
नई दिल्ली में जारी एक अध्ययन के अनुसार, शहरों के भीतर माल ढुलाई के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म अब सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए बड़ा सहारा बनते जा रहे हैं। यह रिपोर्ट सेंटर फॉर डिजिटल इकोनॉमी पॉलिसी रिसर्च (C-DEP) द्वारा IIT दिल्ली के सहयोग से तैयार की गई और इंडिया हैबिटेट सेंटर में जारी हुई।
रिपोर्ट में बताया गया है कि देश की अर्थव्यवस्था में अहम हिस्सेदारी रखने वाले MSMEs को लंबे समय से इंट्रा-सिटी लॉजिस्टिक्स में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता रहा है—जैसे अधिक लागत, इंतजार के कारण समय की बर्बादी, और भरोसेमंद वाहन की कमी। डिजिटल और टेक्नोलॉजी-आधारित माल परिवहन सेवाओं ने इन समस्याओं को काफी हद तक कम किया है।
डिजिटल ट्रांसपोर्ट प्लेटफॉर्म से MSMEs को बड़ा फायदा
अध्ययन के निष्कर्ष दिखाते हैं कि इन सेवाओं के 71% उपयोगकर्ता बिजनेस से जुड़े MSMEs हैं। शहरों के भीतर होने वाली करीब 97% माल ढुलाई अब ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिये हो रही है। सर्वे में शामिल अधिकांश MSMEs ने माना कि टेक्नोलॉजी आधारित ट्रांसपोर्ट सिस्टम ने उनके कारोबार को आसान बनाया है। 73% MSMEs ने परिवहन लागत में कमी दर्ज की। 95% ने समय पर डिलीवरी में सुधार की पुष्टि की।
सही समय पर वाहन उपलब्ध, ऑर्डर क्षमता बढ़ी
IIT दिल्ली के मैनेजमेंट स्टडीज़ विभाग के प्रोफेसर पी. विग्नेश्वर इलावरसन ने बताया कि डिजिटल ट्रांसपोर्ट प्लेटफॉर्म का सबसे बड़ा फायदा यह है कि MSMEs को “सही समय पर सही वाहन” उपलब्ध हो जाते हैं।
इसके चलते कारोबारियों को अतिरिक्त निवेश नहीं करना पड़ता, और उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर अधिक ऑर्डर पूरे करने की क्षमता बढ़ जाती है।
अध्ययन यह स्पष्ट करता है कि टेक्नोलॉजी-आधारित गुड्स ट्रांसपोर्टेशन सेवाएं न केवल MSMEs की लागत घटा रही हैं बल्कि उनकी दक्षता, समय प्रबंधन और डिलीवरी नेटवर्क में भी महत्वपूर्ण सुधार ला रही हैं।
भारत के बढ़ते डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ यह ट्रेंड आने वाले वर्षों में और मजबूत हो सकता है।




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