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'पढ़ने-लिखने की सही आदतें ही बनाती हैं रचनात्मक सोच'

‘पढ़ने-लिखने की सही आदतें ही बनाती हैं रचनात्मक सोच’

'पढ़ने-लिखने की सही आदतें ही बनाती हैं रचनात्मक सोच'

जैसे एक संतुलित आहार हमारे शरीर को स्वस्थ रखता है, उसी तरह सही “मानसिक आहार” हमारे दिमाग और रचनात्मकता के विकास के लिए बेहद जरूरी होता है। यह बात Yuvraj Malik, निदेशक National Book Trust ने  Savitribai Phule Pune University में आयोजित ‘Mee Lekhak Honarach’ कार्यशाला के दौरान कही।

उन्होंने कहा कि व्यक्ति क्या पढ़ता है, क्या लिखता है और किस तरह सोचता है, वही उसकी सोच और रचनात्मकता को आकार देता है। इसलिए उभरते लेखकों को चाहिए कि वे जिस साहित्य को पढ़ते हैं, उसका चयन सोच-समझकर करें।

चार दिनों तक चलने वाली इस कार्यशाला का आयोजन National Book Trust, Savitribai Phule Pune University और Samarth Yuva Foundation ने मिलकर किया। इसका उद्देश्य युवाओं को नियमित रूप से लेखन की आदत अपनाने के लिए प्रेरित करना और उन्हें यह समझाना था कि इतिहास बनाने और समाज में बदलाव लाने में लेखन की कितनी अहम भूमिका होती है।

कार्यशाला में स्थान आधारित सीखने की पद्धति, संवादात्मक गतिविधियां, सुनने और बोलने की तकनीकों जैसे कई तरीकों का उपयोग किया गया। इनके माध्यम से यह बताया गया कि लेखन केवल शब्दों का खेल नहीं, बल्कि एक कला है। साथ ही यह भी समझाया गया कि गहरी अवलोकन क्षमता और साहित्यिक समझ का उपयोग देश के विकास में भी सकारात्मक भूमिका निभा सकता है।

इस दौरान युवराज मलिक ने प्रतिभागियों के साथ एक खास 10+1+1 फॉर्मूला साझा किया। इसके अनुसार हर दिन 10 पेज पढ़ना, 1 पेज लिखना और 1 मिनट बोलने का अभ्यास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह तरीका मजबूत साहित्यिक पहचान बनाने में काफी मददगार हो सकता है। मलिक ने यह भी स्पष्ट किया कि तथ्यों के बिना कोई भी कथन केवल शब्द भर रह जाता है, इसलिए छात्रों को शोध आधारित लेखन पर ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने कहा, “हम जितना बेहतर कंटेंट पढ़ते हैं, उतना ही बेहतर लिख पाते हैं।” इसी के साथ उन्होंने युवा लेखकों के लिए कई महत्वपूर्ण पुस्तकों की भी सिफारिश की और छात्रों को बिना किसी डर के अपनी रचनात्मकता को व्यक्त करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा, “लेखन के जरिए समाज को बदला जा सकता है। अपनी रचनात्मक सोच को कभी दबने न दें।”

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति Suresh Gosavi ने भी Pune Book Festival की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देते हैं और नए लेखकों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके अनुसार, “इस तरह की पहल से छात्रों की समझ और शोध आधारित लेखन क्षमता दोनों बेहतर होती हैं।”

कार्यक्रम के दौरान Sadanand Bhosale के कविता संग्रह Main Zinda Hoon का भी लोकार्पण किया गया। इसके बाद साहित्य और लेखन से जुड़ी संभावनाओं पर एक रोचक चर्चा भी आयोजित की गई।

Asmita Sarkar

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