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Women Cross 50% Enrollment in Several IIMs as Gender Diversity Reshapes MBA Education

IIMs में बदली तस्वीर, पहली बार कई संस्थानों में महिला छात्रों की संख्या 50% के पार

Women Cross 50% Enrollment in Several IIMs as Gender Diversity Reshapes MBA Education

देश के प्रमुख भारतीय प्रबंधन संस्थानों (IIMs) में अब महिला छात्रों की भागीदारी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। Post Graduate Programme (PGP) और MBA in Liberal Studies and Management जैसे विशेष एमबीए कार्यक्रमों में महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। IIM Kozhikode, IIM Indore, IIM Sambalpur और IIM Rohtak जैसे संस्थानों में पहली बार महिला छात्रों की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक हो गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव प्रवेश प्रक्रिया में जेंडर डाइवर्सिटी (Gender Diversity) को बढ़ावा देने, महिला अभ्यर्थियों को अतिरिक्त वेटेज देने और गैर-इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों की बढ़ती भागीदारी का परिणाम है।

महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए विशेष पहल

IIM Indore के निदेशक प्रो. हिमांशु राय के अनुसार, संस्थान ने महिला छात्रों को प्रोत्साहित करने के लिए कई कदम उठाए हैं।

उन्होंने बताया कि प्रवेश प्रक्रिया में महिला उम्मीदवारों को Composite Score में अतिरिक्त अंक दिए जाते हैं। साथ ही प्रत्येक छात्र को पूरे कार्यक्रम के दौरान एक फैकल्टी मेंटर उपलब्ध कराया जाता है, जो शैक्षणिक और व्यक्तिगत मार्गदर्शन देता है।

संस्थान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को KK Alagh Gold Medal और IIM Indore Scholastic Gold Medal से भी सम्मानित करता है।

इसके अलावा छात्राओं के समग्र विकास के लिए Director’s Cup Football Tournament, महिला क्रिकेट, थ्रोबॉल, डॉजबॉल और मिश्रित टीमों वाली वॉलीबॉल जैसी खेल गतिविधियां शुरू की गई हैं। कैंपस में छात्राओं की सुविधा के लिए सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनें भी लगाई गई हैं।

एक दशक पहले शुरू हुआ बदलाव

करीब दस वर्ष पहले तक देश के प्रमुख IIMs के प्रमुख प्रबंधन कार्यक्रमों में महिलाओं की हिस्सेदारी केवल 8 से 10 प्रतिशत के आसपास होती थी।

IIM Kozhikode के निदेशक प्रो. देबाशीष चटर्जी ने बताया कि वर्ष 2013 में उनका संस्थान पहला IIM बना, जहां प्रमुख MBA (PGP) कार्यक्रम में महिला छात्रों की संख्या 50 प्रतिशत से अधिक रही।

उन्होंने कहा कि यह संयोग नहीं, बल्कि प्रबंधन शिक्षा को अधिक समावेशी और समाज की वास्तविक प्रतिभा के अनुरूप बनाने की सोच का परिणाम था।

MBA in Liberal Studies में 82% तक पहुंची महिला भागीदारी

प्रो. चटर्जी के अनुसार, MBA in Liberal Studies and Management, जिसे वर्ष 2020 में शुरू किया गया था, उसके हर बैच में महिलाओं की संख्या 50 प्रतिशत से अधिक रही है।

उन्होंने बताया कि 2026 बैच में महिला छात्रों का नामांकन 82 प्रतिशत तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे अधिक आंकड़ा है।

सिर्फ अंकों पर नहीं, नेतृत्व क्षमता पर भी ध्यान

IIM Kozhikode का कहना है कि प्रवेश प्रक्रिया में केवल परीक्षा के अंकों पर ही नहीं, बल्कि नेतृत्व क्षमता, प्रेरणा, भावनात्मक समझ (Emotional Intelligence), आलोचनात्मक सोच (Critical Thinking) और जीवन के अनुभवों को भी महत्व दिया जाता है।

साथ ही कॉमर्स, मानविकी, चिकित्सा, कला और इंजीनियरिंग सहित विभिन्न शैक्षणिक पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों को समान अवसर दिए जाते हैं।

