नौकरी पाने के लिए अब केवल डिग्री होना काफी नहीं है। कंपनियां ऐसे युवाओं को प्राथमिकता देती हैं, जिन्हें कंप्यूटर, डिजिटल टूल्स और तकनीक के इस्तेमाल की जानकारी हो। युवाओं को इन जरूरतों के लिए तैयार करने के उद्देश्य से बिहार सरकार ने डिजिटल मित्र योजना का विस्तार करने की तैयारी की है। इसके तहत अगले पांच वर्षों में 12 लाख युवाओं को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है।
वित्त वर्ष 2026-27 में 2.67 लाख युवाओं को प्रशिक्षित करने की योजना है। यह पहल राज्य के कुशल युवा कार्यक्रम (KYP) से जुड़ी है और इसका उद्देश्य युवाओं को रोजगार के लिए जरूरी डिजिटल कौशल सिखाना है। प्रशिक्षण के जरिए युवा निजी कंपनियों में काम करने के साथ डिजिटल सेवाओं से जुड़े रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी तलाश सकेंगे।
सरकारी और निजी संस्थानों में मिलेगा प्रशिक्षण
डिजिटल मित्र योजना के तहत युवाओं को सरकारी और निजी, दोनों तरह के प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से कौशल सिखाने की योजना है। इसके लिए इंजीनियरिंग कॉलेज, पॉलिटेक्निक संस्थान, डिग्री कॉलेज, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) और मॉडल स्कूलों जैसे संस्थानों को शामिल किया जाएगा।
इसके अलावा, कुशल युवा कार्यक्रम के तहत चलने वाले 871 निजी प्रशिक्षण केंद्रों को भी योजना में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। पहले चरण में पात्र केंद्र संचालकों को एक-एक केंद्र आवंटित करने की योजना है। इन केंद्रों के संचालन और भुगतान के लिए निर्धारित नियम लागू होंगे।
यह व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्रशिक्षण केंद्रों का नेटवर्क बढ़ने से अधिक युवाओं तक कौशल विकास कार्यक्रम पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
डिजिटल मित्र योजना में क्या-क्या सिखाया जाएगा?
इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य युवाओं को कंप्यूटर और डिजिटल कामकाज में सक्षम बनाना है। उन्हें माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस के प्रमुख प्रोग्राम—वर्ड, एक्सेल और पावरपॉइंट—का इस्तेमाल सिखाया जाएगा। इसके साथ ही गूगल वर्कस्पेस जैसे डिजिटल साधनों की जानकारी भी दी जाएगी।
आज कई कंपनियों में दस्तावेज तैयार करने, आंकड़ों का रिकॉर्ड रखने, रिपोर्ट बनाने और ऑनलाइन सहयोग से काम करने के लिए इन टूल्स की जरूरत होती है। इसलिए इनकी जानकारी युवाओं के लिए उपयोगी हो सकती है।
प्रशिक्षण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े टूल्स, जैसे ChatGPT और Microsoft Copilot, का इस्तेमाल भी शामिल है। इनकी मदद से जानकारी जुटाने, लिखने, काम की योजना बनाने और कुछ डिजिटल कार्यों को आसान बनाने की समझ विकसित की जा सकती है। हालांकि, इन टूल्स से मिले जवाबों की जांच करना और उनका जिम्मेदारी से इस्तेमाल करना भी जरूरी है।
इसके अलावा, अंग्रेजी टाइपिंग और संवाद कौशल पर भी ध्यान दिया जाएगा। इन क्षमताओं से युवाओं को कार्यालयों और डिजिटल सेवाओं से जुड़े कामों में मदद मिल सकती है।
तीन महीने का प्रशिक्षण, कुल 270 घंटे की पढ़ाई
डिजिटल मित्र का प्रशिक्षण कुल 270 घंटे का निर्धारित किया गया है, जिसे अधिकतम तीन महीने में पूरा किया जा सकता है। बिहार कौशल विकास मिशन के डिजिटल मित्र पाठ्यक्रम में सैद्धांतिक पढ़ाई, व्यावहारिक प्रशिक्षण और काम से जुड़ा प्रशिक्षण शामिल है।
इसका उद्देश्य केवल कंप्यूटर की जानकारी देना नहीं, बल्कि युवाओं को डिजिटल कामकाज के लिए जरूरी बुनियादी कौशल से परिचित कराना भी है।
कौन कर सकता है आवेदन?
