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वित्त वर्ष 2026 में भी मजबूत रहेगा हॉस्पिटैलिटी सेक्टर, घरेलू पर्यटन और शादियों से बढ़ेगी मांग: ICRA रिपोर्ट

वित्त वर्ष 2026 में भी मजबूत रहेगा हॉस्पिटैलिटी सेक्टर, घरेलू पर्यटन और शादियों से बढ़ेगी मांग: ICRA रिपोर्ट

वित्त वर्ष 2026 में भी मजबूत रहेगा हॉस्पिटैलिटी सेक्टर, घरेलू पर्यटन और शादियों से बढ़ेगी मांग: ICRA रिपोर्ट

भारतीय हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के लिए वित्त वर्ष 2026 (FY26) भी सकारात्मक रहने की उम्मीद है। रेटिंग एजेंसी ICRA की एक रिपोर्ट के मुताबिक घरेलू अवकाश पर्यटन, MICE गतिविधियां (मीटिंग्स, इंसेंटिव्स, कॉन्फ्रेंस और एग्ज़ीबिशन), शादी समारोह और मजबूत कॉर्पोरेट मांग इस सेक्टर के अच्छे परिचालन प्रदर्शन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएंगे।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2025 के उच्च आधार के बावजूद हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की विकास संभावनाएं अभी भी काफी सकारात्मक दिखाई देती हैं। ICRA के अनुसार, पूरे भारत में प्रीमियम होटलों की औसत ऑक्यूपेंसी दर FY26 में लगभग 72 से 74 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसकी तुलना में चालू वित्त वर्ष के पहले 11 महीनों के दौरान यह दर करीब 71 से 73 प्रतिशत दर्ज की गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक होटल उद्योग में औसत कमरे का किराया यानी Average Room Rate (ARR) भी बढ़ने की संभावना है। FY26 में यह बढ़कर लगभग 8,200 से 8,500 रुपये प्रति रात तक पहुंच सकता है, जबकि FY2025 में यह करीब 8,000 से 8,200 रुपये प्रति रात के बीच रहा था। मजबूत मांग और बेहतर मूल्य निर्धारण क्षमता इसके पीछे प्रमुख कारण बताए गए हैं।

ICRA ने यह भी कहा है कि देश के 12 प्रमुख शहरों में प्रीमियम होटल कमरों की संख्या FY25 और FY26 के दौरान सालाना लगभग 5 से 6 प्रतिशत की दर से ही बढ़ने का अनुमान है। यह अनुमानित मांग वृद्धि दर, जो लगभग 8 से 9 प्रतिशत बताई गई है, से कम है। इसी वजह से आने वाले दो से तीन वर्षों तक मांग और आपूर्ति के बीच असंतुलन बने रहने की संभावना है, जिससे होटल ऑक्यूपेंसी और कमरे के किराए में बढ़ोतरी को सहारा मिल सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में मांग के स्रोत अब पहले की तुलना में काफी विविध हो गए हैं। अब यह मांग केवल कॉर्पोरेट यात्रा तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें शादी और सामाजिक समारोह, MICE गतिविधियां, कॉन्सर्ट, खेल आयोजन, धार्मिक पर्यटन और टियर-2 व टियर-3 शहरों की ओर बढ़ता अवकाश पर्यटन भी शामिल है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मांग के इस विविधीकरण से होटल उद्योग की वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ाव या चक्रीय मंदी के प्रति संवेदनशीलता कुछ हद तक कम हुई है।

इसके साथ ही होटल कंपनियां तेजी से ‘एसेट-लाइट’ विस्तार मॉडल अपना रही हैं। इसके तहत मैनेजमेंट कॉन्ट्रैक्ट और फ्रेंचाइज़ व्यवस्था के जरिए विस्तार किया जा रहा है। इस मॉडल से कंपनियों को कम पूंजी निवेश के साथ फीस आधारित आय प्राप्त होती है, जिससे पूंजी पर बेहतर रिटर्न मिलता है और फ्री कैश फ्लो को मजबूत करने में भी मदद मिलती है।

एडइनबॉक्स टीम

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