
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) कुरुक्षेत्र के निदेशक प्रोफेसर बी. वी. रमना रेड्डी के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का आदेश जारी किया है। मंत्रालय का यह निर्णय अगले आदेशों तक प्रभावी रहेगा। निर्देश में साफ कहा गया है कि निदेशक को एनआईटी अधिनियम 2007 के तहत मिले सभी अधिकार फिलहाल लागू नहीं होंगे।
मंत्रालय ने एनआईटी कुरुक्षेत्र के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की चेयरपर्सन और रजिस्ट्रार को भी निर्देशित किया है कि आदेश का पूर्ण रूप से पालन सुनिश्चित किया जाए। यह कदम ऐसे समय में आया है जब संस्थान में कर्मचारियों से जुड़े कई मुद्दों पर लगातार शिकायतें सामने आ रही थीं और उनका समाधान नहीं हो पा रहा था। बताया जाता है कि इन मामलों को लेकर बोर्ड की चेयरपर्सन को बार-बार पत्र लिखे गए, लेकिन विवाद बरकरार रहा।
कुछ दिन पहले ही संस्थान के कुलसचिव को बदला गया था, जबकि निदेशक और बोर्ड चेयरपर्सन के बीच तालमेल की कमी की चर्चा भी लंबे समय से चल रही थी। इसके अलावा, कई नियुक्तियों पर भी सवाल उठाए जा रहे थे, जिससे प्रशासनिक माहौल और अधिक अस्थिर हो गया था।
एक और बड़ी बात यह है कि एनआईटी और आईआईटी जैसे प्रमुख तकनीकी संस्थानों में आमतौर पर निदेशक उन्हीं संस्थानों की पृष्ठभूमि से आते हैं। लेकिन प्रोफेसर रमना रेड्डी की नियुक्ति दिल्ली स्थित गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय से हुई थी, जिसे कई लोग परंपरागत प्रक्रिया से इतर बताते रहे हैं।
उधर, एनआईटी के लोक संपर्क अधिकारी डॉ. ज्ञान भूषण ने कहा कि आधिकारिक पत्र अभी तक संस्थान तक नहीं पहुंचा है। उन्होंने कहा कि दस्तावेज मिलने के बाद ही कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दी जा सकेगी।
शिक्षा मंत्रालय की ओर से लिया गया यह निर्णय संस्थान के प्रशासनिक ढांचे और भविष्य की कार्यशैली पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नया आदेश आने तक संस्थान का प्रबंधन कैसे आगे बढ़ता है।




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