टेलीकॉम टावरों पर जंग और तकनीकी नुकसान का पता लगाने के लिए अब कर्मचारियों को ऊंचाई पर चढ़कर जोखिम उठाने की जरूरत कम हो सकती है। दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (DTU) की छात्र टीम बिटक्वेस्ट (BitQuest) ने ड्रोन, 5G तकनीक और आभासी वास्तविकता (VR) की मदद से टेलीकॉम टावरों का दूर से निरीक्षण करने वाला एक समाधान विकसित किया है। इस तकनीक को वेल्डसाइट (WeldSight) नाम दिया गया है।
दिए गए विवरण के अनुसार, इस नवाचार को दूरसंचार विभाग के 5G इनोवेशन हैकाथॉन 2026 में पहला स्थान मिला। हालांकि, पुरस्कार राशि को लेकर उपलब्ध आधिकारिक जानकारी और दिए गए विवरण में अंतर है। दूरसंचार विभाग की आधिकारिक घोषणा के मुताबिक, हैकाथॉन में प्रथम पुरस्कार ₹5 लाख का निर्धारित था। इसलिए टीम को मिली वास्तविक पुरस्कार राशि की पुष्टि विश्वविद्यालय या आयोजन समिति की आधिकारिक घोषणा से की जानी चाहिए।
क्या है वेल्डसाइट तकनीक और कैसे करेगी काम?
टेलीकॉम टावरों का नियमित निरीक्षण जरूरी होता है। मौसम, नमी और लंबे समय तक इस्तेमाल के कारण टावरों के कुछ हिस्सों में जंग लग सकती है या संरचना को नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे में जांच के लिए कर्मचारियों को ऊंचाई पर चढ़ना पड़ता है, जिससे दुर्घटना का जोखिम बना रहता है।
DTU की टीम ने वेल्डसाइट के जरिए इस प्रक्रिया को आसान और सुरक्षित बनाने की कोशिश की है। इस प्रणाली में ड्रोन पर लगे उपकरणों की मदद से टावर के अलग-अलग हिस्सों की जांच की जा सकती है। 5G तकनीक से निरीक्षण के दौरान जुटाई गई जानकारी दूर तक भेजने में मदद मिल सकती है, जबकि VR के जरिए विशेषज्ञ दूर बैठकर टावर की स्थिति का आकलन कर सकते हैं।
इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल टेलीकॉम कंपनियों के लिए टावरों के रखरखाव को अधिक सुविधाजनक बना सकता है। हालांकि, वास्तविक परिस्थितियों में इसकी सटीकता, लागत और बड़े स्तर पर इस्तेमाल की क्षमता का आकलन तकनीकी परीक्षणों के आधार पर ही किया जा सकेगा।
इंडिया मोबाइल कांग्रेस में किया गया सम्मानित
दिए गए विवरण के अनुसार, टीम को इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2026 के दौरान केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने सम्मानित किया। टीम को पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र दिया गया। संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने भी टीम को बधाई दी।
टीम के सदस्यों में हर्ष भाटिया टीम लीडर के रूप में शामिल हैं। इनके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के अर्पित मदान और कंप्यूटर विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग की विनीता कुमारी मीना ने इस परियोजना में योगदान दिया।
परियोजना को DTU के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की डॉ. अनामिका चौहान और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार इंजीनियरिंग विभाग के कौस्तुभ रंजन सिंह ने मार्गदर्शन दिया।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रतीक शर्मा ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता जताई। उनके अनुसार, ड्रोन, 5G और VR जैसी तकनीकों को एक साथ जोड़ने से दूरसंचार ढांचे की जांच के लिए नए रास्ते खुल सकते हैं।
टेलीकॉम उद्योग के लिए क्यों अहम है यह नवाचार?
देश में मोबाइल नेटवर्क के विस्तार के साथ टेलीकॉम टावरों की नियमित जांच और रखरखाव भी महत्वपूर्ण हो गया है। यदि ड्रोन आधारित निरीक्षण तकनीक भरोसेमंद साबित होती है, तो इससे कर्मचारियों को ऊंचाई पर चढ़ने की जरूरत कम करने, संभावित नुकसान की समय रहते पहचान करने और रखरखाव की योजना बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, यह तकनीक पारंपरिक निरीक्षण की पूरी तरह जगह ले पाएगी या नहीं, यह इसके परीक्षण, सुरक्षा मानकों और वास्तविक इस्तेमाल के नतीजों पर निर्भर करेगा। फिलहाल, वेल्डसाइट जैसी पहल भारत में 5G और ड्रोन तकनीक के व्यावहारिक इस्तेमाल की संभावनाओं को दिखाती है।




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