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IIT Delhi में छात्रों की मानसिक सेहत के लिए बढ़ेंगी सुविधाएं, नियुक्त होंगे साइकोलॉजिस्ट और काउंसलर

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली ने छात्रों की मानसिक सेहत और उनके कल्याण को बेहतर बनाने के लिए कई अहम कदम उठाने की घोषणा की है। संस्थान अब अतिरिक्त फुलटाइम क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट और काउंसलर नियुक्त करेगा। इसके अलावा विजिटिंग साइकेट्रिस्ट की सुविधा भी बढ़ाई जाएगी। छात्रों की शिकायतों के समाधान के लिए एक स्वतंत्र स्टूडेंट ग्रीवांस ओम्बड्सपर्सन नियुक्त करने और फैकल्टी व हॉस्टल स्टाफ के लिए सहानुभूति तथा मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी कार्यशालाएं आयोजित करने की भी योजना है।

IIT दिल्ली ने ये कदम छात्रों के सुझावों और एक बाहरी जांच समिति की सिफारिशों के आधार पर तैयार किए हैं। संस्थान ने 5 नवंबर 2026 को जारी बयान में बताया कि 3 नवंबर को हुई स्टूडेंट अफेयर्स काउंसिल की बैठक में प्रस्तावित कार्ययोजना पर चर्चा की गई। इस दौरान छात्रों के सुझावों को भी शामिल किया गया।

IIT Delhi के फैसले पर करियर कोच अपर्णा गौतम की राय

करियर कोच अपर्णा गौतम ने IIT दिल्ली की इस पहल का स्वागत किया है। उनका कहना है कि पढ़ाई, परीक्षा और करियर की तैयारी के साथ छात्रों की मानसिक सेहत को भी संस्थानों की प्राथमिकता में शामिल किया जाना चाहिए। हालांकि, ऐसी पहल की सफलता केवल विशेषज्ञों की नियुक्ति से तय नहीं होगी। सबसे जरूरी यह है कि छात्र बिना किसी डर या झिझक के मदद मांग सकें।

अपर्णा गौतम के अनुसार, छात्रों को यह भरोसा होना चाहिए कि उनकी बात गोपनीय रखी जाएगी, उनकी परेशानी को कमजोरी नहीं समझा जाएगा और जरूरत पड़ने पर उन्हें समय पर विशेषज्ञ की सहायता मिलेगी।

उन्होंने कहा कि सफलता को देखने का नजरिया बदलना भी जरूरी है। जब किसी छात्र की पहचान केवल उसके अंक, रैंक या प्लेसमेंट पैकेज से होने लगती है, तो एक परीक्षा में असफलता या नौकरी न मिलने पर उसे अपना पूरा भविष्य खतरे में नजर आने लगता है। छात्रों को यह समझाना जरूरी है कि उनकी योग्यता और व्यक्तिगत मूल्य किसी एक परीक्षा या नौकरी के नतीजे से तय नहीं होते।

अपर्णा गौतम का मानना है कि काउंसलिंग के साथ छात्रों और उनके माता-पिता को भी मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील बनाना होगा। पढ़ाई का दबाव, दूसरों से लगातार तुलना और मदद मांगने को लेकर मन में बैठा डर जैसे मुद्दों पर खुलकर बात होनी चाहिए। ऐसा माहौल बनाना जरूरी है, जहां छात्र अपनी पढ़ाई और करियर में आगे बढ़ने के साथ जरूरत पड़ने पर यह कह सकें कि उन्हें मदद की जरूरत है।

IIT Delhi में छात्रों के लिए कौन-कौन सी सुविधाएं बढ़ेंगी?

संस्थान की कार्ययोजना के तहत मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी पेशेवर सहायता का दायरा बढ़ाया जाएगा। इसके लिए अतिरिक्त फुलटाइम क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट और काउंसलर नियुक्त किए जाएंगे। साथ ही विजिटिंग साइकेट्रिस्ट की उपलब्धता बढ़ाई जाएगी, ताकि जरूरतमंद छात्रों को विशेषज्ञ सहायता मिल सके।

छात्रों की शिकायतों के समाधान के लिए स्वतंत्र स्टूडेंट ग्रीवांस ओम्बड्सपर्सन नियुक्त किया जाएगा। इसका उद्देश्य शिकायतों के निपटारे की व्यवस्था को मजबूत करना और छात्रों को अपनी समस्याएं रखने के लिए एक स्वतंत्र माध्यम उपलब्ध कराना है।

