Edinbox Hindi
NEET UG 2026 Reforms: Supreme Court Seeks NTA Update on Radhakrishnan and Nandan Nilekani Committee Recommendations

NEET परीक्षा सुधार पर सुप्रीम कोर्ट ने NTA से मांगा जवाब, पूछा- समिति की सिफारिशों पर अब तक क्या कदम उठाए

NEET UG 2026 Reforms: Supreme Court Seeks NTA Update on Radhakrishnan and Nandan Nilekani Committee Recommendations

NEET-UG परीक्षा में सुधार और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) से विस्तृत जानकारी मांगी। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने केंद्र से पूछा कि राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को लागू करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और आगे की परीक्षा व्यवस्था को स्थायी तौर पर मजबूत करने की क्या योजना है।

अदालत ने यह भी जानना चाहा कि हाल में परीक्षा सुधारों के लिए गठित नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली हाई-पावर्ड टास्क फोर्स की भूमिका और उसकी सिफारिशों को लागू करने की दिशा में क्या काम किया जा रहा है। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को परीक्षा प्रश्नपत्र की सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी दी। कोर्ट ने केंद्र से नया हलफनामा दाखिल करने को कहा है, जिसके लिए तीन सप्ताह का समय दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सुधार सिर्फ कागज पर नहीं, व्यवस्था का हिस्सा बनें

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा सुधारों को केवल कागजों और रिपोर्ट तक सीमित रखने के बजाय उन्हें स्थायी व्यवस्था का हिस्सा बनाने की जरूरत पर जोर दिया। अदालत का कहना था कि किसी एक परीक्षा के लिए किए गए इंतजाम पर्याप्त नहीं हैं। जरूरी यह है कि परीक्षा प्रणाली में ऐसी स्थायी व्यवस्था हो, जो हर साल लागू हो और बदलती चुनौतियों के साथ खुद को बेहतर कर सके।

कोर्ट ने NTA की व्यवस्था में पर्याप्त बुनियादी ढांचे, प्रशिक्षित कर्मचारियों, तकनीकी क्षमता और विशेषज्ञता की जरूरत पर भी जोर दिया। अदालत का रुख यह रहा कि बार-बार सामने आने वाली समस्याओं का समाधान केवल तत्काल कदमों से नहीं, बल्कि पूरी परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करके किया जाना चाहिए।

केंद्र ने बताया, NEET प्रश्नपत्र की सुरक्षा कैसे की जाती है

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने NEET प्रश्नपत्र की तैयारी, छपाई, परिवहन और परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने की प्रक्रिया में अपनाए जाने वाले सुरक्षा उपायों के बारे में बताया।

केंद्र के मुताबिक, प्रश्न तैयार करने के लिए कई मॉडरेटरों से प्रश्नों का बैंक तैयार कराया जाता है। मॉडरेटरों को यह जानकारी नहीं होती कि उनके तैयार किए गए प्रश्नों में से कौन-से प्रश्न अंतिम पेपर में शामिल होंगे। प्रश्नपत्र को ले जाने वाले वाहनों में GPS ट्रैकिंग की व्यवस्था है और उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जाती है।

सरकार ने अदालत को बताया कि प्रश्नपत्र की छपाई से लेकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचने तक कई स्तरों पर सुरक्षा उपाय किए जाते हैं। केंद्र ने मौजूदा व्यवस्था को मजबूत और सेंध लगाना मुश्किल बताया।

राधाकृष्णन समिति ने NTA सुधार के लिए क्या सुझाव दिए थे?

