
भारत वैश्विक स्तर पर हाई-इंपैक्ट रिसर्च के क्षेत्र में तेजी से अपनी मौजूदगी मजबूत कर रहा है। ऑस्ट्रेलियन स्ट्रेटेजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट (ASPI) की क्रिटिकल टेक्नोलॉजी ट्रैकर रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एडवांस्ड कंप्यूटिंग समेत कई अहम तकनीकों में दुनिया के शीर्ष पांच देशों में शामिल हो चुका है। खास बात यह है कि रिसर्च के स्तर पर भारत ने कई क्षेत्रों में अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए दूसरा स्थान हासिल किया है।
ASPI की यह रिपोर्ट दुनिया की 74 महत्वपूर्ण तकनीकों में हो रहे रिसर्च पर नजर रखती है। रिपोर्ट बताती है कि भारत अब करीब 50 टेक्नोलॉजी क्षेत्रों में टॉप-5 देशों की सूची में पहुंच गया है। यह संकेत है कि भारत की रिसर्च क्षमता केवल बढ़ नहीं रही, बल्कि उसका वैश्विक असर भी लगातार मजबूत हो रहा है।
भारत और चीन की हिस्सेदारी बढ़ी, पश्चिमी देशों की घटती पकड़
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और चीन की वैश्विक हाई-इंपैक्ट रिसर्च में हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है, जबकि अमेरिका, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन की हिस्सेदारी में गिरावट दर्ज की गई है। भारत एडवांस्ड एयरक्राफ्ट इंजन (हाइपरसोनिक तकनीक सहित), ड्रोन, वैक्सीन, सेमीकंडक्टर डिजाइन, साइबर सिक्योरिटी, क्रिटिकल मिनरल्स एक्सट्रैक्शन और एडवांस्ड डेटा एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में शीर्ष देशों में गिना जा रहा है।
चीन की बढ़त सबसे ज्यादा
रिपोर्ट में चीन की मजबूत स्थिति भी सामने आई है। ट्रैकर में शामिल 74 में से 66 तकनीकों में चीन को नंबर-एक रैंक दी गई है। इनमें परमाणु ऊर्जा, सिंथेटिक बायोलॉजी और छोटे सैटेलाइट जैसी रणनीतिक तकनीकें शामिल हैं। इसके मुकाबले अमेरिका अब केवल 8 तकनीकों में ही लीड कर रहा है, जिनमें क्वांटम कंप्यूटिंग और जियोइंजीनियरिंग प्रमुख हैं।
ASPI के मुताबिक, 2000 के दशक की शुरुआत में अमेरिका लगभग हर तकनीकी क्षेत्र में आगे था, लेकिन चीन ने मौलिक रिसर्च में लगातार निवेश कर धीरे-धीरे यह बढ़त हासिल की है।
नई टेक्नोलॉजी में भी चीन की पकड़
हाल के वर्षों में ट्रैकर में जोड़ी गई 10 नई तकनीकों में से क्लाउड कंप्यूटिंग, जेनरेटिव एआई और कंप्यूटर विजन समेत चार क्षेत्रों में चीन को हाई टेक्नोलॉजी मोनोपॉली रिस्क रेटिंग दी गई है। इसका मतलब यह है कि इन क्षेत्रों की अहम विशेषज्ञता और रिसर्च बड़े पैमाने पर चीनी संस्थानों में केंद्रित हो गई है।
अमेरिका की बढ़त कहां कायम
हालांकि, अमेरिका अब भी न्यूरोप्रोस्थेटिक्स (मस्तिष्क से जुड़े उपकरण) और जियोइंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में आगे बना हुआ है। न्यूरोप्रोस्थेटिक्स वह एकमात्र तकनीक है, जिसमें दुनिया के शीर्ष 10 रिसर्च संस्थानों में कोई भी चीनी संस्थान शामिल नहीं है।
भारत के लिए क्या मायने
विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिपोर्ट भारत के लिए एक सकारात्मक संकेत है। बढ़ती रिसर्च हिस्सेदारी यह दिखाती है कि भारत अब केवल टेक्नोलॉजी अपनाने वाला देश नहीं, बल्कि नई तकनीक गढ़ने वाला अहम वैश्विक केंद्र बनता जा रहा है। आने वाले वर्षों में यह रुझान भारत की रणनीतिक ताकत, औद्योगिक विकास और वैश्विक प्रभाव को और मजबूत कर सकता है।




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