संस्थान में फैकल्टी सदस्यों, प्रशासनिक कर्मचारियों और हॉस्टल स्टाफ के लिए सहानुभूति, संवाद कौशल और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी कार्यशालाएं भी अनिवार्य की जाएंगी। इसके अलावा परिसर में मानसिक स्वास्थ्य और नशीले पदार्थों के इस्तेमाल से जुड़े कानूनों के बारे में जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे।

लंबी छुट्टी के बाद लौटने वाले छात्रों को मिलेगी विशेष मदद

IIT दिल्ली ने उन छात्रों के लिए भी विशेष व्यवस्था करने की योजना बनाई है, जो लंबे समय तक छुट्टी पर रहने के बाद दोबारा संस्थान लौटेंगे। ऐसे छात्रों को विशेष काउंसलिंग, पढ़ाई से जुड़ा सहयोग और बडी नेटवर्क की सुविधा दी जाएगी।

इस व्यवस्था का मकसद छात्रों को दोबारा पढ़ाई और परिसर के माहौल से जुड़ने में मदद करना है। लंबे अंतराल के बाद लौटने वाले विद्यार्थियों को पढ़ाई का दबाव, छूटे हुए पाठ्यक्रम और साथियों के बीच दोबारा तालमेल बनाने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। नई व्यवस्था के जरिए इन परेशानियों को कम करने की कोशिश की जाएगी।

मानसिक स्वास्थ्य नीति की समीक्षा के लिए बनेगी बाहरी समिति

IIT दिल्ली अपनी मौजूदा मानसिक स्वास्थ्य सहायता व्यवस्था और वेलनेस पॉलिसी की भी व्यापक समीक्षा कराएगा। इसके लिए एक बाहरी समिति बनाई जाएगी, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य के दो वरिष्ठ विशेषज्ञ, एक वेलफेयर प्रोफेशनल और दो छात्र प्रतिनिधि शामिल होंगे।

यह समिति संस्थान में पहले से उपलब्ध सुविधाओं, आपात स्थिति में प्रतिक्रिया देने की व्यवस्था, जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों तक पहुंचने की प्रक्रिया और सहायता सेवाओं की निगरानी की समीक्षा करेगी। इसके बाद सुधार के लिए सुझाव दिए जाएंगे।

छात्र की मौत के बाद शुरू हुई थी समीक्षा प्रक्रिया

IIT दिल्ली की ओर से घोषित ये कदम 22 अगस्त 2026 को छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद शुरू हुई संस्थागत समीक्षा से जुड़े हैं। इस घटना के बाद संस्थान ने दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस मुक्ता गुप्ता की अध्यक्षता में बाहरी जांच समिति बनाई थी। इसमें एम्स के एक वरिष्ठ विशेषज्ञ और दो छात्र प्रतिनिधि भी शामिल थे।

समिति ने अपनी रिपोर्ट संस्थान को सौंप दी है। हालांकि, समिति ने रिपोर्ट को गोपनीय रखने की शर्त रखी थी। IIT दिल्ली के अनुसार, रिपोर्ट की सिफारिशों का मुख्य जोर मानसिक स्वास्थ्य सहायता और छात्रों के कल्याण से जुड़ी संस्थागत व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर है।

संस्थान ने 31 अक्टूबर को जांच समिति की सिफारिशों और उन पर प्रस्तावित कार्रवाई की जानकारी छात्रों, फैकल्टी और कर्मचारियों के साथ साझा की थी। इसके बाद 3 नवंबर की स्टूडेंट अफेयर्स काउंसिल की बैठक में कार्ययोजना पर चर्चा हुई और छात्रों के सुझावों को शामिल किया गया।

IIT दिल्ली की नई पहल से यह स्पष्ट है कि संस्थान अब छात्र कल्याण को केवल काउंसलिंग तक सीमित रखने के बजाय शिकायतों के समाधान, पढ़ाई में दोबारा वापसी, कर्मचारियों के व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य नीति की समीक्षा जैसे पहलुओं पर भी काम करना चाहता है। हालांकि, इन योजनाओं का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि इन्हें कितनी तेजी और प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है और छात्र इन सुविधाओं का इस्तेमाल करने में कितना सहज महसूस करते हैं।

Raish Ahmed

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