
बीआरएबीयू मुजफ्फरपुर में पीएचडी शोध कार्य को लेकर बड़ी कार्रवाई सामने आई है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने दर्जनों शोधार्थियों की थीसिस वापस कर दी है। जांच में पाया गया कि इन छात्रों ने अपने शोध में एआई जनरेटेड सामग्री को बिना स्रोत के कॉपी-पेस्ट किया था। यूजीसी को भेजी गई थीसिस में 40 प्रतिशत से अधिक प्लेगरिज्म मिलने के बाद इन्हें रिजेक्ट कर दिया गया।
बीआरएबीयू के कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र राय ने प्लेगरिज्म की बढ़ती शिकायतों को देखते हुए एक विशेष सेल गठित किया है। यह सेल सभी थीसिस को उन्नत प्लेगरिज्म सॉफ्टवेयर से जांच रहा है। प्लेगरिज्म सेल के प्रभारी प्रो. संजय कुमार ने बताया कि जिन छात्रों की थीसिस में गड़बड़ी मिली है, उन्हें पूरा शोध दोबारा तैयार करने के लिए कहा गया है।
सूत्रों के अनुसार, ज्यादातर मामले अंग्रेजी में लिखी गई थीसिस से सामने आए हैं। सॉफ्टवेयर अंग्रेजी कंटेंट में की गई चोरी को तुरंत पकड़ रहा है क्योंकि उसकी गणितीय संरचना अंग्रेजी भाषा के पैटर्न पर अधिक प्रभावी ढंग से काम करती है। वहीं, हिन्दी में कम प्लेगरिज्म सामने आया है, लेकिन शिक्षकों का कहना है कि केवल वही छात्र पकड़े गए हैं जिन्होंने सीधे कॉपी-पेस्ट किया था, जबकि अपनी भाषा में मौलिक रूप से लिखने वाले विद्यार्थियों की थीसिस में कोई समस्या नहीं पाई गई।
प्लेगरिज्म सेल का कहना है कि यूजीसी के पास देशभर की थीसिस का व्यापक डेटाबेस मौजूद है। यही कारण है कि मिलान करते समय चोरी किया गया कंटेंट आसानी से उजागर हो जाता है। विश्वविद्यालय शिक्षकों का मानना है कि मौलिक शोध को बढ़ावा देने और एआई सामग्री के दुरुपयोग को रोकने के लिए इस तरह की सख्ती जरूरी है।
जेआरएफ और पैट प्रक्रिया पर भी निगाह
इस बीच, वर्ष 2025 में जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) क्वालिफाई करने वाले छात्रों की पैट (PAT) में लैटरल एंट्री को लेकर विश्वविद्यालय स्तर पर विचार जारी है। हालांकि, बीआरएबीयू प्रशासन ने अभी तक इस संबंध में कोई औपचारिक अधिसूचना जारी नहीं की है। कई छात्रों ने आवेदन देकर आग्रह किया है कि जेआरएफ पास करने के आधार पर उनका नामांकन किया जाए।
इधर, 2022 बैच के एक पीएचडी शोधार्थी ने विश्वविद्यालय को लिखित रूप से बताया है कि रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में देरी होने से उनका जेआरएफ लैप्स होने का खतरा है। परीक्षा नियंत्रक प्रो. राम कुमार ने छात्र को प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है, ताकि उसकी फेलोशिप प्रभावित न हो।
बीआरएबीयू में सख्त जांच और नई व्यवस्थाओं ने शोध प्रणाली में पारदर्शिता की दिशा में एक अहम कदम बढ़ाया है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, उद्देश्य सिर्फ अध्ययन-अनुशीलन की गुणवत्ता को मजबूत करना है, ताकि भविष्य में किसी भी स्तर पर शोध कार्यों की विश्वसनीयता पर सवाल न उठे।




Add comment