उपलब्ध पाठ्यक्रम के अनुसार, पात्रता के प्रमुख विकल्प इस प्रकार हैं:
- 12वीं पास उम्मीदवार: बुनियादी कंप्यूटर ज्ञान के साथ आवेदन की पात्रता हो सकती है।
- 10वीं पास उम्मीदवार: बुनियादी कंप्यूटर ज्ञान के साथ डिजिटल बिजनेस सेवाओं से जुड़े क्षेत्र में डेढ़ साल का प्रासंगिक अनुभव जरूरी है।
इसलिए केवल 10वीं पास होना हर उम्मीदवार के लिए पर्याप्त नहीं है। आवेदन करने से पहले संबंधित प्रशिक्षण केंद्र या बिहार कौशल विकास मिशन से लागू पात्रता की पुष्टि करनी चाहिए।
योजना से जुड़े निर्देशों में APAAR ID के आधार पर क्रेडिट स्कोर हासिल करने वाले युवाओं को प्राथमिकता देने की बात भी कही गई है। उम्मीदवारों को इस संबंध में जारी आधिकारिक दिशा-निर्देशों को ध्यान से देखना चाहिए।
प्रशिक्षण के बाद कहां मिल सकते हैं रोजगार के अवसर?
डिजिटल मित्र प्रशिक्षण पूरा करने के बाद युवा अपनी योग्यता और कौशल के अनुसार निजी कंपनियों, कार्यालयों और डिजिटल सेवाओं से जुड़े काम तलाश सकते हैं। कंप्यूटर ऑपरेटर, डिजिटल सहायक और डिजिटल मार्केटिंग सहायक जैसे पद संभावित विकल्प हो सकते हैं। पंचायत और प्रखंड स्तर पर डिजिटल सेवाओं से जुड़े काम भी अवसर उपलब्ध करा सकते हैं।
युवा अपने कौशल का इस्तेमाल छोटे व्यवसायों और स्वरोजगार में भी कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, डिजिटल दस्तावेज तैयार करना, डेटा संभालना, ऑनलाइन सेवाओं में मदद करना और छोटे कारोबारों के लिए डिजिटल काम करना कुछ संभावित रास्ते हैं।
बिहार सरकार के व्यापक कौशल विकास कार्यक्रम में ड्रोन तकनीक, नेटवर्किंग, आईटी, बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, ब्यूटी एंड वेलनेस, बेकरी और अन्य क्षेत्रों से जुड़े प्रशिक्षण भी शामिल हैं। इन क्षेत्रों में काम करने के लिए संबंधित पाठ्यक्रम और योग्यता की जरूरत अलग हो सकती है। उदाहरण के लिए, लैब टेक्नीशियन या होम नर्सिंग जैसे कामों के लिए केवल डिजिटल मित्र प्रशिक्षण पर्याप्त नहीं माना जाना चाहिए।
यह भी समझना जरूरी है कि प्रशिक्षण पूरा करने के बाद नौकरी अपने आप नहीं मिलेगी। उम्मीदवारों को अपनी योग्यता के अनुरूप पदों के लिए आवेदन करना होगा। कंप्यूटर और डिजिटल टूल्स की जानकारी के साथ व्यावहारिक अनुभव, संवाद कौशल और काम की गुणवत्ता भी रोजगार पाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
युवाओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह योजना?
डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल शिक्षा, बैंकिंग, कारोबार और सरकारी कामकाज सहित कई क्षेत्रों में बढ़ रहा है। ऐसे में बुनियादी डिजिटल कौशल युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने में मदद कर सकते हैं। बिहार में प्रशिक्षण केंद्रों का विस्तार इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
हालांकि, योजना की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि कितने युवा प्रशिक्षण पूरा करते हैं, उनके कौशल में कितना सुधार होता है और उनमें से कितनों को रोजगार या स्वरोजगार के अवसर मिलते हैं। युवाओं के लिए बेहतर होगा कि वे प्रशिक्षण के साथ व्यावहारिक अभ्यास करें और अपनी रुचि के क्षेत्र में आगे की विशेषज्ञता भी हासिल करें।




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