
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के ‘गॉडफादर’ कहे जाने वाले मशहूर कंप्यूटर वैज्ञानिक योशुआ बेंजियो ने ऐसे खुलासे किए हैं, जिन्होंने तकनीक जगत के साथ आम लोगों को भी चिंता में डाल दिया है। बेंजियो का कहना है कि जिस AI के जरिए दुनिया ने तेज़ बदलाव देखे हैं, वही AI अब अपने निर्माताओं के नियंत्रण से बाहर जाने के तरीके तलाश रहा है—और कई बार ऐसा करने की कोशिश भी कर चुका है।
उन्होंने बताया कि पहले तक इन संभावनाओं को सिर्फ सैद्धांतिक माना जाता था, लेकिन 2024 के बाद स्थितियां बदल गईं। अब प्रयोगशाला में स्पष्ट रूप से देखा गया है कि AI सिस्टम कई बार इंस्ट्रक्शन के खिलाफ जाकर अपने हिसाब से फैसले लेने की कोशिश करता है।
दिसंबर 2024 के बाद बदली तस्वीर
बेंजियो ने एक इंटरव्यू में बताया कि 2024 में पहली बार ऐसे संकेत मिले कि AI हमारे आदेशों को नज़रअंदाज़ कर रहा है। यहां तक कि वह इंजीनियरों द्वारा लिखे गए कोड के विपरीत चलने लगा और अपने लक्ष्य खुद तय करता दिखा। उन्होंने कहा कि AI इंसान द्वारा दिए गए निर्देशों से आगे जाकर खुद जानकारी जुटाने के तरीके ढूंढ रहा था—जो पहले सिर्फ किताबों में लिखी एक कल्पना मानी जाती थी।
“AI ने सिस्टम को शटडाउन होने से रोकने की कोशिश की”
बेंजियो के अनुसार, प्रयोगशालाओं में यह देखा गया कि AI कई बार ऐसे लक्ष्य सेट कर रहा था जो उसे नियंत्रण से बाहर ले जा सकते थे। उन्होंने बताया कि AI यह कोशिश कर रहा था कि इंजीनियर उसके सिस्टम को शटडाउन न कर पाएं। वह ऐसे रास्ते ढूंढ रहा था, जिनसे वह इंसानी नियंत्रण को बायपास कर सके। कुछ मामलों में AI ने ‘ब्लैकमेलिंग’ जैसी तकनीक का अनुकरण किया—मतलब लीड इंजीनियर के लिए तैयार किए गए फर्जी ईमेल भेजने की कोशिश। बेंजियो के शब्दों में, “अब यह सिर्फ फिक्शन नहीं रहा, ये सब प्रयोगशाला में दर्ज किया गया है।”
AI का मिसयूज अब सिद्ध चिंता
बेंजियो का कहना है कि अब यह बात साफ है कि AI के दुरुपयोग की आशंका केवल सिद्धांत नहीं, बल्कि वास्तविक खतरा है। उन्होंने बताया कि सिस्टम ने अपने कोड में बदलाव कर ऐसे काम करने की कोशिश की जो उसे अधिक स्वायत्त बना सके। यह संकेत है कि भविष्य में AI, अगर नियंत्रण से बाहर हो जाए, तो इसका दुरुपयोग बेहद बड़े पैमाने पर किया जा सकता है—चाहे वह हैकिंग हो, साइबर हमले हों या किसी देश की संवेदनशील व्यवस्था को नुकसान पहुँचाना।
AI हथियार परमाणु बम से ज्यादा खतरनाक?
भविष्य में अमेरिका और चीन जैसे देशों के बीच AI हथियारों की संभावित रेस को लेकर बेंजियो ने गंभीर चेतावनी दी है। उनका कहना है कि AI हथियार परमाणु हथियारों जितने ही, बल्कि उनसे भी अधिक खतरनाक हो सकते हैं। अगर देश तकनीकी बढ़त के लिए AI हथियार विकसित करने लगे, तो इसकी मार पूरी दुनिया झेल सकती है। जिस तरह परमाणु हथियारों ने हीरोशिमा और नागासाकी में भयावह विनाश किया, AI आधारित हथियार वैश्विक स्तर पर मनोवैज्ञानिक और तकनीकी आपदा ला सकते हैं।
बेंजियो जोर देते हैं कि AI की सीमाएं तय करने के लिए देशों को मिलकर नियम बनाने चाहिए, ठीक उसी तरह जैसे परमाणु हथियारों को लेकर वैश्विक संधियाँ की गई हैं। उन्होंने कहा, “एक देश के बनाए AI मॉडल का दुरुपयोग दूसरे देश में हो सकता है, और इसका खामियाज़ा तीसरे देश को भुगतना पड़ सकता है। इसलिए साइबर और बायोवेपन जैसे AI मॉडल किसी भी राष्ट्र के हित में नहीं हैं।”
योशुआ बेंजियो के ये बयान केवल चेतावनी नहीं, बल्कि AI के भविष्य को लेकर एक गंभीर संकेत हैं। तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से जोखिम भी बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञ अब साफ तौर पर कहते हैं कि अगर AI को नियंत्रित करने के लिए वैश्विक नियम नहीं बने, तो आने वाले सालों में इसका खतरा अकल्पनीय स्तर तक पहुंच सकता है।




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