
राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज होने के बाद, दिल्ली सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब कक्षा 5 तक के बच्चों की पढ़ाई हाइब्रिड मोड में होगी — यानी स्कूल चाहें तो ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से कक्षाएं चला सकते हैं।
यह निर्णय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के निर्देशों के बाद लिया गया है, जिसने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के स्टेज-II को लागू करने का आदेश दिया है। आदेश के मुताबिक, सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों को बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।
स्कूलों में हाइब्रिड मोड लागू
शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश तुरंत प्रभाव से लागू होगा और अगले आदेश तक जारी रहेगा। सभी स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कक्षा 5 तक के विद्यार्थियों की पढ़ाई या तो ऑनलाइन कराई जाए या हाइब्रिड मोड में हो। स्कूल प्राचार्यों को निर्देश दिया गया है कि वे यह सूचना तुरंत अभिभावकों तक पहुंचाएं।अभिभावक अपने-अपने स्कूलों से संपर्क कर यह जानकारी प्राप्त कर सकते हैं कि कक्षाएं किस समय और किस माध्यम से होंगी।
इस पहल का उद्देश्य बच्चों को जहरीली हवा के सीधे संपर्क में आने से बचाना है। शिक्षा विभाग ने स्कूलों से अपील की है कि वे बच्चों की सेहत को सर्वोच्च प्राथमिकता दें और घर से पढ़ाई के लिए आवश्यक डिजिटल साधन उपलब्ध कराएं।
दिल्ली-एनसीआर की हवा ‘सांस लेने लायक नहीं’
राजधानी की हवा फिलहाल बेहद खराब स्थिति में है। मंगलवार सुबह दिल्ली का AQI 425 दर्ज किया गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। यह स्तर स्वास्थ्य के लिए अत्यंत खतरनाक माना जाता है। शुक्रवार (10 नवंबर) को AQI 362 था, लेकिन हवा की गति कम होने और तापमान गिरने से प्रदूषण अचानक बढ़ गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मौसम में सुधार नहीं हुआ, तो AQI 500 तक पहुंच सकता है, जो “आपात” स्तर माना जाता है। डॉक्टरों ने लोगों को सलाह दी है कि वे मास्क पहनकर ही बाहर निकलें, विशेषकर बच्चे, बुजुर्ग और अस्थमा के मरीज अनावश्यक रूप से घर से बाहर न जाएं।
CAQM ने GRAP चरण-III लागू किया
वायु गुणवत्ता में तेजी से गिरावट को देखते हुए CAQM ने दिल्ली-एनसीआर में GRAP का तीसरा चरण लागू कर दिया है। इसके तहत निर्माण कार्यों पर रोक लगाई जाएगी।डीजल जेनरेटर और पुराने वाहनों पर सख्ती होगी। सरकारी एजेंसियों को सड़क पर धूल और कचरे की सफाई के लिए फॉगिंग और वॉटर स्प्रे करने के निर्देश दिए गए हैं।
आयोग ने कहा है कि स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है और वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए जरूरत पड़ने पर आगे और सख्त कदम उठाए जाएंगे।
विशेषज्ञों की चेतावनी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा वायु गुणवत्ता बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए गंभीर स्वास्थ्य खतरा है। प्रदूषित हवा में मौजूद सूक्ष्म कण (PM 2.5) फेफड़ों और दिल पर गहरा असर डालते हैं।
दिल्ली के कई प्रमुख अस्पतालों में सांस की तकलीफ, खांसी और आंखों में जलन की शिकायतों में इजाफा देखा गया है। डॉक्टरों ने नागरिकों को सलाह दी है कि घरों में एयर प्यूरिफायर का इस्तेमाल करें, बच्चों को सुबह या शाम के समय बाहर खेलने से रोकें, और पर्याप्त पानी व पोषक आहार लें ताकि शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे।
दिल्ली में प्रदूषण के कारण
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, प्रदूषण बढ़ने की प्रमुख वजहें हैं —
- पराली जलाना (मुख्यतः पंजाब और हरियाणा में),
- वाहनों से निकलता धुआं,
- निर्माण कार्यों की धूल,
- और मौसम का ठहराव।
हवा की रफ्तार कम होने के कारण प्रदूषक कण वायुमंडल में फंस गए हैं, जिससे दिल्ली की हवा और अधिक जहरीली हो गई है।
दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार के फैसले और CAQM के निर्देश स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं। हाइब्रिड मोड में पढ़ाई फिलहाल बच्चों को प्रदूषण से बचाने के लिए एक जरूरी कदम है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि दीर्घकालिक समाधान तभी संभव होगा जब दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के स्रोतों पर स्थायी नियंत्रण किया जाए।




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