भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास का सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर 100 से अधिक मृत व्यक्तियों के दिमागों का हाई-रिजॉल्यूशन 3D डिजिटल एटलस तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है। इस परियोजना के तहत इंसानी दिमाग की बनावट, उसके विकास, उम्र बढ़ने के साथ होने वाले बदलावों और अलग-अलग न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का अध्ययन किया जाएगा। संस्थान के अधिकारियों के मुताबिक, इस पहल से वैज्ञानिकों को दिमाग की संरचना और बीमारियों से होने वाले नुकसान को अधिक बारीकी से समझने में मदद मिल सकती है।
दिमाग की बीमारियों को समझने में मिलेगी मदद
IIT मद्रास के अनुसार, सेंटर ने इस्केमिक स्ट्रोक से प्रभावित इंसानी दिमाग का 3D डिजिटल एटलस विकसित किया है। इस्केमिक स्ट्रोक तब होता है, जब खून का थक्का या किसी अन्य रुकावट के कारण दिमाग के किसी हिस्से तक पर्याप्त रक्त नहीं पहुंच पाता। इससे दिमाग की कोशिकाओं को ऑक्सीजन की कमी के कारण नुकसान हो सकता है।
इस एटलस में दिमाग की 1,000 से अधिक चिह्नित तस्वीरें शामिल हैं। इनमें MRI स्कैन और दिमाग के ऊतकों की बेहद बारीक तस्वीरों को एक साथ जोड़ा गया है। इससे शोधकर्ताओं को दिमाग में सूजन, ऑक्सीजन की कमी और रक्त प्रवाह बाधित होने के कारण ऊतकों को हुए नुकसान का अध्ययन करने में मदद मिल सकती है।
इस तरह के डिजिटल एटलस का इस्तेमाल दिमाग की संरचना में होने वाले बदलावों को समझने, अलग-अलग मामलों की तुलना करने और भविष्य में बीमारी की पहचान व उपचार से जुड़े शोध को आगे बढ़ाने में किया जा सकता है। हालांकि, इस तकनीक से मरीजों के इलाज में तत्काल सुधार होगा या नहीं, यह आगे होने वाले शोध और उसके परिणामों पर निर्भर करेगा।
परम शक्ति सुपरकंप्यूटर से तैयार हुआ डिजिटल एटलस
इस परियोजना में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की सहायता से परम शक्ति सुपरकंप्यूटर का इस्तेमाल किया गया है। बड़ी मात्रा में मेडिकल इमेज और ऊतकों की तस्वीरों को संसाधित करने के लिए उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग अहम भूमिका निभाती है।
IIT मद्रास की इस पहल में 200 से अधिक शोधकर्ता और तकनीशियन, 10 से ज्यादा भारतीय चिकित्सा संस्थान और 30 से अधिक अंतरराष्ट्रीय सहयोगी जुड़े हैं। परियोजना को फेयरफैक्स फाइनेंशियल के चेयरमैन प्रेम वत्सा और इन्फोसिस के सह-संस्थापक क्रिस गोपालकृष्णन से भी वित्तीय सहयोग मिला है।
100 से अधिक इंसानी दिमागों का डिजिटल एटलस तैयार करने की योजना से शोधकर्ताओं को उम्र के अलग-अलग पड़ावों पर दिमाग में होने वाले बदलावों और विभिन्न बीमारियों के प्रभावों का तुलनात्मक अध्ययन करने का अवसर मिल सकता है। इससे न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में भारत की शोध क्षमता को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री मोदी ने किया ब्रेन सेंटर का उद्घाटन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 अक्टूबर को तमिलनाडु दौरे के दौरान सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर को देश को समर्पित किया। इस अवसर पर इस्केमिक स्ट्रोक से प्रभावित इंसानी दिमाग का 3D एटलस भी जारी किया गया। संस्थान के अनुसार, यह अपनी तरह की दुनिया की पहली पहल है।
तमिलनाडु दौरे पर प्रधानमंत्री ने करीब 13,000 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया। चेन्नई मेट्रो के दूसरे चरण से जुड़ी परियोजनाओं के कार्यक्रम में शामिल होने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के साथ मेट्रो में यात्रा की। इसके बाद प्रधानमंत्री जयगोपाल गरोडिया हिंदू विद्यालय के स्वर्ण जयंती समारोह में पहुंचे।
छात्रों को संबोधित करते हुए मोदी ने उन्हें बड़े सपने देखने, अपनी सोच का दायरा बढ़ाने और नए विचारों के जरिए वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि देश में युवाओं के लिए अवसर मौजूद हैं और उन्हें भविष्य को व्यापक नजरिये से देखना चाहिए। प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने में युवाओं की भूमिका पर भी जोर दिया।
भारत में मेडिकल रिसर्च के लिए क्यों अहम है यह पहल?
इंसानी दिमाग शरीर के सबसे जटिल अंगों में से एक है। स्ट्रोक, उम्र बढ़ने और दूसरी न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के कारण इसकी संरचना और काम करने की क्षमता पर अलग-अलग प्रभाव पड़ सकते हैं। दिमाग की उच्च गुणवत्ता वाली 3D डिजिटल तस्वीरें शोधकर्ताओं को इन बदलावों को समझने के लिए एक साझा वैज्ञानिक संसाधन उपलब्ध करा सकती हैं।
यदि इस एटलस में अलग-अलग उम्र और बीमारियों से जुड़े पर्याप्त नमूने व्यवस्थित रूप से शामिल किए जाते हैं, तो इससे दिमाग के सामान्य विकास और बीमारी से जुड़े बदलावों के बीच अंतर समझने में मदद मिल सकती है। आगे चलकर ऐसे संसाधन मेडिकल शिक्षा, न्यूरोसाइंस अनुसंधान और नई जांच तकनीकों के विकास में उपयोगी साबित हो सकते हैं।
हालांकि, डिजिटल एटलस को मरीजों के लिए सीधे उपलब्ध उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। इसका प्रमुख महत्व शोधकर्ताओं को इंसानी दिमाग का अधिक विस्तृत अध्ययन करने के लिए बेहतर वैज्ञानिक आधार उपलब्ध कराना है।




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