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ULLAS योजना: शिक्षक प्रशिक्षणार्थियों को 5 से 8 निरक्षर लोगों को साक्षर बनाने की जिम्मेदारी, मिलेगा अकादमिक क्रेडिट

केंद्र सरकार ने शिक्षक शिक्षा संस्थानों (TEI) में प्रशिक्षण ले रहे विद्यार्थियों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत मान्यता प्राप्त शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को 5 से 8 ऐसे लोगों को साक्षर बनाने और उन्हें प्रमाणपत्र दिलाने में मदद करनी होगी, जो पढ़ना-लिखना नहीं जानते। इस पहल का उद्देश्य देशभर में वयस्क साक्षरता को बढ़ावा देना है।

इस कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षणार्थियों को उनके प्रयासों के आधार पर अकादमिक क्रेडिट दिए जाएंगे। क्रेडिट इस बात पर निर्भर करेंगे कि उनके सहयोग से कितने शिक्षार्थी सफलतापूर्वक साक्षरता प्रमाणन हासिल करते हैं।

केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत सिंह ने ULLAS–नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत शिक्षक शिक्षा संस्थानों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए। इस कार्यक्रम को न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम (NILP) के नाम से भी जाना जाता है। केंद्र प्रायोजित यह योजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप है। इसका उद्देश्य वयस्कों में साक्षरता बढ़ाना और जीवनभर सीखने के अवसर उपलब्ध कराना है।

BEd और MEd सहित कई पाठ्यक्रमों के विद्यार्थी होंगे शामिल

नए दिशा-निर्देश राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) से मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रमों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों पर लागू होंगे। इनमें बैचलर ऑफ एजुकेशन (BEd), बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन (BPEd), मास्टर ऑफ एजुकेशन (MEd) और मास्टर ऑफ फिजिकल एजुकेशन (MPEd) जैसे पाठ्यक्रम शामिल हैं। इन पाठ्यक्रमों के प्रशिक्षणार्थी कार्यक्रम के तहत स्वयंसेवी शिक्षक के रूप में काम करेंगे।

ये दिशा-निर्देश स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने विभिन्न संबंधित पक्षों के साथ चर्चा के बाद तैयार किए हैं। इनमें राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE), राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT), साक्षरता के लिए राष्ट्रीय केंद्र (CNCL), राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET), राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण, जिला प्रशासन, शिक्षक शिक्षा संस्थानों और प्रशिक्षणार्थियों की भूमिकाएं तथा जिम्मेदारियां तय की गई हैं।

15 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों को मिलेगा लाभ

ULLAS कार्यक्रम का उद्देश्य 15 वर्ष या उससे अधिक उम्र के उन लोगों को साक्षर बनाना है, जो किसी कारण से औपचारिक शिक्षा हासिल नहीं कर सके। इसके जरिए उन्हें पढ़ने-लिखने का बुनियादी ज्ञान देने और समाज में अधिक सक्रिय रूप से भाग लेने में मदद की जाती है।

यह कार्यक्रम ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों माध्यमों से चलाया जाता है। इसके तहत स्वयंसेवक शिक्षार्थियों को पढ़ाने में सहयोग करते हैं। शिक्षक प्रशिक्षणार्थियों के अलावा स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी भी इसमें स्वयंसेवक बन सकते हैं।

इसके साथ ही नेहरू युवा केंद्र संगठन, राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS), राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC), सामाजिक संगठनों और स्थानीय समुदायों के सदस्य भी इस पहल से जुड़ सकते हैं। गृहिणियां, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (आशा) और अन्य साक्षर लोग भी अपनी इच्छा से इसमें योगदान दे सकते हैं।

वयस्क साक्षरता और जीवनभर सीखने पर जोर

ULLAS पहल वयस्कों में बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान को बढ़ावा देने की सरकार की व्यापक कोशिशों का हिस्सा है। इसके तहत जरूरी जीवन कौशल विकसित करने पर भी ध्यान दिया जाता है।

इस कार्यक्रम का लक्ष्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उस उद्देश्य को आगे बढ़ाना है, जिसके तहत सभी के लिए शिक्षा और जीवनभर सीखने के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। शिक्षक प्रशिक्षणार्थियों की भागीदारी से निरक्षर वयस्कों तक शिक्षा पहुंचाने और साक्षरता अभियान को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

Raish Ahmed

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