
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत स्कूलों में भाषा शिक्षा को लेकर चल रही चर्चा के बीच सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 9 से तीसरी भाषा पढ़ाने के प्रस्ताव पर चिंता जताई है। सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि यदि किसी नई भाषा की पढ़ाई कक्षा 9 से शुरू की जाती है, तो इससे छात्रों पर अतिरिक्त शैक्षणिक दबाव पड़ सकता है। अदालत ने सुझाव दिया कि तीसरी भाषा की शुरुआत कक्षा 5 या 6 से करना अधिक व्यावहारिक होगा।
यह टिप्पणी जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और आर. महादेवन की पीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान की। हालांकि, अदालत ने इस संबंध में कोई औपचारिक आदेश जारी नहीं किया है। यह केवल सुनवाई के दौरान व्यक्त की गई मौखिक टिप्पणी थी।
सुनवाई के दौरान जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील से कहा कि कक्षा 9 पहले से ही छात्रों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होती है। इस स्तर पर बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी का दबाव शुरू हो जाता है और छात्र उच्च कक्षाओं की पढ़ाई के लिए खुद को तैयार करते हैं। ऐसे में यदि इसी समय एक नई भाषा जोड़ दी जाए, तो छात्रों का तनाव और बढ़ सकता है।
उन्होंने सुझाव दिया कि यदि सरकार तीसरी भाषा को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाना चाहती है, तो इसकी शुरुआत कक्षा 5 या 6 से की जानी चाहिए। उनके अनुसार, कम उम्र में बच्चे नई भाषाएं अधिक आसानी से सीखते हैं और उनके लिए भाषा सीखना अपेक्षाकृत सरल होता है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में बहुभाषी शिक्षा पर विशेष जोर दिया गया है। नीति का उद्देश्य छात्रों को मातृभाषा के साथ-साथ अन्य भारतीय भाषाओं और आवश्यकतानुसार विदेशी भाषाओं का भी अवसर देना है। हालांकि, नीति में यह भी कहा गया है कि भाषा संबंधी निर्णय राज्यों, स्कूलों और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लिए जाएंगे।
शिक्षा विशेषज्ञ भी मानते हैं कि भाषा सीखने की शुरुआत शुरुआती कक्षाओं में करने से बेहतर परिणाम मिलते हैं। बच्चों की सीखने की क्षमता कम उम्र में अधिक होती है, इसलिए वे नई भाषाओं को स्वाभाविक रूप से अपनाने में सक्षम होते हैं। वहीं माध्यमिक स्तर पर नए विषय या भाषा जोड़ने से कई छात्रों के लिए पढ़ाई का बोझ बढ़ सकता है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी एक सलाह के रूप में देखी जा रही है। अदालत ने इस विषय पर कोई बाध्यकारी निर्देश नहीं दिया है। अब इस मामले में केंद्र सरकार का पक्ष और आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी, जिसके बाद ही इस मुद्दे पर कोई औपचारिक न्यायिक निर्णय सामने आएगा।




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