NEET-UG 2024 विवाद के बाद केंद्र सरकार ने जून 2024 में पूर्व ISRO चेयरमैन डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में सात सदस्यीय हाई-लेवल कमेटी बनाई थी। समिति का उद्देश्य NTA की परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी सुधार सुझाना था।

समिति ने अपनी रिपोर्ट में 101 सिफारिशें दी थीं। इनमें परीक्षा सुरक्षा, डेटा सुरक्षा, NTA की संरचना, प्रश्नपत्र की सुरक्षा, परीक्षा संचालन और तकनीकी व्यवस्था को मजबूत करने से जुड़े सुझाव शामिल थे।

मई 2026 में राधाकृष्णन ने सुप्रीम कोर्ट को दिए हलफनामे में बताया था कि समिति की बड़ी संख्या में सिफारिशें लागू की जा चुकी हैं या उन्हें लागू करने की प्रक्रिया चल रही है। इसके बावजूद 2026 में NEET-UG से जुड़ा विवाद सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अब इस बात पर ज्यादा स्पष्ट जानकारी मांगी है कि सुधारों का वास्तविक स्तर क्या है और उन्हें लगातार कैसे लागू किया जा रहा है।

नंदन नीलेकणि की टास्क फोर्स क्यों बनाई गई?

NEET-UG 2026 विवाद के बाद केंद्र सरकार ने जुलाई 2026 में NTA की परीक्षा व्यवस्था में अगले चरण के सुधारों के लिए नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में छह सदस्यीय हाई-पावर्ड टास्क फोर्स गठित की थी। इसका मकसद परीक्षा प्रणाली में तकनीक के बेहतर इस्तेमाल के साथ-साथ ढांचागत बदलावों पर सुझाव देना है।

इस टास्क फोर्स में पूर्व ISRO चेयरमैन एस. सोमनाथ, पूर्व IB निदेशक तपन डेका, IIT मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि, पूर्व शिक्षा सचिव अनिता करवाल और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा शामिल हैं।

सरकार ने कहा है कि यह टास्क फोर्स NTA की परीक्षा व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए सुझाव देगी। NEET को भविष्य में कंप्यूटर आधारित परीक्षा में बदलने से जुड़े तकनीकी और डेटा सुरक्षा पहलुओं पर भी इस टास्क फोर्स की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

अब केंद्र को तीन सप्ताह में देना होगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से नया हलफनामा दाखिल करने को कहा है। इसमें यह बताना होगा कि NTA में परीक्षा सुधारों को लागू करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और आगे की परीक्षाओं को सुरक्षित एवं भरोसेमंद तरीके से आयोजित करने के लिए क्या स्थायी व्यवस्था बनाई जा रही है।

इस सुनवाई का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि अदालत पहले ही यह स्पष्ट कर चुकी है कि परीक्षा सुधार केवल किसी एक विवाद के बाद किए गए अस्थायी इंतजाम नहीं होने चाहिए। परीक्षा प्रणाली में ऐसी व्यवस्था जरूरी है, जो हर साल लगातार काम करे और उसमें पर्याप्त तकनीकी क्षमता, विशेषज्ञता तथा जवाबदेही हो।

मामला किन याचिकाओं से जुड़ा है?

सुप्रीम कोर्ट के सामने NEET-UG 2026 से जुड़े कई मामले हैं। इनमें Federation of All India Medical Association (FAIMA) की ओर से दायर याचिका भी शामिल है। इस मामले में अधिवक्ता तन्वी दुबे ने याचिकाकर्ता की ओर से पक्ष रखा है। याचिकाओं में NTA की परीक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार और NEET के संचालन को अधिक सुरक्षित बनाने की मांग की गई है।

अब अगली सुनवाई में केंद्र के नए हलफनामे से यह साफ होने की उम्मीद है कि राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों पर कितना काम हुआ है, नंदन नीलेकणि की टास्क फोर्स किस दिशा में आगे बढ़ रही है और भविष्य में NEET जैसी बड़ी परीक्षाओं को पेपर लीक तथा दूसरी गड़बड़ियों से बचाने के लिए कौन-सी स्थायी व्यवस्था लागू की जाएगी।

NEET उम्मीदवारों के लिए इसका सीधा मतलब यह है कि आने वाले समय में परीक्षा की सुरक्षा, प्रश्नपत्र की निगरानी, तकनीकी व्यवस्था और NTA की कार्यप्रणाली में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, इन बदलावों का अंतिम स्वरूप सरकार की रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।

 

Asmita Sarkar

Add comment

Recent posts

Most popular

Most discussed