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एआई के दौर में बदल रही है मैनेजमेंट की पढ़ाई, अब सही सवाल पूछना भी सीखेंगे छात्र

एक सदी से भी अधिक समय से केस मेथड यानी वास्तविक व्यावसायिक परिस्थितियों पर आधारित अध्ययन, मैनेजमेंट की पढ़ाई का एक प्रभावी तरीका रहा है। लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उभरने के साथ शिक्षकों को अब केवल यह नहीं सोचना पड़ रहा है कि क्या पढ़ाया जाए, बल्कि यह भी कि लोगों के सीखने का तरीका कैसे बदला जाए।

मैनेजमेंट शिक्षा के लिए प्रसिद्ध संस्थान INSEAD ने हाल ही में एआई पर आधारित अपने पहले इमर्सिव केस स्टडी शुरू किए हैं। वास्तविक लोगों पर आधारित एआई अवतारों के जरिए तैयार किए गए ये केस पारंपरिक केस मेथड में एक नया आयाम जोड़ते हैं। इसमें छात्रों को किसी व्यावसायिक चुनौती से जुड़े लोगों के साथ सीधे बातचीत करने का अवसर मिलता है।

लंबे लेख पढ़ने, विस्तृत घटनाक्रम समझने और पहले से तय जानकारियों का विश्लेषण करने के बजाय अब छात्र एआई से तैयार किए गए पात्र से सवाल पूछ सकते हैं। वे अपनी धारणाओं को परख सकते हैं और बातचीत के दौरान नई जानकारियां हासिल कर सकते हैं।

इससे सीखने का तरीका बुनियादी रूप से बदल जाता है। छात्रों के सामने तथ्यों का एक तय समूह रखने के बजाय उनसे यह अपेक्षा की जाती है कि वे खुद पहचानें कि कौन-से सवाल सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। इस तरह जोर केवल जानकारी का विश्लेषण करने पर नहीं, बल्कि उन पहलुओं को पहचानने पर भी होता है जिन पर आमतौर पर ध्यान नहीं दिया जाता।

आज जब जानकारी की कोई कमी नहीं है, तब सबसे महत्वपूर्ण कौशल केवल तथ्यों का विश्लेषण करना नहीं, बल्कि सही सवाल पूछना भी है।

एआई के जरिए होने वाली बातचीत छात्रों में यह क्षमता विकसित करने में मदद कर सकती है। साथ ही, इससे सीखने का माहौल पारंपरिक टेक्स्ट आधारित तरीकों की तुलना में अधिक रोचक और सक्रिय बन सकता है।

ऐसा ही एक एआई केस है ‘फूडोरा एंड फ्लैश: कॉपीकैट्स मेड इन जर्मनी’ (Foodora and Flash: Copycats Made in Germany)। यह उद्यमी बोरिस मिटरम्यूलर की व्यावसायिक यात्रा पर आधारित है।

इस केस स्टडी में उनके करियर के दो महत्वपूर्ण पड़ावों के जरिए सीखने का अवसर दिया गया है।

पहले परिदृश्य में छात्र एआई अवतार के रूप में मौजूद मिटरम्यूलर से बातचीत करते हैं। वह फ्रांस में फूडोरा नाम से फूड डिलीवरी ऐप शुरू करने पर विचार कर रहे हैं। कई फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और इसी से उन्हें इस कारोबार में अवसर नजर आता है।

छात्र उनसे सवाल पूछते हैं, जरूरी जानकारियां जुटाते हैं और फिर तय करते हैं कि उपलब्ध परिस्थितियां इस नए कारोबार को शुरू करने के पक्ष में हैं या नहीं।

इसके बाद कहानी कुछ साल आगे बढ़ती है। फूडोरा की सफलता के बाद उद्यमी के सामने एक और अवसर आता है, जो माइक्रोमोबिलिटी यानी कम दूरी की यात्रा के लिए इस्तेमाल होने वाले परिवहन साधनों से जुड़ा है।

