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UGC का बड़ा कदम: एडमिशन कैंसिल करने पर फीस लौटाने से मना नहीं कर सकेंगे कॉलेज, जानें रिफंड के नियम

कॉलेज या विश्वविद्यालय में दाखिला लेने के बाद अगर कोई छात्र किसी कारण से एडमिशन रद्द कराता है, तो उसे नियमानुसार फीस वापस पाने का अधिकार हो सकता है। इसके बावजूद कई उच्च शिक्षण संस्थानों पर फीस वापस नहीं करने की शिकायतें सामने आई हैं। अब विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने इस मामले में सख्ती दिखाते हुए विभिन्न राज्यों के राज्यपालों के कार्यालयों से हस्तक्षेप करने की मांग की है।

UGC ने कहा है कि बार-बार शिकायतें भेजने, संबंधित संस्थानों से संपर्क करने और बैठकें करने के बावजूद कई मामलों में फीस वापसी से जुड़े नियमों का पालन नहीं हो रहा है। आयोग चाहता है कि राज्यपालों के कार्यालय संबंधित विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को नियमों का पालन करने के निर्देश दें, ताकि छात्रों को बेवजह परेशानी न उठानी पड़े।

तमिलनाडु के 82 संस्थानों से जुड़ी 150 शिकायतें

UGC की ओर से राज्यपालों के कार्यालयों को भेजे गए पत्र में तमिलनाडु के 82 उच्च शिक्षण संस्थानों से जुड़ी 150 शिकायतों का उल्लेख किया गया है। ये शिकायतें शैक्षणिक सत्र 2021-22 से 2025-26 के दौरान रद्द किए गए दाखिलों से संबंधित हैं। इन मामलों में छात्रों ने 2,535 रुपये से लेकर 4 लाख रुपये तक फीस जमा की थी।

पत्र के साथ दी गई जानकारी के अनुसार, शिकायतों में मानित विश्वविद्यालयों, निजी विश्वविद्यालयों, सरकारी या सार्वजनिक विश्वविद्यालयों और निजी कॉलेजों से जुड़े मामले शामिल हैं।

UGC की सचिव प्रोफेसर श्यामा रथ ने 7 अक्टूबर 2026 को लिखे पत्र में कहा कि आयोग ने फीस रिफंड के नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें छात्रों की शिकायतें संबंधित संस्थानों तक पहुंचाना, उनसे संपर्क करना और विचार-विमर्श के लिए बैठकें आयोजित करना शामिल है। इसके बावजूद कई शिकायतों का समाधान नहीं हो पाया है।

यह पत्र विभिन्न राज्यों के राज्यपालों के प्रधान सचिवों को भेजा गया है। आयोग ने उनसे अनुरोध किया है कि वे संबंधित संस्थानों को नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दें।

फीस वापस नहीं करना छात्रों के अधिकारों का उल्लंघन

UGC के मुताबिक, तय नियमों के अनुसार फीस वापस नहीं करना केवल छात्र के आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचाने का मामला नहीं है, बल्कि इससे उच्च शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है।

आयोग ने कहा है कि संबंधित विश्वविद्यालयों और उनसे जुड़े कॉलेजों को कई बार लिखित सूचना देने और फोन के जरिए संपर्क करने के बाद भी कुछ संस्थानों ने निर्देशों का पालन नहीं किया। इससे छात्रों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

इसी वजह से UGC ने राज्यपालों के कार्यालयों से हस्तक्षेप करने और संबंधित संस्थानों को नियमों का पालन करने की चेतावनी देने का अनुरोध किया है। हालांकि, इस पत्र का मतलब यह नहीं है कि हर शिकायत में संस्थान को दोषी ठहरा दिया गया है। प्रत्येक मामले में लागू नियमों और शिकायत के तथ्यों के आधार पर स्थिति देखी जाएगी।

UGC के नियमों के अनुसार कितनी फीस वापस मिलेगी?

