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IIT में क्रॉस-कैंपस एक्सचेंज प्रोग्राम, अब छात्र दूसरे IIT में भी पढ़ सकेंगे एक सेमेस्टर

IIT में क्रॉस-कैंपस एक्सचेंज प्रोग्राम, अब छात्र दूसरे IIT में भी पढ़ सकेंगे एक सेमेस्टर

IIT में क्रॉस-कैंपस एक्सचेंज प्रोग्राम, अब छात्र दूसरे IIT में भी पढ़ सकेंगे एक सेमेस्टर

देश के प्रमुख इंजीनियरिंग संस्थान Indian Institutes of Technology (IITs) इस शैक्षणिक सत्र से आपस में और अधिक जुड़ने जा रहे हैं। एक संरचित क्रॉस-कैंपस अकादमिक एक्सचेंज प्रोग्राम शुरू किया जा रहा है, जिसके तहत छात्र किसी अन्य IIT कैंपस में चुनिंदा कोर्स में दाखिला लेकर एक पूरा सेमेस्टर वहां पढ़ सकेंगे।

इस पहल के तहत छात्रों द्वारा अर्जित क्रेडिट उनके मूल संस्थान में ट्रांसफर किए जा सकेंगे। यह कदम लंबे समय से चली आ रही उस सख्त व्यवस्था में बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जो Joint Entrance Examination (JEE) के आधार पर IIT में प्रवेश के साथ जुड़ी रही है। पहले बड़े स्तर पर कैंपस ट्रांसफर की अनुमति नहीं थी, क्योंकि इससे रैंक आधारित सीट आवंटन की व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका रहती थी।

अब तक सीटों का आवंटन केवल JEE रैंक और छात्रों की पसंद के आधार पर होता था। ऐसे में कैंपस के भीतर स्वतंत्र आवाजाही को उस ढांचे के खिलाफ माना जाता था।

पूर्व में Indian Institute of Technology Delhi के निदेशक रह चुके और वर्तमान में BITS पिलानी समूह के वाइस चांसलर वी रामगोपाल राव ने इसे रणनीतिक बदलाव बताया है। उनके अनुसार दशकों से प्रवेश रैंक ही छात्र के पूरे अकादमिक सफर को तय करती थी। अब संरचित गतिशीलता लाने से लचीलापन और अकादमिक विकल्प बढ़ेंगे।

उन्होंने कहा कि यह कदम भारतीय उच्च शिक्षा में चल रहे सुधारों की दिशा के अनुरूप है, जहां क्रेडिट पोर्टेबिलिटी और बहु-विषयक exposure पर जोर दिया जा रहा है। प्रमुख तकनीकी संस्थानों के बीच यह एक बड़ा सुधार है, जो अन्य संस्थानों के लिए भी मॉडल बन सकता है।

कैसे काम करेगा नया सिस्टम

छात्रों की आवाजाही को संभव बनाने के लिए IIT कैंपसों के बीच पाठ्यक्रम का विस्तृत मिलान किया जा रहा है। जब कोर्स संरचना एक जैसी या समकक्ष मानी जाएगी, तब छात्र दूसरे IIT में स्वीकृत विषय पढ़ सकेंगे और उनके क्रेडिट को औपचारिक रूप से मान्यता मिलेगी।

हाल ही में सभी IIT के अकादमिक डीन की बैठक में इस प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा हुई, जिसमें क्रेडिट ट्रांसफर और छात्र गतिशीलता को प्राथमिकता दी गई।

Indian Institute of Technology Madras के निदेशक वी कामकोटी ने बताया कि अलग-अलग IIT के कार्यक्रमों के पाठ्यक्रम का मिलान किया जा रहा है। एक बार यह प्रक्रिया पूरी हो जाने पर IIT मद्रास का छात्र किसी अन्य IIT में एक टर्म बिता सकेगा, वहीं IIT कानपुर, दिल्ली या इंदौर का छात्र मद्रास कैंपस में आकर कोर्स कर सकेगा और अपने मूल संस्थान में क्रेडिट ट्रांसफर कर पाएगा।

राव के अनुसार IIT अपने-अपने स्तर पर मजबूत संस्थान हैं, लेकिन एक साथ मिलकर वे और बड़ा शैक्षणिक नेटवर्क बनाते हैं। एक सेमेस्टर दूसरे IIT में बिताने से छात्रों को विशेष कोर्स, उन्नत रिसर्च लैब और विशेषज्ञ फैकल्टी तक पहुंच मिलेगी, जो उनके मूल कैंपस में उपलब्ध न हो।

बदलती शैक्षणिक जरूरतों के अनुरूप पहल

यह पहल बदलती शैक्षणिक और पेशेवर जरूरतों को भी दर्शाती है। आज छात्र इंटर्नशिप, रिसर्च प्रोजेक्ट और इंडस्ट्री ट्रेनिंग के लिए अलग-अलग शहरों में जाते हैं। नए ढांचे के तहत यदि कोई छात्र किसी अन्य शहर में इंटर्नशिप कर रहा है, तो वह पास के IIT कैंपस में कोर्स लेकर अपनी पढ़ाई भी जारी रख सकेगा।

इस मॉडल की तुलना अंतरराष्ट्रीय सेमेस्टर एक्सचेंज प्रोग्राम से की जा रही है, जहां छात्र विदेश में पढ़ाई करते हुए क्रेडिट ट्रांसफर कर पाते हैं।

राव का कहना है कि विश्व के अधिकतर प्रमुख विश्वविद्यालय अकादमिक भरोसे और स्पष्ट क्रेडिट समकक्षता पर काम करते हैं। छात्रों को स्थान बदलने की सुविधा होती है, लेकिन गुणवत्ता से समझौता नहीं होता।

हालांकि इस व्यवस्था को शुरुआत में सीमित और निगरानी के तहत लागू किया जाएगा। हर IIT अपने बुनियादी ढांचे, फैकल्टी की संख्या और हॉस्टल क्षमता के अनुसार यह तय करेगा कि वह कितने विजिटिंग छात्रों को समायोजित कर सकता है।

क्या होंगे फायदे?

शिक्षाविदों का मानना है कि यह पहल IIT प्रणाली को अधिक गतिशील और सहयोगात्मक बनाएगी। इससे कैंपसों के बीच सहयोग बढ़ेगा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर IIT की छवि मजबूत होगी।

विदेशी विश्वविद्यालय और शोध साझेदार ऐसे सिस्टम को सकारात्मक रूप से देखते हैं, जहां छात्र और फैकल्टी अलग-अलग कैंपस में मिलकर काम कर सकें। इससे संयुक्त शोध परियोजनाएं और मल्टी-कैंपस सुपरविजन आसान होगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस सुधार की सफलता इसके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी। यदि शैक्षणिक कैलेंडर, क्रेडिट मैपिंग और डिजिटल सिस्टम को समन्वित तरीके से लागू किया गया, तो यह केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि एक अधिक खुले और एकीकृत अकादमिक ढांचे की ओर बड़ा कदम साबित होगा।

Asmita Sarkar

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