
नई दिल्ली से आई एक नई रिपोर्ट इस बात की ओर इशारा करती है कि आने वाले वर्षों में भारत अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए एक प्रमुख शिक्षा हब के रूप में उभर सकता है। नीति आयोग का कहना है कि यदि उच्च शिक्षा प्रणाली में व्यापक, समन्वित और छात्र-केंद्रित सुधार लागू किए जाते हैं, तो भारत में पढ़ने आने वाले विदेशी छात्रों की संख्या कई गुना बढ़ सकती है। यह बदलाव न सिर्फ शिक्षा क्षेत्र को मजबूती देगा, बल्कि भारत की वैश्विक छवि को भी नया आयाम देगा।
2030 से 2047 तक विदेशी छात्रों की संख्या में तेज बढ़ोतरी संभव
नीति आयोग की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2030 तक भारत में एक लाख से अधिक अंतरराष्ट्रीय छात्रों के आने की संभावना है। वहीं, 2047 तक यह संख्या 7.9 लाख से लेकर 11 लाख तक पहुंच सकती है। रिपोर्ट साफ़ कहती है कि यह वृद्धि तभी संभव है जब भारत अपने शिक्षा ढांचे, नियमों, वित्तीय प्रक्रियाओं, अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग और कैंपस सुविधाओं में ठोस सुधार करे।
रिपोर्ट का आधार और उद्देश्य
‘Internationalisation of Higher Education in India: Prospects, Potential, and Policy Recommendations’ शीर्षक वाली यह रिपोर्ट एक व्यापक ऑनलाइन सर्वे पर आधारित है, जिसमें देश के 160 से अधिक उच्च शिक्षण संस्थानों के कुलपतियों, वरिष्ठ प्रशासकों और नीति निर्माताओं की राय शामिल है।
इस रिपोर्ट का मुख्य उद्देश्य भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना और विश्वस्तरीय मानव संसाधन विकसित करना है।
भारत और वैश्विक छात्रों के बीच असंतुलन चिंता का कारण
रिपोर्ट में यह बड़ी चिंता जताई गई है कि भारत अभी भी विदेशी छात्रों को आकर्षित करने में काफी पीछे है। वर्ष 2024 के आंकड़ों के अनुसार, भारत पढ़ने आने वाले हर एक विदेशी छात्र के मुकाबले लगभग 28 भारतीय छात्र विदेशों में पढ़ाई के लिए गए। नीति आयोग ने इसे भारत के टैलेंट इकोसिस्टम के लिए गंभीर और दीर्घकालिक चुनौती बताया है।
2030, 2035 और 2047 के संभावित लक्ष्य
नीति आयोग ने अलग-अलग वर्षों के लिए संभावित लक्ष्य भी जारी किए हैं:
2030: सामान्य परिस्थिति में 84,000 से 1.30 लाख छात्र
2035: 1.20 लाख से 2.40 लाख छात्र
आक्रामक सुधारों के साथ:
– 2030 तक 1.55 लाख
– 2035 तक 3.60 लाख
– 2047 तक 7.90 लाख से अधिक छात्र
इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए भारत को वैश्विक मानकों के अनुरूप शिक्षण सुविधाएं और सहायता सेवाएं विकसित करनी होंगी।
विदेशी छात्रों को आकर्षित करने के लिए जरूरी कदम
रिपोर्ट में कई व्यावहारिक सुझाव दिए गए हैं, जिन पर अमल करके भारत अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए अधिक आकर्षक बन सकता है:
– वीज़ा प्रक्रिया को और सरल व तेज़ बनाया जाए।
– फीस स्ट्रक्चर पूरी तरह पारदर्शी हो।
– शिकायत निवारण की मजबूत व्यवस्था तैयार की जाए।
– सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण आवास उपलब्ध कराया जाए।
– स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर की जाएं।
– पार्ट-टाइम काम और इंटर्नशिप के पर्याप्त अवसर मिलें।
– पढ़ाई के बाद रोजगार और करियर से जुड़े विकल्प स्पष्ट हों।
‘स्टडी इन इंडिया’ कार्यक्रम को नए सिरे से मजबूत करने की जरूरत
नीति आयोग का कहना है कि ‘Study in India’ कार्यक्रम को एक मजबूत सिंगल डिजिटल प्लेटफॉर्म में बदला जाए। इस प्लेटफॉर्म पर एडमिशन, वीज़ा, स्कॉलरशिप, छात्र सहायता और अन्य सभी सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हों, ताकि विदेशी छात्रों को किसी प्रकार की प्रशासनिक परेशानी न हो।
NEP 2020 के अनुरूप अंतरराष्ट्रीय माहौल तैयार करने पर जोर
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत भारत को अपने कैंपस में अंतरराष्ट्रीय स्तर का माहौल तैयार करना होगा। इसके लिए वैश्विक संस्थानों के साथ साझेदारी बढ़ाना, विदेशी फैकल्टी और छात्रों के लिए अनुकूल माहौल बनाना और शोध सहयोग को प्रोत्साहित करना जरूरी है।
नीति आयोग का मानना है कि यदि ये सुधार समय पर और प्रभावी तरीके से लागू किए जाते हैं, तो भारत 2047 तक एक मजबूत और विश्वसनीय वैश्विक शिक्षा गंतव्य बनकर उभर सकता है।




Add comment