
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट ने इस सत्र से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए एक नई शैक्षणिक पहल शुरू की है। यह पहल न सिर्फ छात्रों के करियर को मजबूती देगी, बल्कि किसानों को भी आधुनिक और टिकाऊ खेती की दिशा में सीधा लाभ देगी। विभाग के निदेशक आर. आर. सिंह के अनुसार, पिछले पाँच वर्षों से चल रहा बीएससी एग्रीकल्चर ऑनर्स कोर्स अब एक नए रूप में विस्तार पा रहा है। इसी के तहत ‘बीएससी एजी ऑनर्स नेचुरल फार्मिंग’ की शुरुआत की गई है, जो पूरी तरह प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों और तकनीकों पर आधारित होगा।
यह नया कोर्स छात्रों को खेतों से जुड़े वास्तविक अनुभव देगा। सैद्धांतिक पढ़ाई के साथ-साथ छात्रों को मिट्टी की गुणवत्ता, जैविक उर्वरक, देसी तकनीक और प्राकृतिक खेती के विभिन्न मॉडल पर फील्ड रिसर्च करने का अवसर मिलेगा। इससे उन्हें खेती-किसानी से जुड़े सरकारी-गैर सरकारी सेक्टर, अनुसंधान संस्थानों और कृषि-आधारित स्टार्टअप्स में रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकते हैं। विभाग का मानना है कि आने वाले वर्षों में प्राकृतिक खेती और जैविक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ेगी, ऐसे में यह कोर्स छात्रों को भविष्य के बाजार के अनुरूप तैयार करेगा।
इसी दिशा में विश्वविद्यालय का एग्रीकल्चर विभाग ‘कल्टीवेशन प्रोजेक्ट’ के तहत पाली हाउस भी विकसित कर रहा है, जहां उच्च गुणवत्ता वाली सीडलिंग्स तैयार की जाएंगी। पाली हाउस तकनीक किसानों को मौसम की सीमाओं से बाहर निकलकर फसल उत्पादन करने में मदद देगी। इससे सब्जियों और अन्य फसलों का उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आमदनी में भी सुधार होगा। बेहतर गुणवत्ता की तैयार सीडलिंग्स मिलने से किसान समय बचा सकेंगे और शुरुआती लागत कम कर पाएंगे।
विभाग आगे चलकर किसानों के लिए नर्सरी सुविधा भी शुरू करने जा रहा है। इस नर्सरी में तैयार पौधे सीधे किसानों को उपलब्ध होंगे, जिससे उन्हें बीज से पौधा तैयार करने की लंबी प्रक्रिया से मुक्ति मिलेगी। यह पहल छात्रों और किसानों के बीच एक मजबूत रिश्ता बनाएगी—जहां छात्र अपने शोध के माध्यम से नई तकनीकें विकसित करेंगे और किसान तुरंत उसका लाभ उठा पाएंगे।
गोरखपुर विश्वविद्यालय की यह कोशिश खेती को टिकाऊ, लाभकारी और वैज्ञानिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। प्राकृतिक खेती पर आधारित यह कोर्स न सिर्फ शिक्षा जगत के लिए, बल्कि कृषि क्षेत्र के भविष्य के लिए भी एक सकारात्मक बदलाव ला सकता है।




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