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UPSC CSE 2026 नोटिफिकेशन में दर्जनों गलतियां, आयोग की गुणवत्ता जांच प्रक्रिया पर उठे सवाल

UPSC CSE 2026 नोटिफिकेशन में दर्जनों गलतियां, आयोग की गुणवत्ता जांच प्रक्रिया पर उठे सवाल

UPSC CSE 2026 नोटिफिकेशन में दर्जनों गलतियां, आयोग की गुणवत्ता जांच प्रक्रिया पर उठे सवाल

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा (CSE) 2026 का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। आम तौर पर यह नोटिफिकेशन परीक्षा प्रक्रिया की शुरुआत का संकेत होता है, लेकिन इस बार आयोग परीक्षा से ज्यादा अपने ही दस्तावेज में सामने आई गलतियों को लेकर चर्चा में आ गया है। नोटिफिकेशन जारी होते ही अभ्यर्थियों और शिक्षाविदों का ध्यान उसमें मौजूद भाषा और वर्तनी संबंधी चूकों पर गया, जिसने आयोग की गुणवत्ता जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अभ्यर्थियों और सोशल मीडिया यूजर्स का दावा है कि नोटिफिकेशन में 40 से अधिक स्पेलिंग, ग्रामर और वाक्य संरचना से जुड़ी गलतियां मौजूद हैं। कई जगहों पर एक ही शब्द की गलत और सही स्पेलिंग साथ-साथ दिखने से यह भी संकेत मिला है कि दस्तावेज की अंतिम प्रूफरीडिंग में गंभीर कमी रह गई। उदाहरण के तौर पर ‘Examination’ शब्द को ‘Examinaiton’ लिखा गया है, जो ‘How to Apply’ सेक्शन सहित कई पन्नों पर नजर आया। इसी तरह ‘Candidates’ शब्द चार जगह ‘Cadidates’ के रूप में दर्ज है, जबकि पास ही उसी शब्द की सही स्पेलिंग भी दिखाई देती है।

नोटिफिकेशन के अलग-अलग पेजों पर और भी कई चूकें सामने आई हैं। पेज 7 पर ‘Benchmark’ को ‘Bechmark’ लिखा गया है। पेज 8 पर ‘List of Abbreviations’ की जगह ‘List of Abbriviations’ दर्ज है। पेज 9 पर कोलकाता की स्पेलिंग एक स्थान पर ‘KOLKATTA’ लिखी गई है। पेज 67 पर ‘agro-based industries’ को ‘ago-based industries’ और ‘Public Sector Undertaking’ को ‘public sector underkings’ लिखा गया है। यहां तक कि आखिरी पेज पर ‘BEYOND’ शब्द भी ‘BEYND’ के रूप में नजर आया।

इन त्रुटियों को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई यूजर्स ने स्क्रीनशॉट साझा करते हुए सवाल उठाया है कि अगर अभ्यर्थी अपनी उत्तर पुस्तिका में ऐसी गलतियां करते हैं तो उनके अंक काटे जा सकते हैं, फिर आयोग के आधिकारिक दस्तावेज में इतनी चूक कैसे रह गई। कुछ अभ्यर्थियों का कहना है कि यूपीएससी जैसी प्रतिष्ठित संवैधानिक संस्था से इस स्तर की सावधानी की उम्मीद की जाती है।

यह मामला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यूपीएससी भारत सरकार की एक संवैधानिक संस्था है, जो देश के प्रशासनिक ढांचे के लिए शीर्ष अधिकारियों का चयन करती है। सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से चुने गए अभ्यर्थी आगे चलकर जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, राजनयिक और नीति निर्माण से जुड़े अहम पदों पर कार्य करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इतने महत्वपूर्ण नोटिफिकेशन में बुनियादी गलतियां आयोग की पेशेवर छवि को प्रभावित कर सकती हैं और यह बेहतर गुणवत्ता नियंत्रण और प्रूफरीडिंग की जरूरत को रेखांकित करती हैं।

विवादों के बीच सिविल सेवा परीक्षा 2026 की आवेदन प्रक्रिया अपने तय कार्यक्रम के अनुसार शुरू हो चुकी है। इच्छुक उम्मीदवार 24 फरवरी 2026 तक आधिकारिक वेबसाइट upsconline.nic.in के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। इस वर्ष सिविल सेवा परीक्षा के लिए 933 पदों और भारतीय वन सेवा परीक्षा के लिए 80 पदों की घोषणा की गई है।

हर साल की तरह इस बार भी परीक्षा में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के शामिल होने की उम्मीद है। वर्ष 2025 में 10 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने आवेदन किया था। इनमें से 4,161 अभ्यर्थी प्रारंभिक परीक्षा में सफल हुए, 2,736 इंटरव्यू तक पहुंचे और अंततः 979 उम्मीदवारों का चयन हुआ। इन आंकड़ों से साफ है कि सिविल सेवा परीक्षा न केवल देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है, बल्कि इससे जुड़ा हर आधिकारिक दस्तावेज भी अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में नोटिफिकेशन में सामने आई गलतियों ने आयोग के कामकाज और दस्तावेजी प्रक्रिया पर नई बहस छेड़ दी है।

Asmita Sarkar

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