
पश्चिम एशिया के कई देशों में सुरक्षा चुनौतियों और युद्ध जैसे हालात के कारण रद्द हुई सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। अदालत ने उन छात्रों की याचिकाओं का निपटारा कर दिया है जिन्होंने सीबीएसई की विशेष मूल्यांकन योजना को चुनौती दी थी। हालांकि कोर्ट ने प्रभावित छात्रों को कंपार्टमेंट परीक्षा के साथ परीक्षा देने की अनुमति नहीं दी, लेकिन सीबीएसई को जल्द से जल्द नई परीक्षा आयोजित करने की दिशा में कदम उठाने की बात रिकॉर्ड पर ली है।
यह मामला उन हजारों भारतीय और भारतीय मूल के छात्रों से जुड़ा है जो सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत, कतर, ओमान और बहरीन में स्थित सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों में पढ़ते हैं। 2025-26 शैक्षणिक सत्र के दौरान क्षेत्र में उत्पन्न असामान्य परिस्थितियों के कारण कई विषयों की बोर्ड परीक्षाएं आयोजित नहीं हो सकीं, जिसके बाद सीबीएसई ने एक विशेष मूल्यांकन प्रणाली लागू की थी।
क्या था छात्रों का विवाद?
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में छात्रों ने सीबीएसई की 27 मार्च 2026 की विशेष मूल्यांकन योजना पर सवाल उठाए थे। बोर्ड ने रद्द हुई परीक्षाओं के अंक तय करने के लिए स्कूल स्तर पर आयोजित त्रैमासिक, अर्धवार्षिक और प्री-बोर्ड परीक्षाओं के प्रदर्शन को आधार बनाया था।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि यह व्यवस्था नियमित बोर्ड परीक्षा का उचित विकल्प नहीं थी और इससे कई छात्रों को अपेक्षा से कम अंक मिले। उनका कहना था कि यदि बोर्ड परीक्षाएं सामान्य रूप से आयोजित होतीं तो उनके परिणाम बेहतर हो सकते थे।
उच्च शिक्षा में प्रवेश पर पड़ा असर
छात्रों ने अदालत को बताया कि विशेष मूल्यांकन प्रणाली के कारण उनकी उच्च शिक्षा की संभावनाएं प्रभावित हुई हैं। विशेष रूप से DASA (Direct Admission of Students Abroad) और CIWG (Children of Indian Workers in Gulf Countries) जैसी प्रवेश योजनाओं में न्यूनतम 75 प्रतिशत अंकों की पात्रता शर्त होती है।
याचिका में यह भी कहा गया कि कुछ छात्रों ने जेईई मेन जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की थी, लेकिन विशेष मूल्यांकन में अपेक्षाकृत कम अंक मिलने के कारण वे प्रवेश के लिए आवश्यक पात्रता पूरी नहीं कर पाए। कुछ छात्रों को कंपार्टमेंट या अनुत्तीर्ण श्रेणी में भी रखा गया, जबकि उनका पिछला शैक्षणिक रिकॉर्ड बेहतर रहा था।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए छात्रों की उस मांग को स्वीकार नहीं किया, जिसमें उन्होंने कंपार्टमेंट परीक्षा देने वाले छात्रों के साथ परीक्षा में बैठने की अनुमति मांगी थी।
अदालत ने माना कि इतनी बड़ी संख्या में प्रभावित छात्रों के लिए इस तरह की व्यवस्था करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होगा। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए उन्हें जल्द से जल्द नई परीक्षा का अवसर मिलना चाहिए।
CBSE ने अदालत में क्या भरोसा दिया?
सुनवाई के दौरान सीबीएसई ने कहा कि उसका उद्देश्य हमेशा प्रभावित छात्रों के शैक्षणिक हितों की रक्षा करना रहा है। बोर्ड ने अदालत को बताया कि विशेष मूल्यांकन योजना असाधारण परिस्थितियों में छात्रों को परिणाम उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई थी, ताकि उनका शैक्षणिक वर्ष प्रभावित न हो।
सीबीएसई ने यह भी कहा कि जो छात्र विशेष मूल्यांकन से संतुष्ट नहीं हैं, उनके लिए भविष्य में एक विशेष परीक्षा आयोजित करने का प्रावधान मौजूद है। यह परीक्षा तब आयोजित की जाएगी जब संबंधित देशों में परिस्थितियां सामान्य हों और परीक्षा कराना संभव हो।
23 हजार से अधिक छात्रों पर पड़ेगा असर
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि यह मुद्दा केवल याचिका दायर करने वाले छात्रों तक सीमित नहीं है। पश्चिम एशिया के विभिन्न देशों में लगभग 23,052 छात्र इसी स्थिति से प्रभावित हुए हैं।
उन्होंने कहा कि सीबीएसई परिणाम सत्यापन, पुनर्मूल्यांकन और प्रवेश प्रक्रियाओं से जुड़े मामलों में आवश्यक सुविधाएं देने के लिए तैयार है। साथ ही, परिस्थितियां अनुकूल होने पर विशेष परीक्षा आयोजित करने की संभावना पर भी काम किया जा रहा है।
जल्द परीक्षा कराने पर जोर
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी दर्ज किया कि पिछली सुनवाई के दौरान परीक्षा आयोजन की समयसीमा को 82 दिनों से घटाकर 70 दिनों के भीतर पूरा करने की संभावना पर चर्चा हुई थी। हालांकि अदालत ने अंतिम निर्णय संबंधित पक्षों पर छोड़ दिया कि यह व्यवस्था व्यवहारिक रूप से संभव है या नहीं।
30 जुलाई को पारित आदेश, जिसे 12 अगस्त को सार्वजनिक किया गया, में अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि प्रभावित छात्रों को जल्द से जल्द अगली परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिलना चाहिए, ताकि वे उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए समय पर प्रतिस्पर्धा कर सकें।
छात्रों के लिए क्या है इसका मतलब?
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से प्रभावित छात्रों को तत्काल कंपार्टमेंट परीक्षा में शामिल होने की अनुमति तो नहीं मिली है, लेकिन उन्हें भविष्य में विशेष परीक्षा का अवसर मिलने की उम्मीद मजबूत हुई है। साथ ही अदालत ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि छात्रों का शैक्षणिक भविष्य अनावश्यक रूप से प्रभावित न हो।
अब सभी की नजर सीबीएसई की अगली घोषणा पर है, जिसमें विशेष परीक्षा की संभावित तारीखों और प्रक्रिया को लेकर अधिक स्पष्टता सामने आ सकती है।




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