
पाकिस्तान में प्रदूषण से हाहाकार मचा हुआ है। पाकिस्तान के कई शहरों का AQI भारत की अपेक्षा 4 से पांच 5 गुणा से भी अधिक पहुंच गया है। यहाँ भारत से करीब चार से पांच गुणा अधिक प्रदूषण है। प्रदुषण के कारण हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। कई ज़िलों में स्कूल, कॉलेज को बंद कर दिया गया है।
पाकिस्तान में पंजाब सरकार ने खतरनाक धुंध और प्रदूषण के स्तर के कारण 8 से 17 नवंबर तक कई जिलों में सभी निजी और सरकारी स्कूलों एवं कालेजों को बंद करने का आदेश दिया है। प्रांत का एक बड़ा हिस्सा घनी धुंध का सामना कर रहा है और वायु गुणवत्ता सूचकांक खतरनाक स्तर पर बना हुआ है। स्कूलों को बंद करने के आदेश का असर लाहौर, ननकाना साहिब, गुजरात, हफीजाबाद, मंडी बहाउद्दीन, सियालकोट, नरोवाल, चिनियट, गुजरांवाला, फैसलाबाद, मुल्तान, शेखूपुरा, कसूर, झंग, टोबा टेक सिंह और शेखूपुरा के साथ-साथ लोधरन समेत कई शहरों में पड़ने वाला है।
आईक्यूएयर के अनुसार, यहाँ पीएम 2.5 कण (हवा में उपस्थित सूक्ष्म कण पदार्थ, जो स्वास्थ्य को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाते हैं) की सांद्रता 947 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गई है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दिशा-निर्देशों से 189.4 गुना अधिक है।
हालत यह है कि पाकिस्तान के सात शहर दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहे। मुल्तान में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 2,135 और लाहौर में 676 दर्ज किया गया। पेशावर, इस्लामाबाद, हरिपुर, रावलपिंडी और कराची जैसे शहरों की हवा को भी ‘खतरनाक वायु गुणवत्ता’ वाला बताया गया।
इस बीच पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार के विरुद्ध तीन वर्ष की बच्ची ने लाहौर हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कराई है। याचिका में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 99-ए के तहत सरकार लोगों को स्वच्छ एवं स्वस्थ पर्यावरण उपलब्ध कराने के लिए बाध्य है। यह याचिका प्रांत की राजधानी लाहौर के लगातार विश्व के सर्वाधिक प्रदूषित शहर बने रहने और धुंध के गंभीर प्रभाव में जीने की विवशता को लेकर दाखिल कराई गई है।




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