UGC की फीस रिफंड नीति के तहत दाखिला रद्द कराने की तारीख और संबंधित पाठ्यक्रम में प्रवेश की अंतिम तारीख के बीच के अंतर के आधार पर फीस वापसी तय होती है। सामान्य नियमों के अनुसार, फीस वापसी का ढांचा इस प्रकार है:

  • प्रवेश की अंतिम तारीख से 15 दिन या उससे अधिक पहले: 100 प्रतिशत फीस वापसी।
  • अंतिम तारीख से 15 दिन से कम समय पहले: 90 प्रतिशत फीस वापसी।
  • अंतिम तारीख के 15 दिन के भीतर: 80 प्रतिशत फीस वापसी।
  • अंतिम तारीख के 15 दिन बाद, लेकिन 30 दिन के भीतर: 50 प्रतिशत फीस वापसी।
  • अंतिम तारीख के 30 दिन बाद: सामान्य नियमों के तहत फीस वापस नहीं की जाती।

ये समय-सीमाएं प्रवेश की औपचारिक रूप से घोषित अंतिम तारीख के संदर्भ में समझी जानी चाहिए, न कि केवल छात्र के दाखिला लेने की तारीख से। लागू शैक्षणिक सत्र की नीति और उसमें दिए गए शुल्क कटौती संबंधी प्रावधानों को भी देखना जरूरी है। कुछ मामलों में निर्धारित प्रोसेसिंग शुल्क काटने का प्रावधान हो सकता है। इसलिए छात्र अपनी यूनिवर्सिटी की फीस रिफंड नीति के साथ UGC के संबंधित सत्र के दिशा-निर्देश जरूर जांचें।

फीस वापस नहीं करने वाले संस्थानों पर क्या कार्रवाई हो सकती है?

UGC ने फीस रिफंड नीति का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई के प्रावधानों की ओर भी ध्यान दिलाया है। उल्लंघन की प्रकृति और लागू नियमों के अनुसार कार्रवाई में संस्थान को मिलने वाली अनुदान सहायता रोकना, आयोग की योजनाओं के तहत सहायता के लिए अयोग्य घोषित करना और संस्थान का नाम सार्वजनिक करना शामिल हो सकता है।

यदि मामला किसी संबद्ध कॉलेज से जुड़ा है, तो उसकी संबद्धता वापस लेने के लिए संबंधित विश्वविद्यालय से सिफारिश की जा सकती है। आयोग राज्य या केंद्र सरकार को भी उचित कार्रवाई की सिफारिश कर सकता है।

इसका उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों को फीस वापसी के नियमों के प्रति जवाबदेह बनाना और छात्रों की शिकायतों का समाधान सुनिश्चित करना है।

छात्र फीस रिफंड न मिलने पर क्या करें?

अगर किसी छात्र ने तय नियमों के अनुसार दाखिला रद्द कराया है, लेकिन उसे फीस वापस नहीं मिल रही है, तो उसे सबसे पहले संबंधित कॉलेज या विश्वविद्यालय में लिखित शिकायत देनी चाहिए। दाखिला रद्द कराने का आवेदन, फीस की रसीद, संस्थान से हुई बातचीत और रिफंड से संबंधित ईमेल या अन्य दस्तावेज सुरक्षित रखना जरूरी है।

यदि संस्थान से समाधान नहीं मिलता, तो छात्र UGC के ई-समाधान (e-Samadhan) शिकायत पोर्टल के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। शिकायत में पाठ्यक्रम, दाखिले का वर्ष, रद्द करने की तारीख, जमा की गई फीस और अब तक की गई कार्रवाई का स्पष्ट विवरण देना चाहिए।

शिकायत दर्ज करने से पहले यह भी जांच लें कि आपका मामला किस शैक्षणिक सत्र की फीस रिफंड नीति के अंतर्गत आता है। इससे संबंधित नियमों के आधार पर अपनी मांग रखना आसान होगा।

UGC की हालिया पहल उन छात्रों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्हें दाखिला रद्द कराने के बाद फीस वापस पाने में परेशानी हो रही है। हालांकि, इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि संबंधित संस्थान आयोग के निर्देशों का कितना पालन करते हैं और लंबित शिकायतों का समाधान कितनी जल्दी होता है।

Raish Ahmed

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