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TISS Plans School of Analytics in Ratan Tata’s Name to Connect Technology, Society and Sustainable Development

TISS में रतन टाटा के नाम पर बनेगा School of Analytics, टेक्नोलॉजी के साथ सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर होगा फोकस

TISS Plans School of Analytics in Ratan Tata’s Name to Connect Technology, Society and Sustainable Development

Tata Institute of Social Sciences (TISS) ने टेक्नोलॉजी, डेटा और समाज से जुड़े मुद्दों को एक साथ समझने की दिशा में नई पहल की है। संस्थान ने Tata Trusts के सहयोग से School of Analytics स्थापित करने की योजना बनाई है। प्रस्तावित स्कूल का नाम दिवंगत उद्योगपति रतन टाटा के नाम पर रखने की योजना है।

इस पहल का उद्देश्य Analytics और तकनीक की पढ़ाई को केवल तकनीकी ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय उसे सामाजिक चुनौतियों और टिकाऊ विकास से जोड़ना है। TISS की अपनी घोषित vision भी शिक्षा, research और knowledge को लोगों और पर्यावरण से जुड़े व्यापक सामाजिक मुद्दों के साथ जोड़ने पर जोर देती है।

रतन टाटा के नाम पर क्यों रखा जाएगा School of Analytics?

TISS की योजना इस स्कूल का नाम रतन टाटा के नाम पर रखने की है। इसका उद्देश्य तकनीक, innovation और समाज से जुड़े उनके विचारों और योगदान को सम्मान देना बताया गया है।

प्रस्तावित स्कूल में छात्रों को केवल data और technology का इस्तेमाल करना नहीं सिखाया जाएगा, बल्कि यह समझने पर भी जोर होगा कि तकनीक का असर समाज और पर्यावरण पर किस तरह पड़ता है। इसका मकसद ऐसे professionals तैयार करना है जो तकनीकी समाधान को वास्तविक सामाजिक जरूरतों से जोड़ सकें।

School of Analytics में कौन से कोर्स होंगे?

प्रस्तावित स्कूल के तहत फिलहाल Analytics में Master’s degree और Analytics एवं Sustainability में Bachelor’s degree जैसे academic programmes पर फोकस किया जा रहा है।

TISS पहले से ही Analytics और Sustainability को जोड़ने वाले academic work पर काम कर रहा है। संस्थान के 2025 के एक programme prospectus में analytics को sustainability से जोड़ने, research skills विकसित करने, interdisciplinary learning और ethical leadership पर जोर दिया गया है।

इस तरह छात्रों को data और analytics की तकनीकी जानकारी के साथ यह समझने का अवसर मिलेगा कि इनका इस्तेमाल sustainability और सामाजिक समस्याओं को समझने और हल करने में कैसे किया जा सकता है।

क्या यह पहल सिर्फ पढ़ाई तक सीमित रहेगी?

नहीं। School of Analytics को आगे चलकर research और knowledge का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाने की योजना है। इसका फोकस अलग-अलग विषयों को साथ लाकर research करने और technology, society तथा sustainability से जुड़े जटिल सवालों को समझने पर हो सकता है।

इस तरह छात्रों को classroom education के साथ वास्तविक समस्याओं पर काम करने और data के आधार पर solutions तलाशने का अवसर मिल सकता है।

TISS का मौजूदा academic model भी teaching के साथ research, knowledge creation और policy advocacy पर जोर देता है। संस्थान की official vision के अनुसार, उसका लक्ष्य बदलती social realities को समझते हुए ऐसे knowledge और professionals तैयार करना है, जो एक न्यायपूर्ण और environmentally sustainable society के निर्माण में योगदान दे सकें।

किन क्षेत्रों पर रहेगा खास फोकस?

प्रस्तावित पहल में भविष्य में working professionals के लिए education programmes और international institutions के साथ collaborations पर भी जोर दिए जाने की योजना है।

Digital transformation, climate-related data analysis और urban informal sector जैसे क्षेत्र इसमें महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इन क्षेत्रों में technology और data का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में analytics की मदद से सामाजिक और पर्यावरणीय समस्याओं को समझना आने वाले समय में महत्वपूर्ण skill बन सकता है।

TISS और Tata Trusts के बीच शिक्षा और capacity-building से जुड़ा सहयोग पहले से भी रहा है। उदाहरण के तौर पर, TISS के Centre of Excellence in Teacher Education को Tata Trusts से seed support मिला था और Trusts इस initiative को support करना जारी रखते हैं।

रतन टाटा की विरासत को कैसे आगे बढ़ा सकता है यह स्कूल?

आज data और technology का इस्तेमाल education, business, healthcare, environment और public policy जैसे कई क्षेत्रों में बढ़ रहा है। ऐसे समय में Analytics को social sciences और sustainability के साथ जोड़ने की पहल छात्रों को technology को व्यापक नजरिए से समझने का मौका दे सकती है।

रतन टाटा के नाम पर प्रस्तावित यह स्कूल उनकी विरासत को शिक्षा और research से जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। खासकर तब, जब देश में companies और organisations को ऐसे professionals की जरूरत बढ़ रही है, जो technology के साथ उसके सामाजिक प्रभाव को भी समझते हों।

हालांकि, प्रस्तावित School of Analytics के सभी academic programmes, admission process, eligibility, fees और शुरुआत की तारीख से जुड़ी अंतिम जानकारी के लिए छात्रों को TISS की official announcements का इंतजार करना चाहिए। फिलहाल TISS की official website पर 2026 के कई undergraduate और postgraduate admission updates जारी हैं।

छात्रों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?

अगर यह योजना तय रूप में आगे बढ़ती है, तो छात्रों के लिए यह केवल Analytics की degree हासिल करने का अवसर नहीं होगा। यहां data, technology, society और sustainability को एक साथ समझने का मौका मिल सकता है।

आने वाले समय में ऐसे professionals की मांग बढ़ सकती है, जो केवल data का analysis करना ही नहीं जानते हों, बल्कि यह भी समझते हों कि किसी technology या policy का समाज और पर्यावरण पर क्या असर पड़ेगा।

यही School of Analytics की सबसे बड़ी खासियत हो सकती है—तकनीक को केवल business या technology की जरूरत के तौर पर नहीं, बल्कि समाज और टिकाऊ विकास से जोड़कर देखना।

 

Asmita Sarkar

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