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KPSC भर्ती घोटाला: परीक्षा से पहले उम्मीदवारों को मिले थे जवाब, 50 लाख रुपये तक रिश्वत लेने का आरोप

कर्नाटक में सरकारी भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ी का बड़ा मामला सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आरोप लगाया है कि कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) की पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती परीक्षा में कुछ उम्मीदवारों को परीक्षा से एक दिन पहले ही प्रश्नपत्र और सही जवाब उपलब्ध करा दिए गए थे। जांच एजेंसी के मुताबिक, इसके बदले उम्मीदवारों से लाखों रुपये वसूले गए और चयन का भरोसा दिया गया।

यह परीक्षा जनवरी 2026 में पशु चिकित्सा अधिकारियों के 400 पदों पर भर्ती के लिए 8 और 9 जनवरी को आयोजित की गई थी। ईडी के अनुसार, जांच में अब तक ऐसे 10 उम्मीदवारों की पहचान की गई है, जिन्हें कथित तौर पर परीक्षा की सामग्री पहले ही उपलब्ध कराई गई थी। आरोप है कि उम्मीदवारों को बेंगलुरु के बाहरी इलाके में स्थित एक रिसॉर्ट में ले जाकर प्रश्नों के जवाब दिए गए और उन्हें याद करने के लिए कहा गया। 

40 से 50 लाख रुपये तक लेने का आरोप

ईडी की जांच के अनुसार, परीक्षा में चयन कराने के नाम पर उम्मीदवारों से बड़ी रकम मांगी गई थी। कुछ रिपोर्टों में प्रति उम्मीदवार 40 से 50 लाख रुपये तक की कथित डील का उल्लेख है। वहीं, ईडी की 30 सितंबर की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, प्रश्नपत्र लीक कराने के मामले में उम्मीदवारों से 30 से 40 लाख रुपये तक की अवैध रकम लेने का आरोप है। एजेंसी के मुताबिक, शुरुआत में कुछ उम्मीदवारों से करीब 80 लाख रुपये मांगे गए थे, लेकिन बाद में रकम कम कर दी गई।

जांच एजेंसी का आरोप है कि कुछ उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले उनके लिए तैयार की गई अलग-अलग उत्तर कुंजी भी दी गई थी। इन उम्मीदवारों से 20 से 40 लाख रुपये तक लेने का आरोप है। जांच में कथित तौर पर प्रश्नपत्र लीक करने के साथ भर्ती प्रक्रिया में अनुचित तरीके से चयन सुनिश्चित कराने की कोशिशों की भी पड़ताल की जा रही है। 

तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक पर भी आरोप

इस मामले में तत्कालीन KPSC परीक्षा नियंत्रक और आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार का नाम सामने आया है। ईडी का आरोप है कि परीक्षा से जुड़ी गोपनीय सामग्री उनके पास थी और उन्होंने अपने सहयोगी बसवराज कन्नाले के माध्यम से प्रश्नपत्र लीक कराया।

जांच एजेंसी के अनुसार, कन्नाले उम्मीदवारों के संपर्क में था और उनसे कथित तौर पर पैसे वसूलने में उसकी भूमिका थी। उम्मीदवारों को परीक्षा में चयन का भरोसा दिया गया था। ईडी ने बसवराज कन्नाले को 17 सितंबर 2026 और गंगवार को 18 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया था। दोनों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत जांच की जा रही है। 

KPSC के निलंबित अध्यक्ष और सदस्य भी गिरफ्तार

जांच का दायरा बढ़ने के बाद ईडी ने KPSC के निलंबित अध्यक्ष शिवशंकरप्पा सहुकार और आयोग की सदस्य बीवी गीता को भी गिरफ्तार किया। एजेंसी के मुताबिक, दोनों की भूमिका कथित तौर पर उम्मीदवारों को उत्तर कुंजी उपलब्ध कराने और रिश्वत लेने से जुड़ी थी।

ईडी का आरोप है कि गीता ने गंगवार से लीक हुई उत्तर कुंजी हासिल की थी और एक उम्मीदवार से कथित तौर पर 40 लाख रुपये की रिश्वत में से 20 लाख रुपये अग्रिम लिए थे। वहीं, सहुकार पर एक उम्मीदवार से 20 लाख रुपये की कथित रिश्वत में से 10 लाख रुपये अग्रिम लेने का आरोप है।

6 अक्टूबर को दोनों से जुड़े ठिकानों पर तलाशी ली गई थी। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। ईडी की जांच में कथित लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों और बैंक जमा की भी पड़ताल की गई है। इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा। 

सफल उम्मीदवार के पास से मिले खाली चेक और प्रॉमिसरी नोट

ईडी के अनुसार, जांच के दौरान एक सफल उम्मीदवार के पास से 80 लाख रुपये के खाली हस्ताक्षरित चेक और खाली हस्ताक्षरित प्रॉमिसरी नोट बरामद किए गए। एजेंसी को संदेह है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल कथित रिश्वत की रकम के भुगतान या बकाया राशि की वसूली सुनिश्चित करने के लिए किया जा सकता था।

जांच एजेंसी का कहना है कि भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले की जांच पुलिस की ओर से दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। अब जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि कथित रिश्वत की रकम कहां गई और भर्ती प्रक्रिया में किन अन्य लोगों की भूमिका रही।

मामले में कथित तौर पर गोपनीय प्रश्नपत्र और उत्तर कुंजी साझा करने के साथ चयन सूची से जुड़ी जानकारी के दुरुपयोग की भी जांच की जा रही है। 

सरकारी भर्ती की पारदर्शिता पर उठे सवाल

कर्नाटक का यह मामला सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले उम्मीदवार महीनों और कई बार वर्षों तक तैयारी करते हैं। ऐसे में यदि किसी उम्मीदवार को परीक्षा से पहले प्रश्नों के जवाब उपलब्ध कराए जाने या पैसे के बदले चयन का भरोसा दिए जाने के आरोप सही साबित होते हैं, तो इससे योग्य उम्मीदवारों के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।

फिलहाल ईडी इस मामले में कथित धन लेनदेन, गोपनीय परीक्षा सामग्री के प्रसार और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रही है। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत करेगी।

Raish Ahmed

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