
कानून की पढ़ाई कर रहे अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए बड़ी खबर है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि उसने नए नियम बना लिए हैं, जिनके तहत एलएलबी के अंतिम सेमेस्टर के छात्र अब अखिल भारतीय बार परीक्षा (AIBE) में बैठ सकेंगे। इसके साथ ही AIBE अब साल में एक बार नहीं, बल्कि दो बार आयोजित की जाएगी।
AIBE पास करना वकालत शुरू करने के लिए अनिवार्य परीक्षा है। इसे उत्तीर्ण करने के बाद ही कोई कानून स्नातक राज्य बार काउंसिल में वकील के रूप में पंजीकरण करा सकता है। ऐसे में नए नियमों को छात्रों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट में BCI की जानकारी, याचिका का निपटारा
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें अंतिम सेमेस्टर के छात्रों को AIBE में बैठने की अनुमति देने की मांग की गई थी। बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से अदालत को बताया गया कि इस संबंध में 2026 के नए नियम बना लिए गए हैं। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस तथ्य को रिकॉर्ड पर लेते हुए याचिका का निपटारा कर दिया।
BCI के वकील ने अदालत में कहा कि अब AIBE वर्ष में दो बार कराई जाएगी और एलएलबी के अंतिम सेमेस्टर के छात्र अपनी अंतिम परीक्षा पास करने के बाद इस परीक्षा में शामिल हो सकेंगे।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद बने नए नियम
दरअसल, इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट पहले भी बार काउंसिल ऑफ इंडिया को दिशा-निर्देश दे चुका है। वर्ष 2023 में शीर्ष अदालत ने BCI को अंतिम वर्ष के छात्रों को लेकर नियम बनाने का निर्देश दिया था। इसके बाद 2024 में अदालत ने अंतरिम आदेश देते हुए उस साल के अंतिम वर्ष के छात्रों को AIBE में बैठने की अनुमति दी थी।
20 सितंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि अंतिम वर्ष के एलएलबी छात्रों को अनिश्चित स्थिति में नहीं छोड़ा जा सकता। अदालत ने माना था कि यदि उन्हें उस वर्ष AIBE देने से रोका गया, तो उनका एक पूरा साल बर्बाद हो जाएगा। इसी आधार पर छात्रों को बड़ी राहत दी गई थी।
AIBE पर सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट रुख
10 फरवरी 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने AIBE आयोजित करने के बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अधिकार को सही ठहराया था। साथ ही अदालत ने यह भी माना था कि उचित पात्रता प्रमाण प्रस्तुत करने पर अंतिम सेमेस्टर के कानून छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जा सकती है। इस संबंध में एमिकस क्यूरी के सुझाव को भी अदालत ने स्वीकार किया था।
दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र नीलाय राय समेत नौ एलएलबी छात्रों की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 24 नवंबर 2024 को उन्हें AIBE में शामिल होने की अनुमति दी थी। छात्रों की ओर से अधिवक्ता ए वेलन और नवप्रीत कौर ने पक्ष रखा था।
करियर पर असर को लेकर छात्रों की चिंता
याचिका में बार काउंसिल ऑफ इंडिया की उस अधिसूचना को चुनौती दी गई थी, जिसमें अंतिम वर्ष के एलएलबी छात्रों को AIBE से बाहर रखा गया था। छात्रों का कहना था कि यदि उन्हें परीक्षा देने से रोका जाता है, तो इससे उनका पेशेवर करियर शुरू होने में अनावश्यक देरी होगी और कीमती समय बर्बाद होगा।
क्या बदलेगा नए नियमों से
नए नियमों के लागू होने से कानून के छात्रों को अब एक साल इंतजार नहीं करना पड़ेगा। पढ़ाई पूरी होते ही वे AIBE में बैठ सकेंगे और जल्द वकालत की प्रक्रिया शुरू कर पाएंगे। साल में दो बार परीक्षा होने से भी छात्रों को ज्यादा मौके मिलेंगे।
कानूनी शिक्षा से जुड़े जानकार मानते हैं कि यह बदलाव छात्रों के हित में है और इससे वकालत में प्रवेश की प्रक्रिया अधिक व्यावहारिक और समयबद्ध होगी।




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