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आईआईटी बीएचयू ने विकसित की सस्ती और प्रभावी तकनीक, उद्योगों के दूषित जल को मिनटों में कर सकेगी साफ

आईआईटी बीएचयू ने विकसित की सस्ती और प्रभावी तकनीक, उद्योगों के दूषित जल को मिनटों में कर सकेगी साफ

आईआईटी बीएचयू ने विकसित की सस्ती और प्रभावी तकनीक, उद्योगों के दूषित जल को मिनटों में कर सकेगी साफ

वाराणसी स्थित आईआईटी बीएचयू के वैज्ञानिकों ने औद्योगिक अपशिष्ट जल की समस्या का एक किफायती और पर्यावरण-अनुकूल समाधान खोज लिया है। संस्थान के शोधकर्ताओं ने ऐसा उन्नत एडसोर्बेंट (शोषक पदार्थ) तैयार किया है, जो वस्त्र, प्रिंटिंग और फार्मा उद्योगों से निकलने वाले रासायनिक रंगों से भरे पानी को लगभग पूरी तरह साफ करने में सक्षम है।

85–99% तक हटेंगे खतरनाक रासायनिक डाई

इस नई तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पानी में मौजूद एजो डाई, कॉन्गो रेड और मिथाइल ऑरेंज जैसे खतरनाक रसायनों को 85 से 99 फीसदी तक हटाने की क्षमता रखती है। ये डाई उद्योगों में सबसे अधिक उपयोग की जाती हैं और वर्षों से पर्यावरण प्रदूषण का बड़ा कारण रही हैं।

शोध के अनुसार, नया एडसोर्बेंट प्रति ग्राम 869.5 मिलीग्राम तक रंग सोख सकता है, जबकि इसकी लागत मात्र 9 पैसे प्रति लीटर आती है—जो वर्तमान तकनीकों की तुलना में कहीं अधिक सस्ती है।

फिल्टर लगाने की झंझट खत्म, तकनीक करेगी तेज़ी से साफ

यह शोध स्कूल ऑफ मैटेरियल साइंस एंड टेक्नोलॉजी के प्रो. चंदन उपाध्याय, अमित बार और रसायन अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. राम शरण सिंह ने मिलकर किया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह तकनीक मौजूदा जटिल फिल्टर सिस्टम को बदल सकती है, क्योंकि इसमें कई प्रकार के महंगे फिल्टर लगाने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती।

रासायनिक स्पंज की तरह काम करता है नया पदार्थ

टीम ने लेयर्ड डबल हाईड्रॉक्साइड्स (LDH) आधारित एक उन्नत शोषक सामग्री विकसित की है, जो रासायनिक स्पंज की तरह पानी में मौजूद रंगों और प्रदूषकों को तेजी से सोख लेती है।

उनके अनुसार, वस्त्र उद्योग हर साल अरबों लीटर ऐसा अपशिष्ट जल छोड़ता है जिसमें एजो डाई की मात्रा बेहद अधिक होती है। यह रसायन न केवल पानी को साफ करना मुश्किल बनाते हैं बल्कि मानव स्वास्थ्य और जलीय जीवों के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करते हैं।

पहली तकनीकों की तुलना में सस्ती और इको-फ्रेंडली

प्रो. चंदन उपाध्याय के मुताबिक, यह तकनीक पहले से उपयोग में आने वाली विधियों की तुलना में काफी सस्ती और पर्यावरण के लिए सुरक्षित है। इसके निर्माण में साधारण धातु नाइट्रेट्स और नियंत्रित ताप तकनीक का उपयोग किया गया है।

सबसे खास बात यह है कि इसे तैयार करने या इस्तेमाल करने के लिए महंगे उपकरणों की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे इसे छोटे और मध्यम स्तर के उद्योग भी आसानी से अपना सकते हैं।

वाराणसी के कालीन उद्योग के लिए भी राहत

रासायनिक रंगों से भरे अपशिष्ट जल की समस्या सिर्फ वैश्विक वस्त्र उद्योग तक सीमित नहीं है। वाराणसी और आसपास के इलाके, खासकर स्थानीय कालीन उद्योग, लंबे समय से इस प्रदूषण से जूझ रहे हैं। यह तकनीक उनके लिए भी एक बड़ा और टिकाऊ समाधान बन सकती है।

आईआईटी बीएचयू के निदेशक प्रो. अमित पात्रा के अनुसार, “यह नवाचार औद्योगिक अपशिष्ट जल प्रबंधन में एक प्रभावी समाधान बन सकता है। इसी को आगे बढ़ाने के लिए शोध टीम को चैलेंज ग्रांट के तहत वित्तीय सहायता दी गई है।”

IIT BHU develops inexpensive and effective technology to clean industrial wastewater in minutes

एडइनबॉक्स टीम

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