कार्यस्थलों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल बढ़ने के साथ ही बिजनेस स्कूलों में मैनेजमेंट की पढ़ाई का तरीका भी बदल रहा है। पारंपरिक MBA के साथ अब AI, डेटा साइंस, टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट, उपभोक्ता व्यवहार और ब्रांड मैनेजमेंट जैसे विशेष क्षेत्रों पर आधारित पाठ्यक्रमों की मांग बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीकी उपकरण समय के साथ बदलते रहते हैं, लेकिन बुनियादी कौशल की अहमियत बनी रहती है। AI टूल्स छात्रों को नौकरी और करियर में दूसरों से आगे बढ़ने का अवसर दे सकते हैं, लेकिन लंबे समय तक करियर में टिके रहने के लिए प्रभावी संवाद, विश्लेषण करने की क्षमता, समस्याओं का समाधान निकालने और तकनीक को वास्तविक जीवन की जरूरतों के अनुसार इस्तेमाल करने जैसे कौशल जरूरी हैं। बदलते रोजगार बाजार में सफल होने के लिए इन क्षमताओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
MBA में विशेषज्ञता पर बढ़ रहा जोर
आरवी यूनिवर्सिटी के कुलपति और आईआईएम रायपुर के पूर्व निदेशक प्रो. राम कुमार काकानी के अनुसार, स्नातक स्तर पर छात्रों को अलग-अलग विषयों और क्षेत्रों की जानकारी मिलनी चाहिए। वहीं, मास्टर डिग्री के स्तर पर इस व्यापक समझ के साथ किसी एक खास क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करना भी जरूरी है।
प्रो. काकानी कहते हैं, “अब केवल सामान्य MBA की डिग्री पर्याप्त नहीं हो सकती। छात्रों को यह स्पष्ट होना चाहिए कि वे किस क्षेत्र में काम करना चाहते हैं, चाहे वह गेमिंग हो, टेक्नोलॉजी हो या कोई अन्य विशेष क्षेत्र।”
उन्होंने बताया कि इंटीग्रेटेड MBA जैसे पाठ्यक्रमों की मांग भी बढ़ रही है। इन कार्यक्रमों में छात्र BBA के तीन साल पूरे करने के बाद चौथे वर्ष में ऑनर्स डिग्री लेकर पढ़ाई छोड़ने का विकल्प चुन सकते हैं। वहीं, जो छात्र आगे पढ़ना चाहते हैं, वे पांचवें वर्ष तक पढ़ाई जारी रखकर पूरी MBA डिग्री हासिल कर सकते हैं।
विशेष पाठ्यक्रमों की बढ़ती लोकप्रियता के पीछे छात्रों की पसंद और रोजगार बाजार में मौजूद मांग भी एक कारण हो सकती है। प्रो. काकानी के मुताबिक, कई बार छात्र किसी पाठ्यक्रम को केवल इसलिए चुन लेते हैं, क्योंकि वह लोकप्रिय है। जरूरी नहीं कि उस विषय में उनकी वास्तविक रुचि हो या वे उसके लिए उपयुक्त हों। हालांकि, कई युवा अपने करियर को लेकर स्पष्ट सोच रखते हैं। ऐसे छात्रों के लिए, खासकर स्नातकोत्तर स्तर पर, किसी विशेष क्षेत्र से जुड़े पाठ्यक्रम उपयोगी साबित हो सकते हैं।
जनरेटिव AI के बढ़ते इस्तेमाल के कारण शिक्षण संस्थान परीक्षा और मूल्यांकन के तरीकों पर भी दोबारा विचार कर रहे हैं। प्रो. काकानी के अनुसार, छात्रों को असाइनमेंट तैयार करते समय AI का इस्तेमाल करने पर इसकी जानकारी देनी चाहिए। इसके अलावा, मूल्यांकन में मौखिक परीक्षा यानी वाइवा और अन्य तरह की मौखिक जांच को भी शामिल किया जा सकता है।
भविष्य की नौकरियों के लिए जरूरी कौशल
विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) की Future of Jobs Report 2025 के अनुसार, वर्ष 2030 तक रोजगार बाजार में होने वाले बदलावों से मौजूदा औपचारिक नौकरियों में से लगभग 22 प्रतिशत प्रभावित हो सकती हैं। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि इस दौरान 17 करोड़ नई नौकरियां पैदा होंगी, जबकि 9.2 करोड़ मौजूदा नौकरियां खत्म हो सकती हैं। इस तरह कुल मिलाकर 7.8 करोड़ नौकरियों की शुद्ध वृद्धि का अनुमान है।
रिपोर्ट में तकनीकी बदलाव, हरित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ता रुझान, जनसंख्या में बदलाव, देशों के बीच आर्थिक और भू-राजनीतिक विभाजन तथा आर्थिक अनिश्चितता को रोजगार बाजार में बदलाव के प्रमुख कारण बताया गया है।
मणिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन (MAHE), बेंगलुरु और मणिपाल के प्रो-वाइस चांसलर प्रो. मधु वीरराघवन का कहना है कि नई नौकरियों की संभावित वृद्धि सकारात्मक संकेत है, लेकिन उच्च शिक्षा संस्थानों के सामने इससे भी बड़ा सवाल है। क्या मौजूदा पाठ्यक्रम छात्रों को उन भूमिकाओं के लिए पर्याप्त रूप से तैयार कर पा रहे हैं, जिनकी प्रकृति और जरूरतों के बारे में अभी पूरी जानकारी नहीं है?
