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The Next Step After JEE Main: How to Secure Admission to IITs and NITs Through JoSAA Counseling

JEE Main के बाद अगला कदम: JoSAA काउंसलिंग से ऐसे मिलेगा IIT-NIT में एडमिशन

The Next Step After JEE Main: How to Secure Admission to IITs and NITs Through JoSAA Counseling

National Testing Agency (NTA) द्वारा JEE Main 2026 का रिजल्ट जारी होने के बाद अब सफल उम्मीदवारों की नजरें अगले अहम चरण पर टिकी हैं—JEE Advanced और Joint Seat Allocation Authority (JoSAA) काउंसलिंग। JEE Advanced के लिए रजिस्ट्रेशन 23 अप्रैल से शुरू होने की संभावना है, जबकि JoSAA काउंसलिंग जून के पहले सप्ताह में शुरू हो सकती है।

हर साल की तरह इस बार भी देश के टॉप इंजीनियरिंग संस्थानों में दाखिला JoSAA काउंसलिंग के जरिए ही होगा। यही वह प्रक्रिया है, जिसके बिना Indian Institutes of Technology, National Institutes of Technology और अन्य प्रमुख संस्थानों में प्रवेश संभव नहीं है।

क्या है JoSAA काउंसलिंग और क्यों है जरूरी?

JoSAA काउंसलिंग एक केंद्रीकृत प्रक्रिया है, जिसके जरिए देश के प्रमुख इंजीनियरिंग संस्थानों में सीटों का आवंटन किया जाता है। इसमें JEE Main और JEE Advanced के स्कोर के आधार पर छात्रों को उनकी रैंक, पसंद और सीटों की उपलब्धता के अनुसार कॉलेज और ब्रांच दी जाती है।

इस प्रक्रिया के तहत 100 से अधिक संस्थानों में एडमिशन होता है। इनमें 23 IIT, 31 NIT, 1 IIEST, 26 IIIT और 40 GFTI (सरकारी वित्त पोषित तकनीकी संस्थान) शामिल हैं। पिछले वर्षों के रुझान देखें तो काउंसलिंग जून के शुरुआती दिनों में शुरू होती है और JEE Advanced का रिजल्ट आने के बाद पूरा शेड्यूल आधिकारिक वेबसाइट josaa.nic.in पर जारी किया जाता है।

कौन कर सकता है भागीदारी?

IIT में दाखिले के लिए उम्मीदवारों को JEE Advanced 2026 में क्वालिफाई करना जरूरी है और वैलिड रैंक होना चाहिए। वहीं NIT, IIEST, IIIT और GFTI जैसे संस्थानों के लिए JEE Main 2026 की रैंक मान्य होगी।

इसके अलावा उम्मीदवार का 12वीं (या समकक्ष) परीक्षा में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स विषय होना जरूरी है। सामान्य वर्ग के लिए कम से कम 75 प्रतिशत अंक और आरक्षित वर्ग (SC/ST/PwD) के लिए 65 प्रतिशत अंक अनिवार्य हैं।

कैसे होती है पूरी प्रक्रिया?

JoSAA काउंसलिंग की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है, लेकिन इसका मूल ढांचा सरल है। सबसे पहले उम्मीदवारों को वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन करना होता है, जहां JEE Main की डिटेल्स के जरिए लॉगिन किया जाता है। इसके बाद पसंदीदा कॉलेज और ब्रांच का चयन किया जाता है।

सीट आवंटन पांच राउंड में किया जाता है, जहां उम्मीदवार की रैंक, विकल्प और सीटों की उपलब्धता को ध्यान में रखा जाता है। सीट मिलने के बाद उम्मीदवार को उसे सुरक्षित करने के लिए फीस जमा करनी होती है।

इस दौरान छात्रों को तीन विकल्प मिलते हैं—फ्रीज, फ्लोट और स्लाइड। फ्रीज का मतलब है कि आप मिली हुई सीट से संतुष्ट हैं और आगे के राउंड में भाग नहीं लेंगे। फ्लोट का विकल्प लेने पर आप सीट स्वीकार करते हुए बेहतर विकल्प के लिए अगले राउंड में बने रह सकते हैं। वहीं स्लाइड विकल्प उसी संस्थान में बेहतर ब्रांच पाने का मौका देता है।

सीट कन्फर्म होने के बाद डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी करनी होती है, जिसके लिए तय केंद्र पर रिपोर्ट करना पड़ता है। अगर JoSAA के सभी राउंड के बाद भी सीटें खाली रह जाती हैं, तो Central Seat Allocation Board द्वारा स्पेशल राउंड आयोजित किए जाते हैं।

छात्रों के लिए क्या है जरूरी सलाह?

विशेषज्ञों का कहना है कि काउंसलिंग के दौरान जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए। सही विकल्प भरना, पिछले वर्षों के कटऑफ को समझना और अपनी रैंक के अनुसार यथार्थवादी प्राथमिकताएं तय करना बेहद जरूरी है।

JoSAA काउंसलिंग सिर्फ एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि आपके करियर की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण चरण है। ऐसे में पूरी जानकारी के साथ समझदारी से लिया गया फैसला ही आपको बेहतर संस्थान और सही ब्रांच तक पहुंचा सकता है।

 

 

 

 

Asmita Sarkar

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