
केरल विश्वविद्यालय (University of Kerala) की संस्कृत विभागाध्यक्ष और डीन सी.एन. विजयकुमारी के खिलाफ एक शोधार्थी से कथित तौर पर जातिसूचक टिप्पणी करने के आरोप में पुलिस ने मामला दर्ज किया है। यह मामला विश्वविद्यालय के करियावत्तम कैंपस से जुड़ा है।
शिकायत के अनुसार, वंचीयूर निवासी शोधार्थी विपिन विजयन ने आरोप लगाया है कि प्रोफेसर विजयकुमारी ने उनके पीएचडी थीसिस पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया और इस दौरान उनके खिलाफ अपमानजनक जातिसूचक टिप्पणी की।
शोधार्थी का आरोप: “निचली जातियों के लोग संस्कृत नहीं सीख सकते”
विपिन विजयन ने बताया कि 15 अक्टूबर को ओपन डिफेंस के बाद जब वे थीसिस पर साइन के लिए प्रोफेसर के पास गए, तो उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि “निचली जातियों के लोग संस्कृत नहीं सीख सकते।”
एफआईआर में यह भी दर्ज है कि विजयकुमारी ने कथित तौर पर यह कहा, “ऐसे लोगों के कमरे में आने के बाद मैं पानी से सफाई करती हूं।”
शोधार्थी का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब ऐसी टिप्पणी की गई हो। उन्होंने आरोप लगाया कि 2015 से, जब उन्होंने एम.फिल. की पढ़ाई शुरू की थी, तब से ही प्रोफेसर विजयकुमारी इस तरह की टिप्पणी करती आ रही हैं।
गैर-जमानती धाराओं में केस, विस्तृत जांच जारी
स्रीकरियम पुलिस ने इस मामले में प्रोफेसर के खिलाफ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराओं 3(1)(r) और 3(1)(s) के तहत एफआईआर दर्ज की है।
ये धाराएं किसी व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से उसकी जाति के आधार पर अपमानित करने से संबंधित हैं। पुलिस के अनुसार, यह अपराध गैर-जमानती (Non-bailable) श्रेणी में आता है। इसलिए गिरफ्तारी से पहले सभी तथ्यों और सबूतों की विस्तृत जांच की जाएगी।
प्रोफेसर विजयकुमारी ने लगाए गए सभी आरोपों से किया इनकार
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रोफेसर सी.एन. विजयकुमारी ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप झूठे और भ्रामक हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने थीसिस पर साइन इसलिए नहीं किए क्योंकि शोध कार्य में कई त्रुटियां थीं और छात्र को संस्कृत भाषा का आवश्यक ज्ञान नहीं था।
विश्वविद्यालय ने मांगी रिपोर्ट, जांच पर सभी की निगाहें
केरल विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आंतरिक जांच की रिपोर्ट मांगी है। विश्वविद्यालय ने कहा है कि मामले की सच्चाई सामने आने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
भारत के कई विश्वविद्यालयों में जाति-आधारित भेदभाव से जुड़ी शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। यूजीसी (UGC) और मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने बार-बार उच्च शिक्षण संस्थानों को ऐसे मामलों में संवेदनशील और निष्पक्ष रवैया अपनाने की सलाह दी है। केरल विश्वविद्यालय का यह मामला फिर से इस मुद्दे को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ले आया है।




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