
नॉर्थकैप यूनिवर्सिटी (NorthCap University) के इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस सेल (IQAC) ने 30 से 31 मार्च 2026 के बीच उच्च शिक्षण संस्थानों (HEIs) में नई शिक्षा नीति (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। यह सम्मेलन आउटपुट-आधारित शिक्षा (Outcome-Based Education) और अंतरराष्ट्रीयकरण के विषय पर केंद्रित रहा। कार्यक्रम का सह-आयोजन ASIC UK के साथ किया गया, जबकि Services Export Promotion Council (SEPC) ने इसे समर्थन दिया। साथ ही, Metisoft Labs और Somah EduSolutions Pvt. Ltd. ने प्रायोजन किया।
सम्मेलन का उद्देश्य क्या था
इस सम्मेलन में देश-विदेश के कुलपति, डीन, अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता विशेषज्ञ और इंडस्ट्री लीडर्स शामिल हुए। आठ से अधिक राज्यों के संस्थानों ने अपने शोध प्रस्तुत किए। National Education Policy 2020 के तहत उच्च शिक्षा संस्थानों को आउटपुट-आधारित शिक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अकादमिक अंतरराष्ट्रीयकरण के माध्यम से अपने पाठ्यक्रमों को बेहतर बनाने का मार्ग दिया गया है—इसी दिशा में यह सम्मेलन एक महत्वपूर्ण पहल रहा।
उद्घाटन सत्र में प्रमुख वक्ताओं के विचार
उद्घाटन सत्र में वरिष्ठ विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। स्वर्ण जयंती हरियाणा इंस्टीट्यूट ऑफ फिस्कल मैनेजमेंट के महानिदेशक और हरियाणा मुख्यमंत्री के ओएसडी प्रो. (डॉ.) राज नेहरू ने उच्च शिक्षा में आउटपुट-आधारित शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट और भारतीय ज्ञान परंपरा के समावेशन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हर सुधार के केंद्र में छात्र होना चाहिए।
वहीं, SEPC के महानिदेशक डॉ. अभय सिन्हा ने भारतीय शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किस तरह SEPC की योजनाएं भारतीय संस्थानों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में मदद कर सकती हैं।
दो दिनों में तीन अहम पैनल चर्चा
सम्मेलन के दौरान तीन प्रमुख पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं, जिनमें अलग-अलग विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। पहली चर्चा में NEP 2020 के तहत अकादमिक सिस्टम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग पर बात की गई। दूसरी चर्चा गुणवत्ता आश्वासन और मान्यता (अक्रेडिटेशन) में AI की भूमिका पर केंद्रित रही। तीसरी चर्चा में इंडस्ट्री और अकादमिक जगत के बीच साझेदारी को मजबूत करने के तरीकों पर विचार किया गया, ताकि भारतीय विश्वविद्यालय अंतरराष्ट्रीय मानकों तक पहुंच सकें।
क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल
भारत की नई शिक्षा नीति 2020 पिछले कई दशकों में सबसे बड़ा शिक्षा सुधार माना जा रहा है। हालांकि, इसे देशभर के उच्च शिक्षा संस्थानों में लागू करना एक जटिल और संसाधन-आधारित प्रक्रिया है। ऐसे में इस तरह के सम्मेलन नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों और इंडस्ट्री के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर व्यावहारिक समाधान तैयार करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
NCU के IQAC ने यह स्पष्ट किया कि शिक्षा में गुणवत्ता सुनिश्चित करना केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक निरंतर विकसित होने वाली प्रणाली होनी चाहिए, जो समय के साथ शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाए।
इस सम्मेलन को SEPC का सहयोग मिला, जबकि Metisoft Labs और Somah EduSolutions Pvt. Ltd. ने इसे प्रायोजित किया। अधिक जानकारी के लिए नॉर्थकैप यूनिवर्सिटी, गुरुग्राम के IQAC विभाग से संपर्क किया जा सकता है।




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