उनके अनुसार, विश्वविद्यालयों को ऐसे कौशल विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए, जो तकनीक, नौकरी की भूमिकाओं और नियोक्ताओं की अपेक्षाओं में बदलाव के बावजूद उपयोगी बने रहें।
प्रो. वीरराघवन कहते हैं कि मैनेजमेंट की पढ़ाई में छात्रों के संवाद कौशल, समस्या सुलझाने की क्षमता, विश्लेषण और तार्किक सोच को मजबूत करना जरूरी है। मैनेजमेंट के क्षेत्र में नौकरी पाने के लिए जरूरी कौशल और प्रबंधन क्षमता की मांग लगातार बदल रही है, इसलिए छात्रों को रोजगार के लिए तैयार करना शिक्षण संस्थानों की एक बड़ी जिम्मेदारी है।
उनका मानना है कि मैनेजमेंट की शिक्षा को ऐसे तरीके की ओर बढ़ना चाहिए, जिसमें केवल जानकारी या तकनीकी कौशल पर नहीं, बल्कि सही निर्णय लेने, जिम्मेदारी समझने और रचनात्मक सोच विकसित करने पर भी जोर दिया जाए।
मैनेजमेंट की पढ़ाई में AI की भूमिका
प्रो. वीरराघवन ने कहा कि AI को मैनेजमेंट शिक्षा के पूरे पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए और अलग-अलग विषयों की जरूरत के अनुसार इसका इस्तेमाल सिखाया जाना चाहिए।
उनके अनुसार, AI को केवल एक अलग विषय के रूप में पढ़ाना या छात्रों को ChatGPT और Codex जैसे टूल्स तक पहुंच देना पर्याप्त नहीं है। छात्रों को यह समझना भी जरूरी है कि इन टूल्स का सही और प्रभावी इस्तेमाल कैसे किया जाए। साथ ही, उन्हें AI से मिलने वाले जवाबों और नतीजों की जांच करने तथा उनकी विश्वसनीयता का आकलन करने की क्षमता विकसित करनी चाहिए।
प्रो. वीरराघवन का कहना है कि MBA स्नातकों की शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए बिजनेस स्कूलों को AI के इस्तेमाल से जुड़े स्पष्ट नियम बनाने चाहिए। छात्रों को यह बताना चाहिए कि उन्होंने अपने असाइनमेंट या दूसरे शैक्षणिक कार्यों में AI टूल्स का उपयोग किया है या नहीं। AI का जिम्मेदारी के साथ इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए जवाबदेही और पारदर्शिता से जुड़े नियम भी जरूरी हैं।
करियर को ध्यान में रखकर तैयार हो रहे पाठ्यक्रम
भारत में मैनेजमेंट शिक्षा की स्थिति कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों से अलग है। दूसरे देशों के कई MBA कार्यक्रमों में ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाती है, जिनके पास कई वर्षों का कार्य अनुभव हो। इसके विपरीत, भारत में बड़ी संख्या में MBA पाठ्यक्रमों में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के तुरंत बाद प्रवेश लिया जाता है।
JAGSOM और VU के बोर्ड सदस्य प्रणव पडोड़े के अनुसार, भारतीय संस्थानों को छात्रों में संवाद कौशल, सोचने-समझने की क्षमता, लोगों के साथ काम करने का व्यवहार और कार्यस्थल के लिए जरूरी बुनियादी कौशल विकसित करने में काफी समय देना पड़ता है।
उन्होंने बताया कि पहले मैनेजमेंट शिक्षा का मुख्य उद्देश्य ऐसे सर्वांगीण स्नातक तैयार करना था, जो बाद में उद्योग की जरूरतों के अनुसार खुद को ढाल सकें। लेकिन जैसे-जैसे नौकरियों में विशेषज्ञता बढ़ी, शिक्षण संस्थानों ने करियर आधारित पाठ्यक्रम शुरू किए। इनमें अलग-अलग उद्योगों और नौकरी की भूमिकाओं को ध्यान में रखकर पढ़ाई की रूपरेखा तैयार की गई।
पडोड़े के मुताबिक, अब मैनेजमेंट शिक्षा को ऐसे मॉडल की ओर ले जाना जरूरी है, जो छात्रों को केवल डिग्री दिलाने तक सीमित न रहे, बल्कि उन्हें करियर में सफल होने के लिए तैयार करे। इसके लिए छात्रों की करियर संबंधी पसंद को उद्योगों के वास्तविक अनुभव और जरूरी कौशल के विकास से जोड़ना अहम कदम है।




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