
भारत और सेशेल्स ने कृषि क्षेत्र में अपने सहयोग को नई दिशा देने की पहल की है। प्रधानमंत्री की सेशेल्स यात्रा के दौरान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और सेशेल्स के मत्स्य पालन, कृषि एवं ब्लू इकोनॉमी मंत्रालय के कृषि विभाग के बीच कृषि अनुसंधान और शिक्षा से जुड़े एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच आधुनिक कृषि तकनीकों, अनुसंधान, शिक्षा और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करना है।
इस समझौते के तहत भारत और सेशेल्स संयुक्त कृषि अनुसंधान परियोजनाओं पर काम करेंगे। साथ ही दोनों देशों के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के बीच आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया जाएगा। आधुनिक कृषि तकनीकों, नई शोध पद्धतियों और बेहतर खेती के तरीकों को साझा कर कृषि क्षेत्र में नवाचार को गति देने पर विशेष जोर रहेगा।
एमओयू को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए 2026 से 2031 तक की पांच वर्षीय कार्ययोजना भी तैयार की गई है। इस योजना में जलवायु-स्मार्ट कृषि, बागवानी, फसल कटाई के बाद प्रबंधन (पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट), पशुपालन विकास और टिकाऊ खाद्य एवं पोषण सुरक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। बदलते जलवायु परिदृश्य को देखते हुए इन क्षेत्रों में सहयोग को भविष्य की जरूरत माना जा रहा है।
इस साझेदारी से दोनों देशों के कृषि संस्थानों के बीच सहयोग और मजबूत होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कृषि उत्पादकता बढ़ाने, किसानों और कृषि विशेषज्ञों की तकनीकी क्षमता विकसित करने तथा टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा और पोषण सुरक्षा जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए भी साझा रणनीति विकसित की जा सकेगी।
आईसीएआर लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए कृषि क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहा है। परिषद अब तक दुनिया के कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ 100 से अधिक समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर कर चुकी है। सेशेल्स के साथ हुआ यह नया समझौता उसी रणनीति का हिस्सा है, जिसके माध्यम से भारत वैश्विक स्तर पर कृषि सहयोग का दायरा लगातार बढ़ा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन का असर खेती पर तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे समय में जलवायु-स्मार्ट कृषि, बेहतर बीज, आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक अनुसंधान भविष्य की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी हैं। भारत और सेशेल्स के बीच यह सहयोग किसानों तक नई तकनीकों और बेहतर कृषि प्रबंधन की पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
हिंद महासागर क्षेत्र में यह समझौता केवल कृषि सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत और सेशेल्स के रणनीतिक संबंधों को भी मजबूती देगा। साथ ही यह ग्लोबल साउथ के देशों के साथ भारत की साझेदारी को आगे बढ़ाने, टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने और खाद्य एवं पोषण सुरक्षा से जुड़े साझा लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।




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