इस बार भी छात्रों को यह आकलन करना होता है कि किसी दूसरे देश में सफल रहे कारोबारी मॉडल की नकल करना एक अच्छा व्यावसायिक अवसर हो सकता है या नहीं। लेकिन इस बार नतीजा पहले से काफी अलग होता है।

एक ही कारोबारी तरीका अलग-अलग समय और परिस्थितियों में अलग नतीजे दे सकता है। इन दोनों अनुभवों का अंतर छात्रों को सही समय और बाजार में प्रतिस्पर्धा की स्थिति के महत्व को समझने का मौका देता है।

छात्रों को यह समझना होता है कि किसी बाजार में प्रवेश करते समय वहां की परिस्थितियां कैसी हैं। इसके लिए उन्हें खुद सवाल पूछकर स्थिति की पड़ताल करनी होती है। इस प्रक्रिया में वे उस अनिश्चितता का सामना करते हैं, जिसका अनुभव वास्तविक दुनिया में कारोबार चलाने वाले अधिकारियों और उद्यमियों को भी करना पड़ता है।

कक्षा में मानवीय संवाद की अहमियत बरकरार

एआई कक्षा में पढ़ने और सिखाने के अनुभव को बदल रहा है। इमर्सिव केस स्टडी इस बड़े बदलाव का केवल एक उदाहरण हैं। मैनेजमेंट की पढ़ाई के पारंपरिक तरीकों—जैसे अभ्यास, परीक्षाएं और व्याख्यान—को भी नए तरीके से तैयार किया जा रहा है।

हालांकि, इस बदलाव के बीच लोगों के बीच संवाद की भूमिका अब भी केंद्रीय है। छात्रों के आपसी संवाद और शिक्षकों तथा छात्रों के बीच बातचीत का महत्व बना हुआ है। ज्ञान साझा करने और एक-दूसरे से सीखने की प्रक्रिया भी जारी है।

अब बदलाव की गुंजाइश इस बात में है कि इन संवादों को किस तरह व्यवस्थित किया जाए, ताकि सीखने का अनुभव अधिक प्रभावी बन सके।

सबसे बड़ी चुनौती यह है कि केवल नया होने के कारण एआई का इस्तेमाल न किया जाए। कक्षाओं में एआई के बढ़ते इस्तेमाल से होने वाली थकान और ऊब के संकेत भी दिखाई देने लगे हैं।

शिक्षक अब भी सीखने की पूरी प्रक्रिया को तैयार करने में अहम भूमिका निभाते हैं। उनकी जिम्मेदारी ऐसा अनुभव तैयार करना है, जो छात्रों को समझ के एक स्तर से अगले स्तर तक ले जाए और इस प्रक्रिया को रोचक तथा यादगार बनाए।

यदि एआई का इस्तेमाल इस उद्देश्य को स्पष्ट रूप से पूरा नहीं करता, तो वह केवल दिखावे का साधन बनकर रह सकता है। इससे सीखने का अनुभव बेहतर होने के बजाय कमजोर भी पड़ सकता है।

मैनेजमेंट शिक्षा में बदलाव की नई संभावनाएं

इसके बावजूद एआई के पास मैनेजमेंट शिक्षा को नए सिरे से समझने और विकसित करने की बड़ी क्षमता है। एआई आधारित केस स्टडी इस बात का एक उदाहरण हैं कि पढ़ाने और सीखने के नए तरीकों से क्या हासिल किया जा सकता है।

शिक्षक और शिक्षण संस्थान पढ़ाई के नए तरीकों को आजमा रहे हैं। इससे शिक्षा का एक नया मॉडल आकार ले रहा है, जिसमें सीखने की प्रक्रिया को अधिक संवादपरक और व्यावहारिक बनाया जा सकता है।

इमर्सिव एआई केस स्टडी इस बदलाव का शुरुआती अध्याय हो सकते हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि एआई का इस्तेमाल किस तरह छात्रों की सोचने, सवाल पूछने और वास्तविक कारोबारी चुनौतियों को समझने की क्षमता को विकसित करता है।

Raish Ahmed

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