
देश की संसद में 1 फरवरी सुबह 11 बजे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण वित्तीय वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश करेंगी। हर साल की तरह इस बार भी शिक्षा और रोजगार दो ऐसे सेक्टर हैं जिन पर पूरे देश की नज़र टिकी हुई है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बजट में दोनों क्षेत्रों को विशेष प्राथमिकता मिल सकती है, खासकर तब जब बीते कुछ वर्षों में इन दोनों ही सेक्टर में तेज बदलाव देखने को मिले हैं।
केंद्रीय बजट 2025 में शिक्षा के लिए 1,28,650 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार भी शिक्षा के बजट में बढ़ोतरी की घोषणा हो सकती है। आइए समझते हैं कि शिक्षा और रोजगार के मोर्चे पर देश को इस बार के बजट से क्या उम्मीदें हैं।
डिजिटल शिक्षा में अंतर को कम करना बड़ी चुनौती
डिजिटल युग में टेक्नोलॉजी के बिना शिक्षा को आगे बढ़ाना मुश्किल है, लेकिन देश के कई हिस्सों में आज भी डिजिटल सुविधाएँ बेहद सीमित हैं। ग्रामीण और दूरदराज़ इलाक़ों के छात्र ऑनलाइन शिक्षा, स्मार्ट डिवाइस और तेज़ इंटरनेट के अभाव का सामना कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि बजट में डिजिटल गैप को कम करने के लिए विशेष प्रावधान किए जा सकते हैं। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट नेटवर्क मजबूत करना, छात्रों को सस्ते डिजिटल उपकरण उपलब्ध कराना और ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म तक समान पहुंच सुनिश्चित करना शामिल हो सकता है। इससे कमजोर वर्ग के छात्रों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी।
शैक्षणिक संस्थानों का आधुनिकीकरण समय की मांग
सिर्फ कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में सीटें बढ़ा देना पर्याप्त नहीं है। देश के कई शिक्षण संस्थानों में अब भी आधुनिक ढांचा नहीं है। स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लाइब्रेरी, अत्याधुनिक रिसर्च लैब और तकनीकी उपकरण आज की बुनियादी जरूरत बन चुके हैं।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि सरकार इस बार बजट में इन सुविधाओं के लिए अलग से फंड आवंटित कर सकती है। इससे न केवल शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि छात्रों को वैश्विक मानकों के अनुरूप पढ़ने और शोध का मौका भी मिलेगा।
स्किल-बेस्ड शिक्षा और रोजगार सृजन पर जोर
युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए कौशल आधारित शिक्षा को मजबूत करना बेहद जरूरी है। देश में बड़े स्तर पर मेगा स्किल हब स्थापित करने की जरूरत बताई जा रही है। इसके साथ ही स्कूलों में कोडिंग, डिजिटल स्किल्स और व्यावहारिक प्रशिक्षण को बढ़ावा देने की मांग की जा रही है।
उच्च शिक्षा में विज्ञान (Science) स्ट्रीम में सीटें बढ़ाने, आईटीआई और तकनीकी संस्थानों को अपग्रेड करने तथा इंडस्ट्री के साथ साझेदारी में इंटर्नशिप और व्यावसायिक प्रशिक्षण (Vocational Training) के अवसर बढ़ाने की उम्मीद जताई जा रही है।
IIT-IIM में सीटें बढ़ाने की संभावना
प्रमुख संस्थानों में आवेदन की संख्या लगातार बढ़ रही है, जबकि सीटें सीमित हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि IIT, IIM और अन्य शीर्ष संस्थानों में सीटें बढ़ाने पर इस बजट में विशेष ध्यान दिया जा सकता है। इससे अधिक छात्रों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा का अवसर मिलेगा।
इसके अलावा, सुझाव यह भी है कि कंपनियों के CSR फंड का एक हिस्सा शिक्षा क्षेत्र में निवेश के लिए अनिवार्य किया जाए, ताकि निजी क्षेत्र भी शिक्षा के विस्तार में योगदान दे सके।
बजट 2026-27 से शिक्षा और रोजगार दोनों क्षेत्रों में बदलाव की उम्मीदें काफी बड़ी हैं। डिजिटल शिक्षा को बढ़ाना, संस्थानों को आधुनिक बनाना, स्किल-बेस्ड ट्रेनिंग का विस्तार और शीर्ष संस्थानों में सीटें बढ़ाना—ये सभी कदम देश के युवा और शिक्षा क्षेत्र को नई दिशा दे सकते हैं। अब निगाहें 1 फरवरी पर हैं, जब यह साफ होगा कि सरकार इन उम्मीदों पर कितना खरा उतरती है।




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