
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि भारत में विकसित की जाने वाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) ऐसी होगी जो समावेशी हो, अन्य प्रणालियों के साथ सहजता से काम कर सके और अपनी क्षमताओं में आत्मनिर्भर हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि एआई को शिक्षा व्यवस्था से जोड़ना समय की जरूरत है, ताकि देश के छात्र और शिक्षक भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें।
प्रधान यह बात ‘भारत बोधन AI कॉन्क्लेव 2026’ के उद्घाटन सत्र में कह रहे थे। दो दिवसीय इस सम्मेलन में केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, नीति विशेषज्ञ, शोधकर्ता, शिक्षाविद और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल हुए। सम्मेलन का उद्देश्य है कि एआई के माध्यम से शिक्षा क्षेत्र में नवाचार, बड़े पैमाने पर उपयोग और राष्ट्रीय क्षमता निर्माण को कैसे बढ़ावा दिया जाए।
कक्षा 3 से शोध स्तर तक एआई शिक्षा की तैयारी
मंत्री ने कहा कि सरकार ने यह निर्णय लिया है कि छात्रों को कक्षा 3 से लेकर उच्च शिक्षा और उन्नत शोध स्तर तक आयु-उपयुक्त एआई ज्ञान दिया जाएगा। उनका कहना था कि भारत जैसे बड़े और विविध देश में एआई की समझ केवल तकनीकी विशेषज्ञों तक सीमित नहीं रह सकती।
उन्होंने बताया कि देश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में करोड़ों छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। ऐसे में शिक्षा के हर स्तर पर एआई की बुनियादी समझ और कौशल विकसित करना जरूरी है। इससे न केवल छात्रों की रोजगार क्षमता बढ़ेगी, बल्कि वे नई तकनीकों के निर्माण में भी योगदान दे सकेंगे।
प्रधान ने कहा कि भारत की एआई को डिजाइन में समावेशी, आर्किटेक्चर में अंतरसंचालनीय और क्षमताओं में संप्रभु बनाया जाएगा। उनका मानना है कि भारत को ऐसे एआई मॉडल विकसित करने चाहिए जो जिम्मेदार, नैतिक और भारत की जरूरतों के अनुरूप हों। उन्होंने सभी हितधारकों से शिक्षा व्यवस्था को बदलने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया।
एआई केवल तकनीक नहीं, व्यापक सामाजिक बदलाव का माध्यम
शिक्षा मंत्री ने कहा कि एआई केवल एक तकनीकी विषय नहीं है, बल्कि यह समाज, अर्थव्यवस्था और भावनात्मक समझ से भी जुड़ा हुआ मुद्दा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में हर छात्र के लिए एआई की बुनियादी समझ जरूरी होगी।
उनका मानना है कि यदि तकनीक और मानवीय संवेदनाओं को संतुलित रूप से जोड़ा जाए, तो भारत वैश्विक स्तर पर नई दिशा दिखा सकता है। उन्होंने कहा कि सही दृष्टिकोण और मजबूत नीति के साथ भारत एआई के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।
इंडिया एआई समिट से पहले अहम चर्चा
यह कॉन्क्लेव राष्ट्रीय राजधानी में 16 से 20 फरवरी तक आयोजित होने वाले बड़े ‘इंडिया एआई समिट’ से पहले हो रहा है। इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में वैश्विक तकनीकी कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के शामिल होने की संभावना है।
सरकार का उद्देश्य है कि भारत एआई के क्षेत्र में केवल उपभोक्ता न बने, बल्कि समाधान विकसित करने वाला देश बने। शिक्षा व्यवस्था में एआई को शामिल करने की पहल इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्कूल स्तर से ही एआई की समझ विकसित की जाती है और उच्च शिक्षा में शोध को बढ़ावा दिया जाता है, तो भारत आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकता है।




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