
पंजाब विश्वविद्यालय में चल रहे छात्र विरोध प्रदर्शनों का असर अब परीक्षाओं पर भी पड़ गया है। सीनेट चुनाव में देरी को लेकर जारी आंदोलन के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने 18 से 20 नवंबर तक होने वाली सभी परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं। परीक्षा नियंत्रक जगत भूषण ने कहा कि नई तिथियों की घोषणा जल्द की जाएगी और छात्रों से विश्वविद्यालय के आधिकारिक चैनलों पर नियमित अपडेट देखने की अपील की गई है।
सीनेट चुनाव पर टकराव, आंदोलन और प्रशासन का फैसला
छात्र लंबे समय से सीनेट चुनाव की तारीख घोषित करने की मांग कर रहे हैं। विरोध कर रहे छात्र समूहों ने चेतावनी दी थी कि जब तक चुनाव कार्यक्रम की घोषणा नहीं होती, वे परीक्षाओं का बहिष्कार करेंगे और कैंपस में परीक्षा आयोजित नहीं होने देंगे। इसी तनावपूर्ण माहौल के बीच विश्वविद्यालय ने परीक्षाएं स्थगित करने का निर्णय लिया।
12 नवंबर को छात्र प्रतिनिधियों और कुलपति के बीच हुई बैठक में वीसी ने बताया कि चुनाव कार्यक्रम कुलाधिपति के अनुमोदन के लिए भेजा गया है और जल्द मंजूरी मिलने की संभावना है। हालांकि छात्रों ने साफ कहा है कि आधिकारिक घोषणा होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
PUCSC और छात्र संगठनों की सख्त स्थिति
पंजाब विश्वविद्यालय परिसर छात्र परिषद (PUCSC) के उपाध्यक्ष अश्मीत सिंह ने दोहराया कि उनकी मुख्य मांग—सीनेट चुनाव कार्यक्रम की घोषणा—पूरी होने तक विरोध खत्म नहीं होगा।
छात्र ‘पंजाब विश्वविद्यालय बचाओ मोर्चा’ के बैनर तले कुलपति कार्यालय के पास लगातार धरना दे रहे हैं। शुरुआत में यह विरोध केंद्र सरकार द्वारा सीनेट और सिंडिकेट के पुनर्गठन संबंधी अधिसूचना के खिलाफ था।
7 नवंबर को बढ़ते दबाव के बाद शिक्षा मंत्रालय ने 28 अक्टूबर की अधिसूचना वापस ले ली, लेकिन छात्र आंदोलन ठंडा नहीं पड़ा। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता और पंजाब की हिस्सेदारी से जुड़े मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं।
“विश्वविद्यालय बंद” का आह्वान और बढ़ता राजनीतिक समर्थन
छात्रों ने सोमवार को “विश्वविद्यालय बंद” का आह्वान किया, जिसे पंजाब के कई राजनीतिक दलों और किसान संगठनों का समर्थन मिला है। आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल (शिअद) और संयुक्त किसान मोर्चा जैसे बड़े संगठनों ने छात्रों की मांगों को जायज़ बताते हुए आंदोलन के साथ एकजुटता दिखाई है।
शनिवार को शिअद प्रमुख सुखबीर सिंह बादल भी प्रदर्शनकारी छात्रों से मिले। उन्होंने कहा कि पंजाब विश्वविद्यालय राज्य की पहचान है और इसे कमजोर करने या “केंद्र के अधीन करने” की किसी भी कोशिश का जोरदार विरोध किया जाएगा। बादल ने दावा किया कि पंजाब के किसी संस्थान पर “कब्जा करने” की यह पहली कोशिश है और जल्द ही शिअद का एक प्रतिनिधिमंडल उपराष्ट्रपति से मुलाकात कर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग करेगा।
कैंपस में अनिश्चितता, छात्रों में चिंता
परीक्षा स्थगित होने से हजारों छात्रों की तैयारी और शैक्षणिक योजना प्रभावित हुई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि छात्रों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए जल्द नई तारीखें जारी की जाएंगी।
फिलहाल, कैंपस में हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हैं। छात्रों के विरोध और राजनीतिक समर्थन के बीच यह मामला सिर्फ चुनाव तिथि की घोषणा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पंजाब विश्वविद्यालय की स्वायत्तता और पहचान से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुका है।
जैसे-जैसे आंदोलन तेज हो रहा है, अब निगाहें कुलाधिपति की मंजूरी और विश्वविद्यालय प्रबंधन के अगले कदम पर टिकी हैं।




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