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JEE Advanced में बड़े बदलाव की तैयारी? IITs में जुलाई से होगा नए परीक्षा पैटर्न का ट्रायल

JEE Advanced में बड़े बदलाव की तैयारी? IITs में जुलाई से होगा नए परीक्षा पैटर्न का ट्रायल

JEE Advanced में बड़े बदलाव की तैयारी? IITs में जुलाई से होगा नए परीक्षा पैटर्न का ट्रायल

देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेश का रास्ता माने जाने वाले ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जाम (JEE) Advanced के स्वरूप में आने वाले वर्षों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) के लिए आयोजित होने वाली इस परीक्षा में पारंपरिक फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स (PCM) आधारित प्रश्नों की जगह एप्टीट्यूड आधारित मूल्यांकन को शामिल करने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

इस दिशा में पहला कदम उठाते हुए जुलाई 2026 में देश के सभी 23 IITs में नए परीक्षा मॉडल का ट्रायल आयोजित करने की योजना बनाई गई है। इस ट्रायल में हाल ही में दाखिला लेने वाले बीटेक प्रथम वर्ष के छात्र भाग लेंगे। ट्रायल के नतीजों और विश्लेषण को बाद में IIT काउंसिल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, जिसके आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। यदि परीक्षण सफल रहता है, तो JEE Advanced 2027 में नए पैटर्न को लागू करने पर विचार किया जा सकता है।

वर्तमान में कैसा है JEE Advanced का पैटर्न?

फिलहाल JEE Advanced में शामिल होने का अवसर केवल JEE Main के शीर्ष 2.5 लाख उम्मीदवारों को मिलता है। परीक्षा दो पेपरों में आयोजित की जाती है, जिनमें फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं। दोनों पेपर मिलाकर कुल 360 अंकों का मूल्यांकन होता है और इन्हीं अंकों के आधार पर IITs में प्रवेश दिया जाता है।

वर्षों से यह परीक्षा विषय आधारित ज्ञान, गणनात्मक क्षमता और अवधारणात्मक समझ को परखने के लिए जानी जाती रही है। हालांकि अब विशेषज्ञों के एक वर्ग का मानना है कि केवल विषयगत ज्ञान के बजाय छात्रों की तार्किक सोच, समस्या समाधान क्षमता और विश्लेषणात्मक कौशल को भी प्रमुखता दी जानी चाहिए।

नए पैटर्न में क्या हो सकता है बदलाव?

प्रस्तावित मॉडल के अनुसार JEE Advanced में PCM आधारित प्रश्नों की जगह एप्टीट्यूड आधारित सवाल पूछे जा सकते हैं। इन प्रश्नों का उद्देश्य उम्मीदवारों की तार्किक क्षमता, गणितीय सोच, विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण और जटिल समस्याओं को हल करने की योग्यता का आकलन करना होगा।

जुलाई में होने वाले ट्रायल के दौरान IIT के प्रथम वर्ष के छात्रों को ऐसे प्रश्न दिए जाएंगे और यह देखा जाएगा कि वे इनका किस स्तर तक समाधान कर पाते हैं। ट्रायल से यह भी समझने की कोशिश की जाएगी कि क्या एप्टीट्यूड आधारित मॉडल इंजीनियरिंग शिक्षा के लिए उपयुक्त छात्रों की पहचान करने में अधिक प्रभावी साबित हो सकता है।

बदलाव के लिए बनी है विशेषज्ञ समिति

JEE Advanced के संभावित नए स्वरूप पर काम करने के लिए IIT कानपुर के प्रोफेसर मानिंद अग्रवाल की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति गठित की गई है। समिति पिछले कुछ समय से परीक्षा प्रणाली में सुधार के विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रही है।

सूत्रों के अनुसार, समिति पहले भी JEE Advanced में एप्टीट्यूड आधारित प्रश्नों को शामिल करने की सिफारिश कर चुकी है। शुरुआती प्रस्ताव में PCM के साथ एप्टीट्यूड सेक्शन जोड़ने की बात थी, जबकि अब केवल एप्टीट्यूड आधारित मॉडल के परीक्षण की तैयारी की जा रही है।

साल में दो बार परीक्षा कराने पर भी विचार

परीक्षा पैटर्न में बदलाव के अलावा समिति JEE Main की तरह JEE Advanced को भी वर्ष में दो बार आयोजित करने की संभावना पर काम कर रही है। वर्तमान में यह परीक्षा साल में केवल एक बार आयोजित होती है। यदि भविष्य में यह प्रस्ताव लागू होता है, तो छात्रों को बेहतर स्कोर हासिल करने के लिए एक से अधिक अवसर मिल सकते हैं।

छात्रों पर क्या होगा असर?

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि JEE Advanced में एप्टीट्यूड आधारित मॉडल लागू होता है, तो इससे कोचिंग आधारित तैयारी के स्वरूप में भी बदलाव आ सकता है। परीक्षा का फोकस रटने या केवल विषय आधारित प्रश्न हल करने के बजाय विश्लेषणात्मक सोच और वास्तविक समस्या समाधान क्षमता पर अधिक केंद्रित हो सकता है।

हालांकि अभी यह प्रक्रिया शुरुआती चरण में है और कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। जुलाई में होने वाले ट्रायल और उसकी रिपोर्ट के बाद ही IIT काउंसिल भविष्य की दिशा तय करेगी। ऐसे में फिलहाल JEE Advanced की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए मौजूदा परीक्षा पैटर्न ही लागू रहेगा।

यदि प्रस्तावित बदलावों को मंजूरी मिलती है, तो यह IIT प्रवेश परीक्षा के इतिहास में सबसे बड़े सुधारों में से एक माना जाएगा और देश की इंजीनियरिंग प्रवेश प्रणाली को नई दिशा दे सकता है।

Asmita Sarkar

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