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Paper Leak Case: Supreme Court Seeks Centre, States’ Response on Plea to Seize Assets of Accused

पेपर लीक के आरोपियों की संपत्ति जब्त करने की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर केंद्र और राज्यों से मांगा जवाब

Paper Leak Case: Supreme Court Seeks Centre, States’ Response on Plea to Seize Assets of Accused

Paper Leak Case: प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं को रोकने के लिए दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र और सभी राज्य सरकारों से जवाब मांगा है। याचिका में पेपर लीक जैसे मामलों में शामिल आरोपियों और उनके परिवार के सदस्यों की चल-अचल संपत्तियों की जांच कर अवैध संपत्ति मिलने पर उसे जब्त करने की मांग की गई है। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी।

यह जनहित याचिका अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दाखिल की है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने केंद्र और राज्यों को नोटिस जारी कर इस मामले पर उनका पक्ष मांगा है। सुप्रीम कोर्ट के इस कदम को परीक्षा व्यवस्था में पेपर लीक और संगठित नकल जैसी घटनाओं पर सख्ती से जुड़ी एक महत्वपूर्ण सुनवाई के रूप में देखा जा रहा है।

पेपर लीक आरोपियों और परिवार की संपत्ति की जांच की मांग

याचिका में मांग की गई है कि पेपर लीक और परीक्षा से जुड़े ऐसे अपराधों में शामिल लोगों की पूरी संपत्ति का आकलन किया जाए। इसके साथ ही उनके परिवार के सदस्यों की संपत्ति की भी जांच करने की मांग की गई है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि जांच में यदि अवैध संपत्ति या अपराध से कमाई गई रकम का पता चलता है तो मौजूदा कानूनों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। याचिका में भ्रष्टाचार निरोधक कानून, मनी लॉन्ड्रिंग, बेनामी संपत्ति और ब्लैक मनी से जुड़े कानूनों के तहत कार्रवाई का सुझाव दिया गया है।

याचिका में यह मांग भी की गई है कि यदि किसी व्यक्ति को पेपर लीक से जुड़े अपराध में अलग-अलग मामलों में दोषी ठहराया जाता है तो सजाएं एक साथ चलने के बजाय लगातार लागू की जाएं। याचिकाकर्ता के अनुसार, इससे पेपर लीक में शामिल लोगों के लिए सख्त सजा का संदेश जाएगा और भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने में मदद मिल सकती है।

कानून आयोग से दूसरे देशों की व्यवस्था का अध्ययन कराने की मांग

याचिका में वैकल्पिक रूप से कानून आयोग को दूसरे देशों में परीक्षा पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों से निपटने की व्यवस्थाओं का अध्ययन करने का निर्देश देने की मांग भी की गई है। याचिकाकर्ता ने आयोग से तीन महीने के भीतर रिपोर्ट तैयार करने की मांग की है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेपर लीक मामलों की जांच और मुकदमे को तय समय में पूरा कराने की मांग को फिलहाल आगे नहीं बढ़ाया गया। इसके पीछे हाल में संसद से पारित Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 का हवाला दिया गया।

यह संशोधन कानून परीक्षा से जुड़े अपराधों पर मौजूदा व्यवस्था को और सख्त करने के लिए लाया गया है। संसद ने जुलाई 2026 में इसे पारित किया। इसमें जांच और मुकदमे को तेज करने के लिए विशेष व्यवस्था तथा अपराधों के लिए ज्यादा सख्त सजा का प्रावधान किया गया है।

नए कानून में पेपर लीक पर सख्त सजा का प्रावधान

Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 के तहत पहले से ही सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों पर कार्रवाई का राष्ट्रीय कानूनी ढांचा मौजूद है। 2026 के संशोधन में इसे और मजबूत करने का प्रस्ताव रखा गया है।

सरकार के अनुसार, संशोधन में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति के लिए सजा को बढ़ाकर कम से कम पांच साल और अधिकतम 10 साल करने तथा अधिकतम जुर्माने को 50 लाख रुपये तक करने का प्रावधान है। संगठित परीक्षा अपराधों के मामले में न्यूनतम सजा और जुर्माने को भी बढ़ाने का प्रावधान किया गया है।

इसके अलावा जांच और मुकदमे में तेजी लाने के लिए Special Task Force और Special Fast-Track Courts जैसी व्यवस्था का प्रावधान किया गया है। संशोधन का उद्देश्य पेपर लीक और परीक्षा से जुड़े संगठित अपराधों में जल्दी जांच और सुनवाई सुनिश्चित करना है।

छात्रों के अधिकारों पर असर का दावा

याचिका में कहा गया है कि पेपर लीक की घटनाओं को रोकने, उनकी जांच करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई में बार-बार होने वाली देरी से छात्रों के अधिकार प्रभावित होते हैं। याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 14, 16, 19 और 21 का हवाला देते हुए कहा है कि परीक्षा प्रक्रिया में निष्पक्षता और समान अवसर छात्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।

याचिका के मुताबिक, सरकारों की ओर से कानून बनाए जाने के बावजूद पेपर लीक की घटनाओं को पूरी तरह रोकने के लिए व्यवस्था में अभी भी कमियां हैं। इनमें जांच और मुकदमे की प्रक्रिया में देरी को भी एक बड़ी समस्या बताया गया है।

हालांकि, 2026 के संशोधन कानून में इसी समस्या को दूर करने के लिए समयबद्ध जांच और तेज सुनवाई की व्यवस्था पर जोर दिया गया है। अब सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में संपत्ति की जांच और जब्ती जैसे अतिरिक्त कदमों पर केंद्र तथा राज्य सरकारों का पक्ष सामने आएगा।

पेपर लीक से छात्रों की मेहनत और करियर पर असर

पेपर लीक का सीधा असर उन छात्रों पर पड़ता है जो महीनों या वर्षों तक प्रतियोगी और सरकारी भर्ती परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। यदि पेपर लीक के कारण परीक्षा रद्द होती है या दोबारा परीक्षा आयोजित करनी पड़ती है तो छात्रों की आगे की पढ़ाई, नौकरी और करियर की योजना प्रभावित हो सकती है।

इसका असर परिवारों पर भी पड़ता है। छात्रों को दोबारा तैयारी करने के लिए अतिरिक्त समय देना पड़ता है और कई परिवारों को कोचिंग, यात्रा, रहने और परीक्षा से जुड़े खर्च फिर से उठाने पड़ सकते हैं।

याचिका में यह भी दावा किया गया है कि परीक्षा रद्द होने, भविष्य को लेकर अनिश्चितता और लंबे समय तक चलने वाली तैयारी से छात्रों पर मानसिक और शारीरिक दबाव बढ़ता है। कुछ मामलों में गंभीर मानसिक परेशानियों और आत्महत्या की घटनाओं का भी उल्लेख किया गया है।

अब 25 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर मामले में उनका जवाब मांगा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर 2026 को होगी। फिलहाल कोर्ट ने याचिका में की गई मांगों पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है।

इस मामले का आगे का रुख केंद्र और राज्य सरकारों के जवाब के बाद स्पष्ट होगा। खास तौर पर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पेपर लीक के आरोपियों और उनके परिवार की संपत्ति की जांच व जब्ती की मांग पर सरकारों का क्या रुख रहता है और मौजूदा कानूनों के तहत ऐसी कार्रवाई को लेकर क्या व्यवस्था है।

 

Asmita Sarkar

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