
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घोषणा की है कि राज्य सरकार IIT Bombay का आधिकारिक नाम बदलकर IIT Mumbai करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को औपचारिक पत्र भेजेगी। यह बयान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह की हालिया टिप्पणी के बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि “IIT Bombay का नाम मुंबई नहीं किया गया, यह अच्छी बात है।” इस टिप्पणी के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई।
फडणवीस ने क्या कहा?
नागपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान फडणवीस ने कहा कि मुंबई का नाम औपचारिक रूप से अपनाने में भाजपा नेता राम नाइक की प्रमुख भूमिका रही है। उन्होंने कहा: “हम ‘मुंबई’ कहते हैं, ‘बॉम्बे’ नहीं। जहां भी ‘बॉम्बे’ शब्द है, उसे ‘मुंबई’ किया जाना चाहिए। इसी के तहत मैं प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री को IIT Bombay का नाम बदलने के लिए पत्र लिखूंगा।”
फडणवीस के अनुसार, यह कदम राज्य की सांस्कृतिक पहचान को मजबूती देने के प्रयासों का हिस्सा है।
राज ठाकरे का विरोध और तीखी प्रतिक्रिया
MNS प्रमुख राज ठाकरे ने केंद्रीय मंत्री के बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि: मुंबई हमेशा मराठी लोगों की रही है। बार-बार शहर को महाराष्ट्र से अलग दिखाने की कोशिश हो रही है। “मुंबई” नाम कुछ लोगों को इसलिए चुभता है क्योंकि यह मुम्बादेवी के नाम पर आधारित है
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पहले शहर का नाम कमजोर करने की कोशिश होगी, फिर पूरा MMR क्षेत्र गुजरात से जोड़ने की राह बनाई जाएगी। MNS ने मराठी समुदाय से सतर्क रहने की अपील की।
MNS कार्यकर्ताओं ने IIT के बाहर लगाया ‘IIT Mumbai’ का बैनर
बुधवार को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के कार्यकर्ताओं ने IIT Bombay परिसर के बाहर एक बड़ा बैनर लगाया, जिसमें संस्थान को प्रतीकात्मक रूप से “IIT Mumbai” लिखा गया था। इसके बाद मुद्दा और गर्म हो गया।
बीजेपी नेता किरिट सोमैया का समर्थन
पूर्व सांसद किरिट सोमैया ने भी नाम परिवर्तन के प्रस्ताव का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इसे जल्द केंद्र के पास भेजेगी। साथ ही उन्होंने यह भी मांग रखी कि Bombay High Court का नाम भी बदलकर Mumbai High Court किया जाना चाहिए।
मुंबई नाम कब अपनाया गया?
शहर का नाम 1995 में आधिकारिक रूप से बॉम्बे से मुंबई किया गया था। यह परिवर्तन स्थानीय देवी मुम्बादेवी के सम्मान में और औपनिवेशिक नामकरण को हटाने के उद्देश्य से किया गया था। तब से राज्य सरकार लगातार “मुंबई” नाम को संस्थागत रूप से अपनाने पर जोर देती रही है।




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