
उच्च शिक्षा संस्थानों (HEIs) की मान्यता प्रक्रिया पर एक संसदीय पैनल ने गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि नेशनल असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन काउंसिल (NAAC) की मौजूदा प्रणाली अत्यधिक लंबी, जटिल और ब्यूरोक्रेटिक हो चुकी है। पैनल का कहना है कि इस प्रक्रिया में तत्काल सुधार की जरूरत है ताकि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को अनावश्यक प्रशासनिक बोझ से राहत मिल सके।
यह रिपोर्ट कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली संसद की शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी स्थायी समिति ने प्रस्तुत की है। समिति ने NAAC की गिरती विश्वसनीयता को लेकर भी चिंता जताई और इसे जल्द बहाल करने की बात कही।
NAAC की मान्यता प्रक्रिया को सरल बनाने की सिफारिश
पैनल ने कहा कि मौजूदा मान्यता और री-एक्रेडिटेशन प्रक्रिया इतनी जटिल है कि विश्वविद्यालय प्रशासन का बड़ा समय सालाना रिपोर्ट्स और नियमित मूल्यांकन में चला जाता है।
रिपोर्ट के अनुसार हर साल पांच री-एक्रेडिटेशन और विस्तृत सालाना रिपोर्ट तैयार करना संस्थानों के लिए भारी पड़ता है। मान्यता टीम को साइट विजिट करना पड़ता है, जो कई स्तरों पर मुश्किल और समय लेने वाला होता है।
समिति का मानना है कि HEIs के लिए सिस्टम को तेज, पारदर्शी और सरल बनाया जाए ताकि शिक्षा संस्थानों की ऊर्जा शिक्षा के वास्तविक सुधार पर लग सके।
“बाइनरी एक्रेडिटेशन मॉडल” अपनाने का सुझाव
NAAC की ग्रेडिंग प्रणाली को लेकर भी पैनल ने अहम टिप्पणी की। समिति ने कहा कि मौजूदा ग्रेडिंग मॉडल में कई बार मनमर्जी की गुंजाइश रहती है।
इसलिए पैनल ने सुझाव दिया कि ग्रेड देने की बजाय एक बाइनरी मॉडल अपनाया जाए, यानी केवल “एक्रेडिटेड” या “नॉट एक्रेडिटेड”। इससे प्रणाली सरल होगी और मान्यता प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी।
रिश्वत मामले के बाद NAAC की विश्वसनीयता पर सवाल
हाल में NAAC में एक कथित रिश्वत मामले की जांच शुरू की गई है, जिसके बाद संस्थान की साख पर गंभीर सवाल उठे हैं। पैनल ने कहा लगभग 200 संस्थानों की ग्रेडिंग में बदलाव और करीब 900 पीयर असेसर को हटाए जाने से यह स्पष्ट है कि सुधार की आवश्यकता बहुत गहरी है।
समिति ने NAAC में विस्तृत आंतरिक जांच की सिफारिश करते हुए कहा है कि जांच के निष्कर्ष पैनल के साथ साझा किए जाएं।
UGC में नेतृत्व की कमी, नया चेयरपर्सन जल्द नियुक्त करने की सलाह
समिति ने बताया कि यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के चेयरपर्सन का पद अप्रैल 2025 से खाली है।
रिपोर्ट ने NEP 2020 का हवाला देते हुए कहा— उच्च शिक्षा संस्थानों में नेतृत्व पद खाली नहीं छोड़े जाने चाहिए। नेतृत्व परिवर्तन के दौरान एक ओवरलैपिंग अवधि सुनिश्चित की जानी चाहिए।
इसलिए सरकार से अनुरोध किया गया है कि UGC के लिए नया चेयरपर्सन जल्द से जल्द नियुक्त किया जाए ताकि संस्थागत कार्य सुचारू रूप से चल सकें।
ICHR, ICPR और ICSSR में फंडिंग और फेलोशिप बढ़ाने की मांग
समिति ने तीन प्रमुख अनुसंधान संस्थानों— इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टोरिकल रिसर्च (ICHR), इंडियन काउंसिल ऑफ फिलॉसॉफिकल रिसर्च (ICPR) और इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च (ICSSR)—की फंडिंग और संसाधनों की कमी को गंभीर मुद्दा बताया।
पैनल के अनुसार, इन संस्थानों की मौजूदा ग्रांट उनके “महत्वपूर्ण कार्यों” के लिए पर्याप्त नहीं है। बुनियादी ढांचे की कमी और लंबे समय से खाली पद शोध कार्य को प्रभावित कर रहे हैं।
ICHR पर विशेष रूप से ध्यान देते हुए, समिति ने कहा कि जूनियर रिसर्च फेलोशिप केवल 80 छात्रों तक सीमित है। फेलोशिप की राशि 17,600 रुपये प्रति माह बहुत कम है, जबकि UGC-JRF 37,000 रुपये प्रतिमाह देता है। इसलिए फेलोशिप राशि और चयनित छात्रों की संख्या बढ़ाने की सिफारिश की गई है।
संसदीय पैनल की यह रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली में कई स्तरों पर सुधार की जरूरत है— NAAC की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाने से लेकर UGC में नेतृत्व की कमी दूर करने तक, और शोध संस्थानों की फंडिंग मजबूत करने तक। यदि सरकार इन सिफारिशों पर जल्द कदम उठाती है, तो उच्च शिक्षा क्षेत्र में गुणवत्ता, पारदर्शिता और शोध का स्तर काफी बेहतर हो सकता है।




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