
कई सालों की योजना और प्रशासनिक रुकावटों के बाद ओडिशा के गंगाधर मेहर विश्वविद्यालय (GMU) में बहुप्रतीक्षित ‘डिप्लोमा इन हैप्पीनेस’ कोर्स आखिरकार अगले शैक्षणिक सत्र से शुरू होने जा रहा है।
छह महीने का यह कार्यक्रम विशेष रूप से छात्रों में बढ़ते तनाव, मानसिक अस्थिरता और आत्मविश्वास की कमी जैसी समस्याओं से निपटने में मदद के लिए तैयार किया गया है। ओडिशा के युवाओं में बढ़ते मानसिक स्वास्थ्य संकट को देखते हुए यह कोर्स छात्रों को संतुलित भावनात्मक जीवन जीने की दिशा में प्रेरित करेगा।
मानसिक संतुलन और आत्मविश्वास बढ़ाने पर होगा फोकस
विश्वविद्यालय के डिप्टी रजिस्ट्रार उमाचरण पाटी ने बताया कि यह कोर्स खुशी के विभिन्न आयामों पर केंद्रित होगा और इसमें इमोशनल इंटेलिजेंस, स्ट्रेस मैनेजमेंट, माइंडफुलनेस और निर्णय लेने की क्षमता जैसे विषय शामिल होंगे।
पाटी ने कहा, “वर्तमान शिक्षा प्रणाली केवल अकादमिक ज्ञान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसमें नैतिक, बौद्धिक और व्यक्तित्व विकास को भी बढ़ावा दिया जाना चाहिए। छह महीने का यह कोर्स छात्रों को मानसिक स्थिरता हासिल करने, तनाव से प्रभावी ढंग से निपटने और निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करने में मदद करेगा।”
सोशल मीडिया और बदलती जीवनशैली से बढ़ रहा तनाव
पाटी ने कहा कि सोशल मीडिया के अनियंत्रित उपयोग, तेज़ रफ्तार जीवन और शैक्षणिक दबावों ने युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
उन्होंने बताया कि यह डिप्लोमा प्रोग्राम इंटरएक्टिव क्लास, समूह गतिविधियों और सहभागी कार्यशालाओं के माध्यम से सकारात्मक सोच और आत्म-चिंतन को बढ़ावा देगा।
“सोमवार को कोर्स के सिलेबस को लेकर बैठक हुई है। कोर्स शुरू होने के बाद, विश्वविद्यालय छात्रों की प्रतिक्रिया और मांग को देखते हुए इसे आगे डिग्री प्रोग्राम में भी परिवर्तित कर सकता है,” पाटी ने कहा।
मनोविज्ञान, दर्शन और समाजशास्त्र विभाग मिलकर पढ़ाएंगे
यह कार्यक्रम न केवल GMU के छात्रों बल्कि बाहरी प्रतिभागियों के लिए भी खुला रहेगा, जो बेहतर मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक संतुलन प्राप्त करना चाहते हैं।
कोर्स को मनोविज्ञान, दर्शनशास्त्र और समाजशास्त्र विभागों के संकाय सदस्यों द्वारा संयुक्त रूप से पढ़ाया जाएगा।
ओडिशा का पहला सरकारी संस्थान बनेगा GMU
इस कोर्स की शुरुआत के साथ गंगाधर मेहर विश्वविद्यालय ओडिशा का पहला सरकारी संस्थान बन जाएगा जो इस तरह का डिप्लोमा कार्यक्रम शुरू कर रहा है।
विश्वविद्यालय जल्द ही ‘जेंडर स्टडीज़ प्रोग्राम’ भी शुरू करने की योजना बना रहा है, जिसमें सर्टिफिकेट और डिप्लोमा दोनों कोर्स शामिल होंगे। यह कार्यक्रम लैंगिक समानता, लैंगिक पूर्वाग्रह और महिला-पुरुष सशक्तिकरण जैसे विषयों पर केंद्रित रहेगा।
नए कैंपस से दूर हुई जगह की कमी
विश्वविद्यालय सूत्रों ने बताया कि पहले स्थान की कमी इस कोर्स की सबसे बड़ी बाधा थी। हालांकि, अब बसंतपुर कैंपस के पूरी तरह संचालित हो जाने के बाद यह समस्या खत्म हो गई है, जिससे कोर्स को शुरू करने का मार्ग साफ हो गया है।




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