संस्थान ने मेंटरशिप कार्यक्रम, सफल महिला नेताओं के साथ संवाद, छात्र-नेतृत्व वाले मंच और बहु-विषयक शिक्षा के माध्यम से ऐसा माहौल तैयार किया है, जिससे सभी छात्रों को आगे बढ़ने का अवसर मिल सके।

कॉमर्स पृष्ठभूमि की छात्राओं की संख्या सबसे अधिक

इन प्रमुख IIMs में दाखिला लेने वाली बड़ी संख्या में छात्राएं अब गैर-इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से आ रही हैं।

कॉमर्स सबसे प्रमुख शैक्षणिक पृष्ठभूमि बनकर उभरा है। वहीं महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश ऐसे राज्य हैं, जहां से सबसे अधिक महिला छात्राएं इन संस्थानों तक पहुंच रही हैं।

प्लेसमेंट में भी दिख रहा बदलाव

IIM Sambalpur के निदेशक प्रो. महादेव जायसवाल के अनुसार, महिला छात्राएं अब कंसल्टिंग, बिजनेस स्ट्रैटेजी, टेक्नोलॉजी, इन्वेस्टमेंट बैंकिंग, कॉरपोरेट ट्रेजरी, प्रोडक्ट मैनेजमेंट, जनरल मैनेजमेंट, उद्यमिता, पब्लिक पॉलिसी और सोशल इम्पैक्ट जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा रही हैं।

वहीं IIM Kozhikode के Laboratory for Innovation, Venturing and Entrepreneurship (LIVE) ने कई सफल महिला उद्यमियों को तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

संस्थान के अनुसार, हालिया प्लेसमेंट में महिला छात्रों का औसत CTC ₹31.04 लाख प्रति वर्ष रहा, जो पूरे बैच के औसत ₹28.18 लाख प्रति वर्ष से अधिक है।

नेतृत्व पदों पर अब भी कम है महिलाओं की हिस्सेदारी

महिला छात्रों की संख्या बढ़ने के बावजूद कॉरपोरेट जगत के शीर्ष नेतृत्व पदों पर उनकी भागीदारी अभी भी सीमित है।

प्रो. हिमांशु राय का कहना है कि महिलाएं शुरुआती स्तर पर अच्छे वेतन और जिम्मेदार पद हासिल कर रही हैं, लेकिन करियर में आगे बढ़ने के दौरान कई संरचनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

राष्ट्रीय आंकड़ों के अनुसार, भारत में National Stock Exchange (NSE) में सूचीबद्ध 2,285 कंपनियों में केवल 6 प्रतिशत कंपनियों की चेयरपर्सन महिलाएं हैं। वहीं केवल 5.21 प्रतिशत कंपनियों में महिला Managing Director (MD) या CEO हैं।

सिर्फ प्रवेश नहीं, नेतृत्व तक पहुंचाना भी जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि कक्षा में लैंगिक समानता हासिल करना महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन यह केवल शुरुआत है।

महिलाओं की करियर प्रगति कई बार पारिवारिक जिम्मेदारियों, नेतृत्व के मूल्यांकन में मौजूद पूर्वाग्रह, मजबूत पेशेवर नेटवर्क की कमी और सहयोगात्मक नेतृत्व शैली को कम महत्व दिए जाने जैसी चुनौतियों के कारण धीमी हो जाती है।

प्रो. चटर्जी का कहना है कि कई महिलाएं करियर के मध्य चरण में महत्वाकांक्षा नहीं छोड़तीं, बल्कि वे अपने काम में उद्देश्य, संतुलन और दीर्घकालिक स्थिरता को अधिक महत्व देने लगती हैं। संस्थानों और कंपनियों को इसे कम प्रतिबद्धता नहीं, बल्कि नेतृत्व की परिपक्वता के रूप में देखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस दिशा में बिजनेस स्कूल, कंपनियां और नीति निर्माता सभी की साझा भूमिका है। महिलाओं के लिए बेहतर नेतृत्व प्रशिक्षण, लचीले करियर विकल्प, समान मूल्यांकन प्रणाली, मजबूत पेशेवर नेटवर्क, चाइल्डकेयर सहायता और कार्यस्थलों पर समावेशी नीतियां विकसित करना समय की जरूरत है।

 

Asmita Sarkar

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