
चेन्नई में एक खास वीकेंड बाजार का आयोजन किया जा रहा है, जहां लोग सीधे ऑर्गेनिक किसानों से मिल सकेंगे और खेत से थाली तक खाने की पूरी यात्रा को समझ पाएंगे। इस बाजार में करीब दस स्थानीय किसान अपनी उपज के साथ मौजूद रहेंगे और लोगों को अपनी ऑर्गेनिक खेती के तरीकों के बारे में जानकारी देंगे। इस पहल को ऑर्गेनिक फूड को बढ़ावा देने वाली गैर-लाभकारी संस्था “द री-स्टोर” का सहयोग मिला है।
यह बाजार आम मंडियों से अलग होगा, क्योंकि यहां लोग किसानों से सीधे बातचीत कर सकेंगे—जैसे कि फसल के मौसम, बिना केमिकल के कीट नियंत्रण के तरीके और खेती की चुनौतियों पर चर्चा कर पाएंगे।
इस पहल की सह-संस्थापक राधिका राममोहन के अनुसार, इसका उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि ऑर्गेनिक खेती में कितनी मेहनत लगती है। उनका मानना है कि जब परिवार किसान से सीधे जुड़ते हैं, तो वे समझ पाते हैं कि मौसमी खाद्य पदार्थ अधिक स्वादिष्ट क्यों होते हैं और सतत खेती क्यों जरूरी है। यह केवल जानकारी हासिल करने का मंच नहीं, बल्कि जमीन और उसे संवारने वाले लोगों से रिश्ता जोड़ने का माध्यम भी है। ताजी सब्जियों को खुद छूकर और चुनकर लोग अपने भोजन के स्रोत के प्रति अधिक जागरूक बनते हैं।
इस बाजार में आने वाले लोग मिट्टी की सेहत, फसल चक्र (क्रॉप रोटेशन) और बिना रसायनों वाली खेती में आने वाली चुनौतियों के बारे में भी सीख सकेंगे। यहां होने वाली बातचीत सामान्य दुकानों से कहीं अधिक गहराई लिए होती है। यह बाजार सिर्फ खरीद-बिक्री का स्थान नहीं, बल्कि किसानों और उपभोक्ताओं के बीच भरोसा बनाने की पहल है
ताजे फल और सब्जियों के अलावा, इस इको बाजार में सतत जीवनशैली से जुड़ी कई गतिविधियां भी होंगी। बच्चों और अभिभावकों के लिए पाम लीफ क्राफ्ट, ब्लॉक प्रिंटिंग, नारियल के खोल से कला (कोकोनट शेल आर्ट) जैसी वर्कशॉप्स आयोजित की जाएंगी, जिनमें रजिस्ट्रेशन के आधार पर भाग लिया जा सकेगा।
इन गतिविधियों का उद्देश्य पारंपरिक कौशल को जीवित रखना और लोगों में रचनात्मकता व प्रकृति के प्रति लगाव बढ़ाना है। बाजार में टेराकोटा उत्पाद, मिट्टी के बर्तन, पाम लीफ क्राफ्ट और हैंडलूम कपड़े जैसे पर्यावरण के अनुकूल घरेलू सजावट और लाइफस्टाइल उत्पाद भी बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे
साथ ही, एक रिपेयर कैफे भी लगाया जाएगा, जहां लोग अपने कपड़ों की मरम्मत या बदलाव करवा सकेंगे। यह पहल “रीयूज” के महत्व को समझाने और नई चीजें खरीदने की बजाय पुराने सामान के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक कदम है, जो दीर्घकालिक सतत विकास को समर्थन देता है।
गार्डनिंग के शौकीनों के लिए कम्पोस्ट बीज, पॉटिंग सॉइल, पंचगव्य और बागवानी के जरूरी उपकरण भी यहां उपलब्ध होंगे। खाने-पीने के स्टॉल में पारंपरिक अनाज, करुपट्टी (पाम गुड़) से बने मिठाई और प्राकृतिक पेय जैसे पधनीर (ताजा पाम रस) और एलानेर (नारियल पानी) शामिल होंगे। इसका उद्देश्य खासकर युवाओं को पारंपरिक और स्वास्थ्यवर्धक भोजन से परिचित कराना है।




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