
सरकार ने संसद के उच्च सदन राज्यसभा (Rajya Sabha) को बताया कि वर्तमान में लगभग 200 देशों के 72,218 विदेशी छात्र भारत में पढ़ाई कर रहे हैं। शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार (Sukanta Majumdar) ने प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों के उत्तर में यह आंकड़ा बताया।
मंत्री मजूमदार ने कहा कि ये छात्र विभिन्न पाठ्यक्रमों में दाखिला लेकर भारत की शिक्षा प्रणाली का हिस्सा हैं। सरकार विदेश विश्वविद्यालयों और छात्र समुदाय से जुड़ाव बढ़ाने के लिए कई कदम उठा रही है — ताकि भारत में अंतरराष्ट्रीय शिक्षा और अध्ययन का स्तर ऊँचा हो सके।
भारत के लिए रिकॉर्ड: 54 संस्थान हुए QS रैंकिंग 2026 में शामिल
मज़ूमदार ने सरकार की ओर से यह भी बताया कि इस वर्ष (2026) की QS World University Rankings (QS WUR) में 54 भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों को स्थान मिला है। यह 2014-15 के समय की तुलना में बहुत बड़ी छलांग है— उस समय सिर्फ 11 संस्थाओं को रैंकिंग में शामिल किया गया था।
उन्होंने बताया कि यह अब तक भारत का QS रैंकिंग में सबसे बड़ा प्रतिनिधित्व है। सरकार और संस्थान दोनों मिलकर शिक्षा, रिसर्च और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरने की दिशा में काम कर रहे हैं। पिछले पांच सालों में QS रैंकिंग में शामिल संस्थानों की संख्या दोगुनी हो चुकी है — 2021 में 27 संस्थाएं थीं, अब 54 हो गईं हैं।
फंडिंग व विश्व-स्तरीय संस्थान: “Institution of Eminence” योजना
सरकार ने निजी और सार्वजनिक दोनों श्रेणी के उच्च शिक्षण संस्थानों को “विश्व-स्तरीय संस्थान” (World Class Institutions) बनाने के लिए पहल शुरू की है। यह योजना उन संस्थानों को चुनने पर केंद्रित थी, जिन्हें Institution of Eminence (IoE) का दर्जा दिया जा सके।
अब तक कुल 12 संस्थानों को IoE घोषित किया जा चुका है — जिनमें से 8 सार्वजनिक और 4 निजी संस्थाएं हैं। हालांकि, योजना के तहत वित्तीय समर्थन केवल सार्वजनिक संस्थानों को दिया जाता है। शुरू से अब तक, इन 8 सार्वजनिक संस्थानों के लिए लगभग ₹6,198.99 करोड़ की राशि स्वीकृत की जा चुकी है, जिससे इन संस्थानों की आधारभूत संरचना और रिसर्च क्षमता मजबूत होगी।
NEP 2020 को दिया श्रेय
मंत्रालय ने कहा कि NEP 2020 के दिशा-निर्देशों के तहत किए गए सुधारों — जैसे बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर, शोध एवं नवाचार को बढ़ावा, और अकादमिक–उद्योग संबंध — ने भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता सुधारी है। सरकारी डेटा के अनुसार, इन पहलों ने QS व अन्य अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में भारतीय HEIs (Higher Education Institutions) के प्रदर्शन में सुधार लाने में मदद की है।
क्या इससे वाकई शिक्षा विश्व-स्तरीय बनेगी?
विदेशी छात्रों की बड़ी संख्या (72,218) यह संकेत देती है कि अब भारत उच्च शिक्षा में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए आकर्षक बन रहा है। QS रैंकिंग में 54 संस्थानों का शामिल होना एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन यह याद रखना होगा कि सिर्फ रैंकिंग ही पर्याप्त नहीं — उच्च गुणवत्ता, शोध, सुविधाएँ और रोज़गार-प्रयोजन (placements) भी मायने रखते हैं।
फंडिंग— विशेष रूप से सार्वजनिक संस्थानों के लिए— जरूरी है, लेकिन इससे बुनियादी सुधारों के साथ-साथ लंबी अवधि में बदलाव दिखना चाहिए। NEP 2020 जैसी नीतियाँ सुधार की राह खोल रही हैं, लेकिन बदलाव की प्रक्रिया धीरे-धीरे होगी, और हर संस्थान उस सुधार का लाभ नहीं उठा पाएगा।
हालिया आंकड़ों और सरकारी बयानों से नज़र आता है कि भारत का उच्च शिक्षा क्षेत्र धीरे-धीरे वैश्विक मानकों से जुड़ रहा है। विदेशी छात्रों की बढ़ती संख्या, QS रैंकिंग में सुधार, और “IoE” जैसे प्रोग्राम इस दिशा में बड़े कदम हैं। हालांकि, रैंकिंग और फंडिंग पर्याप्त नहीं — संस्थानों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध-संशोधन, और रोज़गार-तैयारी पर भी ध्यान देना होगा। अगर इन प्रयासों को जमीनी स्तर पर सक्रिय रूप से लागू किया जाए, तो आने वाले समय में भारत एक भरोसेमंद, विश्वस्तरीय शिक्षा हब बन सकता है।




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