
BCI Digital Ethics Guidelines 2026: सोशल मीडिया पर बढ़ते कानूनी कंटेंट, कोर्ट परिसर की रील और इंटर्नशिप से जुड़े वीडियो पर लगाम लगाने के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने नई डिजिटल एथिक्स (Digital Ethics) गाइडलाइन जारी की है। 17 जुलाई को जारी आधिकारिक सर्कुलर में सभी राज्य बार काउंसिल, लॉ कॉलेजों और विधि शिक्षा संस्थानों को निर्देश दिया गया है कि इन नियमों को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए।
बीसीआई ने स्पष्ट किया है कि यह केवल सलाह नहीं है, बल्कि सभी संबंधित संस्थानों के लिए अनुपालन सुनिश्चित करना जरूरी होगा। इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य न्यायपालिका की गरिमा, पेशेवर नैतिकता और गोपनीयता की रक्षा करना है।
किन लोगों पर लागू होंगे नए नियम?
नई गाइडलाइन केवल अधिवक्ताओं तक सीमित नहीं है। इसका दायरा कानून की पढ़ाई और प्रशिक्षण से जुड़े लगभग सभी वर्गों तक बढ़ा दिया गया है। इसमें एलएलबी (LLB) और एलएलएम (LLM) के छात्र, पीएचडी शोधार्थी, लॉ इंटर्न, रिसर्च स्कॉलर, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स करने वाले विद्यार्थी तथा अन्य विधि संबंधी पाठ्यक्रमों के छात्र शामिल हैं।
इसका मतलब है कि कानून की पढ़ाई के दौरान सोशल मीडिया पर की जाने वाली गतिविधियों पर भी अब संस्थानों और बार काउंसिल की नजर रहेगी।
कोर्ट की रील और वीडियो पर क्यों सख्ती?
बीसीआई के अनुसार हाल के समय में सोशल मीडिया पर अदालत परिसर, न्यायिक कार्यवाही, वकीलों के चैंबर, इंटर्नशिप अनुभव और कोर्ट विजिट से जुड़े रील, शॉर्ट वीडियो और मीम्स तेजी से साझा किए जा रहे हैं। परिषद का मानना है कि इस तरह की सामग्री कई मामलों में न्यायपालिका की गरिमा, पेशेवर गोपनीयता और कानूनी प्रक्रिया की गंभीरता को प्रभावित कर सकती है।
इसी कारण अब ऐसे कंटेंट को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं ताकि न्यायिक संस्थानों की मर्यादा बनी रहे।
गलत कानूनी सलाह पर भी जताई चिंता
बीसीआई ने अपने सर्कुलर में सोशल मीडिया पर बढ़ रही भ्रामक कानूनी जानकारी को भी गंभीर मुद्दा बताया है। परिषद के अनुसार कई लोग स्वयं को कानूनी विशेषज्ञ बताकर अधूरी, सनसनीखेज या गलत कानूनी सलाह साझा कर रहे हैं। इनमें कुछ लॉ स्टूडेंट्स, इंटर्न और स्वयंभू लीगल इन्फ्लुएंसर्स भी शामिल हैं।
बीसीआई का कहना है कि इस तरह की सामग्री आम लोगों को भ्रमित कर सकती है और कानून की गलत समझ पैदा कर सकती है। इसलिए जिम्मेदार और प्रमाणिक कानूनी संवाद को बढ़ावा देना आवश्यक है।
लॉ कॉलेजों को छात्रों से लेना होगा अंडरटेकिंग
नई व्यवस्था के तहत सभी लॉ कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को छात्रों से डिजिटल आचरण से संबंधित अलग अंडरटेकिंग और शपथ पत्र लेना होगा।
बीसीआई के निर्देशों के अनुसार प्रवेश के समय छात्रों से पहली अंडरटेकिंग ली जाएगी। इसके अलावा इंटर्नशिप शुरू होने से पहले भी एक अलग घोषणा पत्र देना होगा। संस्थानों को डिजिटल एथिक्स पर ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित करने और नियमों के पालन की निगरानी के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
किन सोशल मीडिया पोस्ट पर रहेगी रोक?
नई गाइडलाइन के तहत इंटर्नशिप और न्यायिक कार्य से जुड़े कई प्रकार के सोशल मीडिया पोस्ट प्रतिबंधित किए गए हैं। इनमें अदालत की कार्यवाही की रिकॉर्डिंग, कोर्ट परिसर के वीडियो, क्लाइंट मीटिंग की तस्वीरें या वीडियो, कॉन्फ्रेंस की रिकॉर्डिंग, केस फाइल या ड्राफ्ट से जुड़ी जानकारी, मुकदमे की रणनीति, “Day in Court”, “Day in Chamber”, “Internship Reveal” और “Lawyer Life” जैसे कंटेंट शामिल हैं।
बीसीआई ने स्पष्ट किया है कि इंटर्नशिप का उद्देश्य पेशेवर कौशल, अनुशासन और नैतिकता सीखना है, न कि सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करना।
नियमों का उल्लंघन करने पर क्या होगी कार्रवाई?
यदि कोई वकील, लॉ स्टूडेंट या इंटर्न इन दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ संस्थागत और पेशेवर स्तर पर कार्रवाई की जा सकती है।
संभावित कार्रवाई में इंटर्नशिप समाप्त करना, संबंधित लॉ कॉलेज को रिपोर्ट भेजना, इंटर्नशिप समन्वयक को सूचना देना, बार एसोसिएशन या लॉ फर्म को जानकारी देना, नामांकन समिति के समक्ष मामला प्रस्तुत करना, काउंसलिंग, चेतावनी या आवश्यक होने पर अन्य अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई शामिल हो सकती है।
क्यों महत्वपूर्ण हैं ये दिशा-निर्देश?
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ती सक्रियता के बीच बीसीआई की यह पहल कानून के पेशे में गोपनीयता, नैतिकता और जिम्मेदारी बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इन नियमों से यह संदेश भी स्पष्ट होता है कि सोशल मीडिया का उपयोग अभिव्यक्ति के लिए किया जा सकता है, लेकिन न्यायिक प्रक्रिया, क्लाइंट की गोपनीयता और पेशेवर आचरण से जुड़े मामलों में विशेष सावधानी बरतना हर कानून छात्र और अधिवक्ता की जिम्मेदारी है।




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