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In the Digital Era, Media Has Become More Democratic: Sreemoyee Piu Kundu

डिजिटल दौर में मीडिया अधिक लोकतांत्रिक हो गया है: श्रीमोयी पियू कुंडू

In the Digital Era, Media Has Become More Democratic: Sreemoyee Piu Kundu

प्रख्यात भारतीय लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमोयी पियू कुंडू से खास बातचीत

श्रीमोयी पियू कुंडू एक प्रख्यात भारतीय लेखिका, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जो भारत में जेंडर, यौनिकता और अविवाहित महिलाओं के जीवन से जुड़े मुद्दों पर अपने काम के लिए जानी जाती हैं। वह “स्टेटस सिंगल” की संस्थापक हैं, जो शहरी अविवाहित महिलाओं के सशक्तिकरण और उनकी पहचान को सामने लाने के लिए समर्पित एक कम्युनिटी और प्लेटफॉर्म है। सोशल मीडिया और यूट्यूब चैनल के जरिए भी उन्होंने अच्छी पहचान बनाई है। श्रीमोयी पियू कुंडू से खास बातचीत के प्रमुख अंश: 

प्रश्न 1: सोशल मीडिया और यूट्यूब पर आपके चैनल और पेज काफी लोकप्रिय हैं, आपने इसकी शुरुआत कैसे की?

– मैंने अपना यूट्यूब चैनल 2024 में, मई महीने में शुरू किया था। फेसबुक और इंस्टाग्राम पर मैं उससे पहले से ही सक्रिय थी। दरअसल, मैं शुरू से ही अलग-अलग मीडिया प्लेटफॉर्म्स से जुड़ी रही हूं, इसलिए यह मेरे लिए काफी स्वाभाविक रहा। अपनी बात लोगों तक पहुंचाने के लिए मैंने एक समय किताब भी लिखी और अब पॉडकास्ट करती हूं। माध्यम बदलता रहता है, लेकिन अगर मैं लोगों तक अपनी बात पहुंचा पा रही हूं, तो वही मेरी सफलता है।

प्रश्न 2: आप सोशल मीडिया और यूट्यूब पर अलग-अलग लोगों के साथ कई विषयों पर चर्चा और इंटरव्यू करती हैं। आपके प्लेटफॉर्म पर मुख्य फोकस किन विषयों पर रहता है?

– अगर आप मेरे यूट्यूब या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स देखेंगे, तो पाएंगे कि मेरे अधिकतर विषय और मेहमान महिलाओं से जुड़े होते हैं। मैं कोशिश करती हूं कि समाज में मौजूद महिलाओं के अलग-अलग रूप, उनकी भूमिका और उनके योगदान को सामने लाया जाए। महिलाएं समाज को कैसे प्रभावित कर रही हैं—यह सकारात्मक है या नकारात्मक—इन सभी पहलुओं को समझना जरूरी है।

मेरे कंटेंट में आमतौर पर इंटरव्यू देने वाली महिलाओं के जीवन और काम के अनुभवों को साझा किया जाता है। यही मेरे पॉडकास्ट और वीडियो का मुख्य विषय होता है। हालांकि हर व्यक्ति अलग होता है, इसलिए हर एपिसोड में विषय भी बदलता रहता है।

प्रश्न 3: आप कई बार राजनीतिक मुद्दों पर भी चर्चा करती हैं। दर्शकों की प्रतिक्रिया कैसी रहती है? क्या वे निष्पक्षता से संतुष्ट होते हैं?

– देखिए, राजनीति समाज का एक हिस्सा है। यह अच्छा है या बुरा, इसका निर्णय मैं नहीं करूंगी, लेकिन एक लोकतांत्रिक देश में हर व्यक्ति की भागीदारी जरूरी है। चूंकि राजनीति पूरे समाज को प्रभावित करती है, इसलिए यह कई बार विवादित भी हो जाती है।

लेकिन मेरा मानना है कि अगर बहस और चर्चा के बाद हम किसी बेहतर निष्कर्ष पर पहुंचते हैं, तो यह जरूरी और उपयोगी है। ऐसी चर्चाएं समाज के लिए नुकसानदायक नहीं बल्कि फायदेमंद हो सकती हैं।

प्रश्न 4: आप आधुनिक दौर के नए मीडिया की प्रतिनिधि हैं। आज के समय में इस मीडिया को आप कैसे देखती हैं?

– आज के दौर का मीडिया मुख्य रूप से सोशल मीडिया और इंटरनेट आधारित है। 2016 में जियो के आने और 2022 में 5G की शुरुआत के बाद भारत में इंटरनेट का उपयोग तेजी से बढ़ा है। आने वाले समय में यह और बढ़ेगा।

इससे लोगों तक ज्यादा जानकारी और अलग-अलग विचार आसानी से पहुंच पाएंगे और साझा किए जा सकेंगे।

प्रश्न 5: क्या नया मीडिया वास्तव में पारंपरिक मीडिया जैसे टीवी और अखबार को चुनौती दे पाया है?

– आज 2026 में खड़े होकर मैं कह सकती हूं कि नया मीडिया काफी हद तक पारंपरिक मीडिया पर भारी पड़ा है। अखबार और टीवी अब धीरे-धीरे पीछे छूटते नजर आ रहे हैं और उनकी जगह OTT और सोशल मीडिया ले रहे हैं।

इस डिजिटल दौर में मीडिया अधिक लोकतांत्रिक हो गया है। अब आम लोग भी अपनी बात दुनिया तक पहुंचा सकते हैं। यह एक सकारात्मक बदलाव है। हालांकि, हर किसी की राय सभी को पसंद नहीं आती, लेकिन यही लोकतंत्र की खूबसूरती है।

प्रश्न 6: नए मीडिया का भविष्य आप कैसा देखती हैं? और आपके अपने प्लेटफॉर्म को लेकर आगे क्या योजना है?

– मेरे अनुसार नए मीडिया का भविष्य बहुत उज्ज्वल है। तकनीक के विकास के साथ इस क्षेत्र में और भी नई संभावनाएं सामने आएंगी। लोगों को भी तकनीक के साथ खुद को अपडेट करना होगा और आधुनिक सोच अपनानी होगी, नहीं तो वे इस तेजी से बदलती दुनिया के साथ तालमेल नहीं बैठा पाएंगे।

 

 

 

 

Asmita Sarkar

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