतिक आधार पर विकसित आर्थिक मॉडल जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए और अकादमिक सिद्धांतों को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से जोड़ने का प्रयास किया।
श्री मल्होत्रा की मौजूदगी ने यह स्पष्ट किया कि छात्र-नेतृत्व वाले शैक्षणिक प्रयास देश की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इस दौरान अमिटी के अर्थशास्त्र के छात्रों को नीति-निर्माताओं के साथ सीधे संवाद का अवसर मिला, जहां “विकसित भारत” के लक्ष्य—2047 तक भारत को एक विकसित देश बनाने—से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
सम्मेलन में दो दिनों तक अकादमिक व्याख्यान, पैनल चर्चाएं और नेटवर्किंग सत्र आयोजित किए गए, जिससे शिक्षा और नीति-निर्माण के बीच मजबूत संबंध स्थापित हुआ। मंत्री की भागीदारी इस बात का संकेत है कि उच्च शिक्षा संस्थानों और देश के नेतृत्व के बीच आर्थिक और सतत विकास के क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है।
अमिटी विश्वविद्यालय अपने अर्थशास्त्र कार्यक्रमों को शोध आधारित प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित कर रहा है, जो भारत की आर्थिक आकांक्षाओं के अनुरूप हैं। यह सम्मेलन इस बात का उदाहरण है कि छात्र भी राष्ट्रीय विमर्श में सार्थक योगदान दे सकते हैं।




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