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Strict BCI directive: Failure to complete the application by July 31 will impact law colleges' recognition and admissions

BCI का सख्त आदेश: 31 जुलाई तक आवेदन पूरा नहीं किया तो लॉ कॉलेजों की मान्यता और दाखिले पर पड़ेगा असर

Strict BCI directive: Failure to complete the application by July 31 will impact law colleges' recognition and admissions

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने देशभर के विश्वविद्यालयों, विधि विभागों, लॉ कॉलेजों और अन्य कानूनी शिक्षा संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। परिषद ने स्पष्ट किया है कि जो संस्थान अपने मौजूदा कानून पाठ्यक्रमों, सेक्शन और स्वीकृत सीटों की मान्यता को जारी रखना या उसका नवीनीकरण कराना चाहते हैं, उन्हें 31 जुलाई 2026 तक आवेदन प्रक्रिया हर हाल में पूरी करनी होगी।

बीसीआई का कहना है कि यह फैसला आगामी शैक्षणिक सत्र की प्रवेश प्रक्रिया को प्रभावित होने से बचाने और कानून की पढ़ाई करने वाले छात्रों के हितों की रक्षा के उद्देश्य से लिया गया है।

कई संस्थानों ने अभी तक पूरी नहीं की प्रक्रिया

बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अनुसार, बड़ी संख्या में संस्थानों ने अब तक आवेदन जमा नहीं किया है या आवेदन शुरू करने के बाद भी उसे पूरा नहीं किया है। कई मामलों में जरूरी दस्तावेज अपलोड नहीं किए गए, आवेदन में मांगी गई जानकारी अधूरी छोड़ी गई, निर्धारित शुल्क जमा नहीं किया गया या पोर्टल और ईमेल के माध्यम से बताई गई कमियों को समय पर दूर नहीं किया गया।

परिषद ने साफ किया है कि केवल पोर्टल पर पंजीकरण कर लेना, आवेदन संख्या प्राप्त कर लेना, कुछ दस्तावेज अपलोड करना या आंशिक शुल्क जमा करना पूर्ण आवेदन नहीं माना जाएगा।

कब माना जाएगा आवेदन पूरा?

बीसीआई के अनुसार आवेदन तभी पूर्ण माना जाएगा, जब संस्थान सभी जरूरी दस्तावेज अपलोड कर दें, आवेदन में मांगी गई सभी जानकारी भर दें, निर्धारित शुल्क का पूरा भुगतान कर दें, अंतिम सबमिशन कर दें और पोर्टल या ईमेल के माध्यम से बताई गई सभी कमियों को तय समय के भीतर दूर कर दें।

31 जुलाई तक दूर करनी होंगी सभी कमियां

परिषद ने निर्देश दिया है कि पोर्टल, पंजीकृत ईमेल, आधिकारिक पत्र या किसी अन्य अधिकृत माध्यम से बताई गई सभी कमियों को 31 जुलाई 2026 तक दूर करना अनिवार्य होगा। इसके लिए संस्थानों को नियमित रूप से अपने पोर्टल डैशबोर्ड और पंजीकृत ईमेल की जांच करने की सलाह दी गई है।

किन संस्थानों पर लागू होंगे ये निर्देश?

बीसीआई ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था केवल उन संस्थानों के लिए है जो पहले से संचालित कानून पाठ्यक्रमों, सेक्शन और स्वीकृत प्रवेश क्षमता की मान्यता जारी रखना या उसका नवीनीकरण कराना चाहते हैं।

यह व्यवस्था नए लॉ कॉलेज खोलने, नया कानून पाठ्यक्रम शुरू करने, अतिरिक्त सेक्शन शुरू करने या सीटों की संख्या बढ़ाने के मामलों पर लागू नहीं होगी। ऐसे मामलों के लिए अलग प्रक्रिया और अनुमति आवश्यक होगी।

50 हजार रुपये का पोर्टल पंजीकरण शुल्क अनिवार्य

बीसीआई की शुल्क व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक कानूनी शिक्षा संस्थान को 50,000 रुपये का एकमुश्त पोर्टल पंजीकरण शुल्क जमा करना होगा। यह शुल्क नॉन-रिफंडेबल (वापस नहीं किया जाएगा) होगा।

आवेदन लंबित होने का मतलब मंजूरी नहीं

बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने स्पष्ट किया है कि केवल आवेदन जमा करने या आवेदन विचाराधीन होने के आधार पर कोई संस्थान यह दावा नहीं कर सकता कि उसके पाठ्यक्रम को मंजूरी मिल गई है।

इसी तरह किसी भी संस्थान को ऐसे कोर्स, सेक्शन या सीटों पर प्रवेश लेने की अनुमति नहीं होगी, जिनके लिए बीसीआई की वैध या अंतरिम मंजूरी उपलब्ध नहीं है।

दाखिले के लिए क्या होगा जरूरी?

बीसीआई के अनुसार किसी भी कानून पाठ्यक्रम में प्रवेश तभी दिया जा सकेगा, जब संबंधित कोर्स, सेक्शन और सीटों को बार काउंसिल ऑफ इंडिया की वैध या अंतरिम मंजूरी प्राप्त हो और संबंधित विश्वविद्यालय की संबद्धता भी वैध हो।

विश्वविद्यालयों को भी दी गई जिम्मेदारी

बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया है कि वे अपने सभी संबद्ध लॉ कॉलेजों और कानूनी शिक्षा संस्थानों तक यह सूचना तत्काल पहुंचाएं। साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि सभी संस्थान तय समयसीमा के भीतर आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें।

31 जुलाई के बाद बंद हो जाएगी आवेदन विंडो

बीसीआई ने साफ किया है कि 31 जुलाई 2026 के बाद प्राप्त होने वाले आवेदन सामान्य परिस्थितियों में स्वीकार नहीं किए जाएंगे। केवल बेहद विशेष और उचित कारण होने पर ही सक्षम प्राधिकारी अलग निर्णय ले सकता है। परिषद ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी संस्थान को अतिरिक्त समय मिलने का स्वतः कोई अधिकार नहीं होगा।

समय पर आवेदन नहीं किया तो क्या होगा?

यदि कोई संस्थान निर्धारित समय सीमा तक आवेदन पूरा नहीं करता, तो उसे अंतिम अवसर का उपयोग न करने वाला माना जाएगा। ऐसी स्थिति में वह अपने मौजूदा कानून पाठ्यक्रमों, सेक्शन और स्वीकृत सीटों की मान्यता जारी रखने या नवीनीकरण का दावा नहीं कर सकेगा। इसका सीधा असर संबंधित शैक्षणिक सत्र की प्रवेश प्रक्रिया पर पड़ेगा और संस्थान नए दाखिले भी नहीं ले पाएगा।

बीसीआई ने यह भी कहा है कि ऐसी स्थिति में छात्रों को होने वाले किसी भी नुकसान की जिम्मेदारी संबंधित संस्थान और उससे संबद्ध विश्वविद्यालय की होगी।

 

 

Asmita Sarkar

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