
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) ने अपने बीटेक कार्यक्रम में बड़ा बदलाव करते हुए पहली बार छात्रों के लिए ऑनर्स डिग्री शुरू करने का निर्णय लिया है। संस्थान की सीनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। नई व्यवस्था का लाभ मौजूदा शैक्षणिक सत्र से प्रवेश लेने वाले छात्रों को मिलेगा। यह कदम तकनीकी शिक्षा में रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
रिसर्च आधारित ऑनर्स डिग्री की नई व्यवस्था
नई नीति के तहत केवल वही छात्र-छात्राएं B.Tech (Honours with Research) की डिग्री प्राप्त कर सकेंगे, जिन्होंने अपने अध्ययन के दौरान पेटेंट फाइल किया हो और पूरे कोर्स के दौरान किसी भी सेमेस्टर में बैक न आया हो। इस शर्त का उद्देश्य छात्रों को नवाचार के लिए प्रेरित करना और शोध की संस्कृति को मजबूत करना है।
बीटेक की नियमित पढ़ाई में जहां कुल 160 क्रेडिट होते हैं, वहीं ऑनर्स डिग्री के लिए अतिरिक्त 12 क्रेडिट अनिवार्य होंगे। ये अतिरिक्त क्रेडिट तीसरे सेमेस्टर से शुरू होकर सातवें सेमेस्टर तक पूरे करने होंगे।
दो नए विकल्प– ऑनर्स बास्केट और रिसर्च द्वारा ऑनर्स
डीन एकेडमिक प्रोफेसर पवन चक्रवर्ती के अनुसार संस्थान ने दो नए विकल्प पेश किए हैं—
ऑनर्स बास्केट
छात्र अपनी ब्रांच से जुड़े विशेष विषयों में 12 अतिरिक्त क्रेडिट पूरा करके ऑनर्स प्राप्त कर सकेंगे। संबंधित विभागों द्वारा कई बास्केट तैयार की गई हैं, जिनमें से छात्र अपनी रुचि के हिसाब से कोर्स चुन सकेंगे।
रिसर्च द्वारा ऑनर्स
इस विकल्प में छात्रों को रिसर्च कोर्स, प्रोजेक्ट, प्रकाशन या पेटेंट के आधार पर ऑनर्स डिग्री दी जाएगी। यह व्यवस्था विशेष रूप से उन छात्रों के लिए है जो तकनीकी अनुसंधान में करियर बनाने की इच्छा रखते हैं।
सख्त पात्रता: 8 CGPA और कोई बैक नहीं
ऑनर्स में प्रवेश पाने के लिए छात्रों को द्वितीय सेमेस्टर में न्यूनतम 8 CGPA बनाए रखना होगा और किसी भी विषय में बैक नहीं होना चाहिए। इससे सुनिश्चित होगा कि ऑनर्स कार्यक्रम में वही छात्र प्रवेश लें जो अकादमिक रूप से तैयार और गंभीर हैं।
यह व्यवस्था 2025 बैच से लागू की गई है, ताकि नए छात्र शुरुआत से ही अपने लक्ष्य निर्धारित कर सकें।
विशेष बास्केट के आधार पर मिलेगा विशेषज्ञता का अवसर
विभिन्न विभागों ने अपने-अपने क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग बास्केट तैयार किए हैं, जिनके आधार पर छात्रों को अलग-अलग ऑनर्स दिए जाएंगे। इस प्रणाली से छात्रों को अपनी ब्रांच के भीतर गहराई से अध्ययन करने का अवसर मिलेगा।
संस्थान का मानना है कि यह मॉडल शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, तकनीकी समझ को अधिक व्यापक बनाने और छात्रों को रिसर्च में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।




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