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NCERT की नई कक्षा 9 की किताब में न्यायपालिका पर खास जोर, छात्रों को पढ़ाया जाएगा संविधान

NCERT की नई कक्षा 9 की किताब में न्यायपालिका पर खास जोर, छात्रों को पढ़ाया जाएगा संविधान

NCERT की नई कक्षा 9 की किताब में न्यायपालिका पर खास जोर, छात्रों को पढ़ाया जाएगा संविधान

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) द्वारा जारी नई कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में भारतीय न्यायपालिका को एक निष्पक्ष और स्वतंत्र संस्था के रूप में प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक में बताया गया है कि न्यायपालिका नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करती है, संविधान की सर्वोच्चता बनाए रखती है और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

यह विषय ‘Understanding Society: India and Beyond’ नामक नई पाठ्यपुस्तक में शामिल किया गया है। इसमें ‘शक्तियों के पृथक्करण’ (Separation of Powers) के सिद्धांत के तहत न्यायपालिका की भूमिका को विस्तार से समझाया गया है।

लोकतंत्र में न्यायपालिका की भूमिका पर विशेष जोर

नई किताब के अनुसार, लोकतंत्र में न्यायपालिका का काम केवल कानूनों की व्याख्या करना ही नहीं, बल्कि सरकार के फैसलों की संवैधानिक समीक्षा करना और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना भी है।

पुस्तक में यह भी बताया गया है कि यदि कोई कानून संविधान के प्रावधानों के अनुरूप नहीं पाया जाता, तो न्यायपालिका उसे असंवैधानिक घोषित कर सकती है। इसके साथ ही छात्रों को यह जानकारी भी दी गई है कि जनहित याचिका (Public Interest Litigation – PIL) नागरिकों को न्याय तक पहुंचने का एक महत्वपूर्ण माध्यम उपलब्ध कराती है।

नई सामाजिक विज्ञान पुस्तकों में हुए हैं कई बदलाव

कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की नई पुस्तकों में कई विषयों को नए दृष्टिकोण के साथ शामिल किया गया है। इन बदलावों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है क्योंकि स्कूली पाठ्यपुस्तकें छात्रों की लोकतंत्र, संविधान और सरकारी संस्थाओं के प्रति समझ विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

नई पुस्तक न्यायपालिका को भारत के लोकतांत्रिक ढांचे के प्रमुख स्तंभों में से एक के रूप में प्रस्तुत करती है। इसमें संस्थागत स्वतंत्रता, नागरिक अधिकारों और संविधान के शासन (Rule of Law) के महत्व को सरल भाषा में समझाया गया है।

‘शक्तियों का पृथक्करण’ क्या है?

पुस्तक में ‘शक्तियों के पृथक्करण’ के सिद्धांत को भी विस्तार से समझाया गया है। इसके अनुसार लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में सरकार की शक्तियों को अलग-अलग संस्थाओं—विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका—के बीच बांटा जाता है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी संस्था अत्यधिक शक्तिशाली न बने और सभी संस्थाएं एक-दूसरे पर आवश्यक नियंत्रण एवं संतुलन (Checks and Balances) बनाए रखें। इससे लोकतंत्र अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बना रहता है।

छात्रों की संवैधानिक समझ होगी मजबूत

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों में किए गए बदलाव केवल परीक्षा की तैयारी तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे छात्रों की लोकतांत्रिक सोच और सार्वजनिक संस्थाओं के प्रति समझ को भी प्रभावित करते हैं।

नई NCERT पुस्तक के माध्यम से छात्रों को न्यायपालिका की भूमिका, संविधान की अहमियत और नागरिक अधिकारों के संरक्षण जैसे विषयों की बुनियादी जानकारी मिलेगी। इससे वे भारतीय लोकतंत्र की कार्यप्रणाली को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे।

नए शैक्षणिक सत्र में लागू होंगी पुस्तकें

NCERT की नई सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तकें मौजूदा शैक्षणिक सत्र के दौरान चरणबद्ध तरीके से स्कूलों में लागू की जा रही हैं। इन पुस्तकों का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप छात्रों को अवधारणात्मक, व्यावहारिक और संवैधानिक मूल्यों पर आधारित शिक्षा उपलब्ध कराना है।

Asmita Sarkar

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